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दस दिन में सात लाख का नुकसान कर रामपुर पहुंचे दोनों बिगड़ैल हाथी
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दस दिन में सात लाख का नुकसान कर रामपुर पहुंचे दोनों बिगड़ैल हाथी
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। नेपाल से बरेली पहुंचे हाथी दस दिनों तक जिले में उत्पात मचाने के बाद अब रामपुर पहुंच गए हैं। जिले के किसान हाथियों के उत्पात से बर्बाद हुई फसल का मुआवजा मांग रहे हैं। उधर, मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह ने हाथियों को काबू किए जाने के बाद किसानों को उनकी फसलों के नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है।
तीन जुलाई को हाथियों ने दुनका के गांव में प्रवेश किया था। जहां एक किसान को मौत के घाट उतारने के बाद हाथियों ने करीब एक लाख रुपये तक की फसल बरबाद की। अगले दिन उन्होंने परचई गांव के एक बाग में तीन लोगों को जख्मी कर दिया और करीब 80 हजार रुपये की फसल बर्बाद कर डाली। नरखेड़ा की गौंटिया में आधा दर्जन किसानों की करीब दो लाख रुपये तक फसल बरबाद की। दिनरा मिर्जापुर पहुंचे हाथियों ने एक को घायल किया और दर्जन भर से अधिक किसानों की करीब एक लाख रुपये की फसल बर्बाद की। 11 जुलाई को एक किसान को जख्मी किया, मोटर साइकिल और मोबाइल फोन तोड़ा। यहां भी एक लाख रुपये तक की फसल बर्बाद की। 12 जुलाई को मंडनपुर पहुंचकर एक बाग में उत्पात मचाया, बिजली का खंभा झुका दिया। यहां अनुमानित दो लाख रुपये तक के मुआवजे की मांग हुई है। वन अधिकारियों ने मुआवजा भरपाई किए जाने का आश्वासन दिया है।
दुधवा का ‘गजराज’ अब भी बेकाबू
बरेली। शनिवार को नेपाल के दोनों हाथियों का सामना करने पहुंचे ‘गजराज’ ने महावत और सहयोगी को घायल कर दिया था, जिसके बाद उसे टीम ने बांधकर परचई गांव में ही छोड़ दिया है। वहीं, रविवार को भी उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। शाम को दुधवा से आई टीम तीनों हथिनियों को वापस दुधवा ले जाने लगी, जिस पर ग्रामीणों और टीम के बीच झड़प भी हुई।
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ग्रामीणों ने दुधवा की टीम को चौथे हाथी को भी साथ ले जाने को कहा। टीम ने हालत में सुधार होने के बाद ले जाने का आश्वासन दिया तो ग्रामीण नाराज हो गए उन्होंने मीरगंज एसडीएम को कॉल कर मामले की सूचना दी, लेकिन एसडीएम ने कोई सुनवाई नहीं की। ग्रामीणों का कहना है कि टीम के जाने के बाद हाथी बेकाबू हुआ तो काफी जनधन की हानि होगी। देर रात तक ग्रामीणों और टीम के बीच विवाद चलता रहा।
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तीन जुलाई को हाथियों ने दुनका के गांव में प्रवेश किया था। जहां एक किसान को मौत के घाट उतारने के बाद हाथियों ने करीब एक लाख रुपये तक की फसल बरबाद की। अगले दिन उन्होंने परचई गांव के एक बाग में तीन लोगों को जख्मी कर दिया और करीब 80 हजार रुपये की फसल बर्बाद कर डाली। नरखेड़ा की गौंटिया में आधा दर्जन किसानों की करीब दो लाख रुपये तक फसल बरबाद की। दिनरा मिर्जापुर पहुंचे हाथियों ने एक को घायल किया और दर्जन भर से अधिक किसानों की करीब एक लाख रुपये की फसल बर्बाद की। 11 जुलाई को एक किसान को जख्मी किया, मोटर साइकिल और मोबाइल फोन तोड़ा। यहां भी एक लाख रुपये तक की फसल बर्बाद की। 12 जुलाई को मंडनपुर पहुंचकर एक बाग में उत्पात मचाया, बिजली का खंभा झुका दिया। यहां अनुमानित दो लाख रुपये तक के मुआवजे की मांग हुई है। वन अधिकारियों ने मुआवजा भरपाई किए जाने का आश्वासन दिया है।
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दुधवा का ‘गजराज’ अब भी बेकाबू
बरेली। शनिवार को नेपाल के दोनों हाथियों का सामना करने पहुंचे ‘गजराज’ ने महावत और सहयोगी को घायल कर दिया था, जिसके बाद उसे टीम ने बांधकर परचई गांव में ही छोड़ दिया है। वहीं, रविवार को भी उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। शाम को दुधवा से आई टीम तीनों हथिनियों को वापस दुधवा ले जाने लगी, जिस पर ग्रामीणों और टीम के बीच झड़प भी हुई।
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ग्रामीणों ने दुधवा की टीम को चौथे हाथी को भी साथ ले जाने को कहा। टीम ने हालत में सुधार होने के बाद ले जाने का आश्वासन दिया तो ग्रामीण नाराज हो गए उन्होंने मीरगंज एसडीएम को कॉल कर मामले की सूचना दी, लेकिन एसडीएम ने कोई सुनवाई नहीं की। ग्रामीणों का कहना है कि टीम के जाने के बाद हाथी बेकाबू हुआ तो काफी जनधन की हानि होगी। देर रात तक ग्रामीणों और टीम के बीच विवाद चलता रहा।