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वसीम बरेलवी विधान परिषद के लिए नामित
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sat, 30 Apr 2016 01:40 AM IST
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वसीम बरेलवी
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मशहूर शायर प्रो. वसीम बरेलवी को उत्तर प्रदेश विधान परिषद में सदस्य नामित करके सपा ने विधानसभा चुनाव से ऐन पहले बरेलवियों को खुश करने की एक कोशिश की है। हालांकि प्रो. वसीम की हर फिरके में अपनी खास पहचान है। वह शायर ही नहीं, शिक्षाविद और समाजसेवी भी हैं, इसलिए सूबे की अखिलेश सरकार से उनको ऐसा सम्मान मिलने की उम्मीद बहुत पहले ही पूरी हो जानी चाहिए थे लेकिन चुनाव के ऐन मौके पर उनको विधान परिषद में बैठाने के सियासी निहितार्थ समझे जाने लगे हैं।
दरगाह आला हजरत से जुड़े लोगों की सपा के प्रति नाराजगी किसी से छुपी नहीं है। मौलाना तौकीर रजा खां का दर्जा मंत्री से इस्तीफा हो या आबिद खां को दरगाह के लोगों के न चाहने के बावजूद फिर राज्य मंत्री का दर्जा मिलने की बात रही, सपा के खिलाफ नाराजगी अभी दूर नहीं हो सकी है। ऐसे में, सपा बरेलवियों को लुभाने की कवायद में जुटी हुई थी। प्रो. वसीम का मुस्लिम का मुस्लिम ही नहीं दूसरे मजहबों के लोग भी अदब करते हैं। इसको ध्यान में रखकर सपा ने उनको विधान परिषद में जगह दी है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सपा अभी भी दरगाह से जुड़े लोगों को साधने की अपनी मुहिम जारी रखेगी लेकिन पार्टी हाईकमान का मानना है कि प्रो. वसीम को एमएलसी बनाने से भी बरेली के मुस्लिमों में सकारात्मक संदेश जाएगा और इसका फायदा विधानसभा चुनाव में मिलेगा।
सपा ने किया साहित्य का सम्मान: प्रो. वसीम
खुद को एमएलसी बनाए जाने को प्रो. वसीम बरेलवी साहित्य का सम्मान मानते हैं। वह इसको किसी भी रूप में सियासत से जुड़ा कदम नहीं मानते। उनका कहना है कि यह जिम्मेदारी देकर सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जो मौका दिया है, उसकी वह इज्जत करते हैं। उन्होंने कहा कि वह समाजी समस्याओं को दूर करने और सद्भावना, भाईचारे के लिए काम कर रहे हैं, विधान परिषद सदस्य के रूप में अब इन कामों को और आगे बढ़ाएंगे। बरेली कालेज में शिक्षक रहे प्रो. वसीम बरेलवी साल 2011 से 2014 तक तीन साल के राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।
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वसीम बरेलवी
वास्तविक नाम- जाहिद हसन वसीम
जन्म तिथि: 18 फरवरी 1940
जन्म स्थान: बरेली
कार्यक्षेत्र- देश के जाने-माने शायर। बरेली कॉलेज बरेली में उर्दू के प्रोफेसर रहे। नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन आफ उर्दू लैग्वेज (एनसीपीयूएल) के उपाध्यक्ष रहे।
प्रमुख कृतियां : आंखों आंखों रहे, मौसम अन्दर बाहर के, तबस्सुम-ए-गम, आंसू मेरे दामन तेरा, मिजाज, मेरा क्या।
सम्मान: फिराक अन्तरराष्ट्रीय सम्मान, यश भारती
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दरगाह आला हजरत से जुड़े लोगों की सपा के प्रति नाराजगी किसी से छुपी नहीं है। मौलाना तौकीर रजा खां का दर्जा मंत्री से इस्तीफा हो या आबिद खां को दरगाह के लोगों के न चाहने के बावजूद फिर राज्य मंत्री का दर्जा मिलने की बात रही, सपा के खिलाफ नाराजगी अभी दूर नहीं हो सकी है। ऐसे में, सपा बरेलवियों को लुभाने की कवायद में जुटी हुई थी। प्रो. वसीम का मुस्लिम का मुस्लिम ही नहीं दूसरे मजहबों के लोग भी अदब करते हैं। इसको ध्यान में रखकर सपा ने उनको विधान परिषद में जगह दी है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सपा अभी भी दरगाह से जुड़े लोगों को साधने की अपनी मुहिम जारी रखेगी लेकिन पार्टी हाईकमान का मानना है कि प्रो. वसीम को एमएलसी बनाने से भी बरेली के मुस्लिमों में सकारात्मक संदेश जाएगा और इसका फायदा विधानसभा चुनाव में मिलेगा।
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सपा ने किया साहित्य का सम्मान: प्रो. वसीम
खुद को एमएलसी बनाए जाने को प्रो. वसीम बरेलवी साहित्य का सम्मान मानते हैं। वह इसको किसी भी रूप में सियासत से जुड़ा कदम नहीं मानते। उनका कहना है कि यह जिम्मेदारी देकर सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जो मौका दिया है, उसकी वह इज्जत करते हैं। उन्होंने कहा कि वह समाजी समस्याओं को दूर करने और सद्भावना, भाईचारे के लिए काम कर रहे हैं, विधान परिषद सदस्य के रूप में अब इन कामों को और आगे बढ़ाएंगे। बरेली कालेज में शिक्षक रहे प्रो. वसीम बरेलवी साल 2011 से 2014 तक तीन साल के राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।
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वसीम बरेलवी
वास्तविक नाम- जाहिद हसन वसीम
जन्म तिथि: 18 फरवरी 1940
जन्म स्थान: बरेली
कार्यक्षेत्र- देश के जाने-माने शायर। बरेली कॉलेज बरेली में उर्दू के प्रोफेसर रहे। नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन आफ उर्दू लैग्वेज (एनसीपीयूएल) के उपाध्यक्ष रहे।
प्रमुख कृतियां : आंखों आंखों रहे, मौसम अन्दर बाहर के, तबस्सुम-ए-गम, आंसू मेरे दामन तेरा, मिजाज, मेरा क्या।
सम्मान: फिराक अन्तरराष्ट्रीय सम्मान, यश भारती