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DNA ने दी गवाही: घुट-घुटकर काटी जिंदगी...अब हैवानों की बारी; 30 साल बाद इंसाफ; पीड़िता की आंखों में भर आए आंसू

Wed, 22 May 2024 01:59 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 22 May 2024 01:59 PM IST
सार

शाहजहांपुर में 30 साल पहले 12 साल की लड़की के साथ दुष्कर्म करने वाले दो सगे भाइयों को अदालत ने मंगलवार को 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। दुष्कर्म पीड़िता को उसके बेटे ने इंसाफ दिलाया है। 

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Victim woman cried when rape accused were punished after 30 years
victim woman son got justice - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

30 साल तक दुष्कर्म का दंश सहन करने वाली पीड़िता के लिए मंगलवार का दिन किसी पर्व से कम नहीं था।  न्यायालय ने न्याय देते हुए दुष्कर्म के दोषियों को दस-दस साल की सजा से दंडित किया। खबर सुनकर पीड़िता की आंखों में आंसू भर आए। बोलीं कि इतने वर्ष जिंदगी की जेल को घुट-घुटकर काटा, अब उन दरिंदों की बारी है। 
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अपनी अतीत को भूलकर महिला ने दो बेटों के साथ लखनऊ में आशियाना बना लिया है। बता दें कि गवाहों के बयानात और सरकारी वकील राजीव अवस्थी के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने दोनों दोषियों को दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
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बड़े बेटे की शादी हो चुकी है। उनका डेढ़ साल का पौत्र भी है। पैरालिसिस अटैक को मात देकर स्वस्थ हुई पीड़िता को मंगलवार की शाम को न्याय मिलने की जानकारी हुई। दुष्कर्मियों को वर्षों बाद सजा होने पर वह रो पड़ीं। कहा कि घटना ने  करियर, जिंदगी तबाह कर दी। देर से सही, पर हमें इंसाफ मिला है। डरकर और घुटकर जिंदगी को बिताया। 
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घटनाक्रम को याद कर रोंगटे खड़े हो जाते थे। पहले हम रोए थे, अब उन हैवानों के रोने की बारी है। महिला ने बताया कि उन्हें बेटे का काफी साथ मिला। वह साथ नहीं देता तो शायद इतनी बड़ी जंग नहीं जीत पाते। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद महिला ने जुलाई 2022 में अपने बयान दर्ज कराए थे, तब से वह जिले में लौटकर नहीं आईं।  

सरकारी वकील हमारे लिए फरिश्ते के समान
महिला ने बताया कि उनके केस की पैरवी सरकारी वकील भावशील शुक्ला ने की थी। बयान दर्ज कराने के कुछ समय के बाद उन्हें फोन किया तो पता चला था कि केस किसी और वकील को दे दिया। बोलीं-सरकारी वकील फरिश्ते के समान हैं।

 

उधार लेकर लड़ा केस, बन गए थे कर्जदार
एक समय ऐसा भी आया, जब महिला के पास केस लड़ने भर के रुपये नहीं थे। दो बेटों ने सहयोग किया, शेष सभी ने हाथ पीछे खींच लिए। महिला ने बताया कि उनके पति साथ नहीं रहते हैं। उनके बेटों ने हिम्मत दी। वकील को देने के लिए रुपये नहीं थे तो उधार लेकर कर्जदार बन गए। फिर बमुश्किल कर्ज चुकाया। उन्होंने बताया कि बेटा आजमगढ़ गया है। उसे भी न्यायालय से मिले न्याय की जानकारी दी है। वह भी काफी ज्यादा खुश है।

 

सुकून की जिंदगी जी रहे थे, एफआईआर दर्ज होते ही हुए फरार
नकी और गुड्डू दोनों ड्राइवर थे। अपने परिवार के साथ दूसरे मोहल्ले में रहने लगे थे। वे लोग तो घटना भी भूल गए थे। जब कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज हुई तो दोनों फरार हो गए। बाद में पुलिस ने दोनों भाइयों को गिरफ्तार किया। 

 

नकी उर्फ ब्लेडी पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। अदालत की कार्यवाही के दौरान गुड्डू को जमानत मिल गई थी। वहीं नकी उर्फ ब्लेडी जेल में था।

 

फार्म में भरने के दौरान बेटे ने पूछा था पिता का नाम
कई साल तक अपने अंदर दुखों का सागर छुपाए रही पीड़िता के सामने उस समय स्थिति असहनीय हो गई जब बेटे ने हाईस्कूल का फार्म भरते समय पिता का नाम पूछ लिया। मां जवाब नहीं दे सकी, लेकिन आंखों में आंसू जरूर आ गए। पिता के बारे में बार-बार सवाल करने पर पीड़िता ने उसे सारी हकीकत बता दी। बेटे के कहने पर आरोपियों को सजा दिलाने के लिए पीड़िता ने न्यायालय का सहारा लिया। कोर्ट के आदेश पर आरोपी नकी हसन और गुड्डू के खिलाफ सदर थाने में दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज कर ली गई थी। दो दशक पुराना मामला होने के कारण पुलिस के पास साक्ष्य और गवाह नहीं थे। इस वजह से डीएनए परीक्षण कराया गया। पीड़िता के बेटे का डीएनए नकी उर्फ ब्लेडी से मैच कर गया।
 
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