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बरेली: किताब उत्सव में दिखी साहित्य और कला की बहुरंगी झलक, कई विषयों पर हुआ संवाद

Mon, 26 Oct 2026 05:04 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Mon, 26 Oct 2026 05:04 PM IST
सार

बरेली में राजकमल प्रकाशन द्वारा आयोजित किताब उत्सव में रविवार को साहित्य और कला की बहुरंगी झलक दिखी। दिनभर रंगमंच, लेखन, गांधी दर्शन, मध्यकालीन इतिहास और पर्यावरण चिंतन पर चर्चा हुई।

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vibrant glimpse of literature and art was seen at the book festival in Bareilly
किताब उत्सव में युवा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

बरेली में राजकमल प्रकाशन की ओर से विंडरमेयर थिएटर में आयोजित किताब उत्सव में तीसरे दिन रविवार को साहित्य और कला की बहुरंगी झलक दिखी। दिन रंगमंच की साधना, लेखन की अधरी पांडुलिपियों, गांधी दर्शन, मध्यकालीन इतिहास, पर्यावरण चिंतन और पारसी थिएटर की स्मृतियों से भरा रहा। 

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उत्सव की शुरुआत मालवा क्षेत्र के प्रसिद्ध रंगकर्मी किरण शानी की कार्यशाला 'स्वांग से स्व' से हुई। कार्यशाला में शहर के कलाकारों और रंगकर्म में रुचि रखने वालों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसमें किरण शानी ने आंगिक, वाचिक आहार्य और सात्विक अभिनय से जुड़ीं सैद्धांतिक बातें समझाईं।
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इसके बाद 'पहला ड्राफ्ट, पहला पाठ' विषय पर आयोजित कार्यक्रम में लेखक-पत्रकार प्रभात सिंह, संस्कृतिकर्मी डॉ. ब्रजेश्वर सिंह और आलोचक संजीव कुमार ने अपने नए प्रोजेक्ट की पांडुलिपियों से अंशपाठ किया। तीनों लेखकों ने श्रोताओं की प्रतिक्रियाओं पर भी विचार व्यक्त किए।

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कई विषयों पर हुआ संवाद 
दूसरे सत्र की शुरुआत 'तानाशाही के दौर में गांधी' विषय पर लेखक अशोक कुमार पांडेय और पुष्यमित्र के संवाद से हुई। इसमें 20वीं सदी की तानाशाही, गांधी जी के विचार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रश्न पर चर्चा हुई। 'बिसरी हुई सल्तनत का आख्यान' विषय पर मध्यकालीन इतिहास के गुलाम वंश के दौर की कथा पर आधारित तरुण भटनागर के उपन्यास 'मामलुक' पर चर्चा हुई। आलोचक संजीव कुमार ने लेखक तरुण भटनागर से संवाद किया।

अगले कार्यक्रम में 'गांधी का सैंतालिस आज का भारत' विषय पर पुष्यमित्र से शिक्षिका एवं लेखिका स्मृति सुमन ने संवाद किया। 'बढ़ता पर्यटन और जैव विविधता के खतरे' विषय पर हिमालय यात्री अजय सोडानी से लेखक-पत्रकार प्रभातसिंह ने संवाद किया। इस दौरान प्रभात सिंह ने अपनी पुस्तक 'दरख्ते हिमालय दरबदर' से अंशपाठ भी किया।

'पारसी रंगमंच 1960 से परदा गिरने तक' विषय पर फिल्म निर्माता एवं संस्कृतिकर्मी सीमा कपूर से अभिनेता रघुवीर यादवकिया। इसमें पारसी थिएटर के यायावर जीवन, संघर्ष, अनुशासन और कला के प्रति समर्पण की ऐसी कहानियां सामने आईं, जिनसे पूरा ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा। 'कविता बीच संसार' में गायिका दीपा शानी और रंगकर्मी किरण शानी ने प्रस्तुतियां दीं। 

किताब उत्सव के मेहमान बने रुहानी महफिल का हिस्सा
विंडरमेवर थिएटर में राजकमल प्रकाशन की ओर से आयोजित किताब उत्सव में आए मेहमान और आयोजक रविवार को विश्वप्रसिद्ध स्थल खानकाह नियाजिया में सजी रुहानी महफिल का हिस्सा बने। वे लोग खानकाह के सज्जादानशीन शाह मेहंदी मियां की दावत पर पहुंचे थे। इस मौके पर खानकाह में कव्वाली की विशेष महफिल में फनकारों ने सूफियाना और अदबी कलाम पेश किए। 

इससे पहले सभी मेहमानों की साहिबे सज्जादा मेहंदी मियां और प्रबंधक जुनेदी मियां से मुलाकात हुई। मेहमानों की अगुवाई मौलाना कासिम नियाजी ने की। इनमें राजकमल प्रकाशन के सीईओ आमोद माहेश्वरी, संपादकीय निदेशक सत्यानंद निरुपम, वरिष्ठ पत्रकार प्रभात सिंह आदि शामिल रहे। 

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