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उर्स-ए-शाह शराफत के रंगों से सराबोर हुआ माहौल
बरेली।
Updated Wed, 29 Nov 2017 02:04 AM IST
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उसेऱ्र्से सरापऊफती
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शाहबाद स्थित दरगाह शरीफ पर हजरत शाह शराफत अली मियां का उर्स चल रहा है। इसका रंग हर तरफ दिखाई दे रहा है। कहीं से लोग हाजिरी के लिए अकीदत का नजराना लिए पहुंच रहे हैं तो कहीं से मन्नत-ओ-मुराद की झोली फैलाए फरियादी। वहीं, शहर के हर कोने से आ रहे चादरों के जुलूस और देश-विदेश से पहुंच रही जायरीन की भीड़ अकीदत की मिसाल बने हुई है।
उर्स-ए-शाह शराफती के दूसरे रोज की तकरीब सुबह कुरान ख्वानी से शुरू हुई। फातेहा के बाद लंगर खाना खोल दिया गया। इसके बाद दिन भर हजारों अकीदतमंद लंगर में शामिल होते रहे। इधर, दरगाह शरीफ पर दिनभर अकीदत का जोश और कई रंग देखने को मिलते रहे। कोई दरगाह में फरियाद लिए गिड़गिड़ाता दिखा तो कोई गुलपोशी करता नजर आया। दरगाह के दर और दीवारों पर लोग चिपटकर आंसू बहाते भी नजर आए। इस बीच जायरीन की आमद लगातार जारी रही। इसी कड़ी में शाम को दूरदराज से जायरीन का सकलैनी कारवां भी मुंबई, झांसी, सूरत आदि से पहुंचने लगा जो रात तक जारी रहा। इधर, दरगाह के आसपास के इलाकों में जायरीन की भीड़ से रौनक छाई हुई है। दीवानखाना और दरगाह की गलियों में मेले जैसा माहौल है। यहां खानपान से लेकर इस्लामी किताबों और तरह-तरह के सजावटी आइटम के साथ ही खेल खिलौनों की दुकानें भी लगी हुई हैं। वहीं, साहिबे सज्जादा पीरो मुर्शिद शाह सकलैन मियां के दीदार और मुरीद बनने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।
उर्स-ए-शाह शराफती के दूसरे रोज की तकरीब सुबह कुरान ख्वानी से शुरू हुई। फातेहा के बाद लंगर खाना खोल दिया गया। इसके बाद दिन भर हजारों अकीदतमंद लंगर में शामिल होते रहे। इधर, दरगाह शरीफ पर दिनभर अकीदत का जोश और कई रंग देखने को मिलते रहे। कोई दरगाह में फरियाद लिए गिड़गिड़ाता दिखा तो कोई गुलपोशी करता नजर आया। दरगाह के दर और दीवारों पर लोग चिपटकर आंसू बहाते भी नजर आए। इस बीच जायरीन की आमद लगातार जारी रही। इसी कड़ी में शाम को दूरदराज से जायरीन का सकलैनी कारवां भी मुंबई, झांसी, सूरत आदि से पहुंचने लगा जो रात तक जारी रहा। इधर, दरगाह के आसपास के इलाकों में जायरीन की भीड़ से रौनक छाई हुई है। दीवानखाना और दरगाह की गलियों में मेले जैसा माहौल है। यहां खानपान से लेकर इस्लामी किताबों और तरह-तरह के सजावटी आइटम के साथ ही खेल खिलौनों की दुकानें भी लगी हुई हैं। वहीं, साहिबे सज्जादा पीरो मुर्शिद शाह सकलैन मियां के दीदार और मुरीद बनने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।
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