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बरेली में उड़द खरीद घोटाला- रिकॉर्ड ने मिलने से विवेचना नहीं कर पा रही क्राइम ब्रांच
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किसान
- फोटो : ANI
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बरेली। भमोरा क्षेत्र की सहकारी समितियों पर तीन साल पहले उड़द खरीद में हुए घोटाले में पीसीएफ के जिला प्रबंधक समेत कई लोग फंसे हैं, लेकिन इनके खिलाफ कार्रवाई साक्ष्यों के अभाव में लटकी है। पुलिस के बाद तफ्तीश की बागडोर संभाल रही क्राइम ब्रांच के विवेचक को पुरानी जांच रिपोर्ट की दरकार है। संबंधित विभाग से निराश होने के बाद अब क्राइम ब्रांच ने डीएम कार्यालय में अर्जी देकर एडीएम वित्त से डाटा दिलाने की मांग की है।
वर्ष 2017-18 में उड़द खरीद के दौरान जन उत्थान बहुउद्देशीय सहकारी समिति लिमिटेड खेड़ा, उड़द क्रय केंद्र साकरपुर नगला और उड़द क्रय केंद्र भोलापुर में काफी गड़बड़ी हुई थी। वर्ष 2018 में मामला सामने आने के बाद सहायक आयुक्त और एआर कोऑपरेटिव विक्रम सिंह ने पीसीएफ के जिला प्रबंधक आलोक कुमार, जन उत्थान समिति के सचिव राहुल गुप्ता, साकरपुर केंद्र प्रभारी हरिशंकर गुप्ता, भोलापुर केंद्र प्रभारी सचिन गुप्ता, बिचौलिया मनोज गुप्ता और राजीव के खिलाफ गबन, धोखाधड़ी जैसी धाराओं में प्रेमनगर थाने में 16 फरवरी, 2018 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लंबे समय तक प्रेमनगर पुलिस ने विवेचना के नाम पर खानापूर्ति की। अब विवेचना पुलिस से क्राइम ब्रांच पर आ गई है। रिपोर्ट दर्ज होने से पहले डीएम के आदेश पर टीम गठित करके कराई गई जांच में आरोपियों के खिलाफ कई साक्ष्य मिले थे। उसी जांच रिपोर्ट का डाटा लेने के लिए विवेचक इंस्पेक्टर रामनरेश माथुर ने डीएम कार्यालय में अर्जी दी है। उनसे अपेक्षा की गई है कि एडीएम वित्त के यहां से उन्हें जांच संबंधी रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए, ताकि विवेचना पूरी की जा सके।
इस रिकार्ड की है दरकार
विवेचक के मुताबिक, प्रशासनिक टीम ने जांच में क्रय केंद्र प्रभारी हरिशंकर गुप्ता का बयान रिकॉर्ड कर सीडी बनाई थी। कई ग्रामीणों के लिखित बयान लिए थे। क्रय केंद्रों के खरीद रजिस्टर, 6-आर पर्ची, आधार कार्ड, बैंक पासबुकें और अन्य रिकॉर्ड जांच में जब्त किए गए थे। इनके बिना विवेचना में अड़चन आ रही है। सहकारिता विभाग के लोग खुद फंसे होने के कारण वहां से विवेचना में कोई मदद नहीं मिल रही है। एडीएम वित्त कार्यालय में संपर्क किया गया तो वहां रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए डीएम की अनुमति जरूरी बताई गई।
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किसानों को बनाया था मोहरा
उड़द खरीद में विफल रहे क्रय केंद्रों ने बाजार से सस्ते दाम पर उड़द खरीद कर उसे किसानों का दिखाकर रिकॉर्ड दुरुस्त करने की कोशिश की थी। इससे सरकार को चूना लगाने के साथ ही किसानों के फर्जी कागजात का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी की गई थी। अमर उजाला ने उस वक्त इस मुद्दे को प्राथमिकता से प्रकाशित किया था।
उड़द खरीद मामले में विवेचना की जा रही है। विवेचना के लिए पूर्व में की गई जांच और जब्त रिकॉर्ड की जरूरत है। उसी के लिए डीएम ऑफिस में अर्जी दी गई है। रिकॉर्ड मिलते ही विवेचना को आगे बढ़ाया जाएगा। - रमेश कुमार भारतीय, एसपी क्राइम
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वर्ष 2017-18 में उड़द खरीद के दौरान जन उत्थान बहुउद्देशीय सहकारी समिति लिमिटेड खेड़ा, उड़द क्रय केंद्र साकरपुर नगला और उड़द क्रय केंद्र भोलापुर में काफी गड़बड़ी हुई थी। वर्ष 2018 में मामला सामने आने के बाद सहायक आयुक्त और एआर कोऑपरेटिव विक्रम सिंह ने पीसीएफ के जिला प्रबंधक आलोक कुमार, जन उत्थान समिति के सचिव राहुल गुप्ता, साकरपुर केंद्र प्रभारी हरिशंकर गुप्ता, भोलापुर केंद्र प्रभारी सचिन गुप्ता, बिचौलिया मनोज गुप्ता और राजीव के खिलाफ गबन, धोखाधड़ी जैसी धाराओं में प्रेमनगर थाने में 16 फरवरी, 2018 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लंबे समय तक प्रेमनगर पुलिस ने विवेचना के नाम पर खानापूर्ति की। अब विवेचना पुलिस से क्राइम ब्रांच पर आ गई है। रिपोर्ट दर्ज होने से पहले डीएम के आदेश पर टीम गठित करके कराई गई जांच में आरोपियों के खिलाफ कई साक्ष्य मिले थे। उसी जांच रिपोर्ट का डाटा लेने के लिए विवेचक इंस्पेक्टर रामनरेश माथुर ने डीएम कार्यालय में अर्जी दी है। उनसे अपेक्षा की गई है कि एडीएम वित्त के यहां से उन्हें जांच संबंधी रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए, ताकि विवेचना पूरी की जा सके।
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इस रिकार्ड की है दरकार
विवेचक के मुताबिक, प्रशासनिक टीम ने जांच में क्रय केंद्र प्रभारी हरिशंकर गुप्ता का बयान रिकॉर्ड कर सीडी बनाई थी। कई ग्रामीणों के लिखित बयान लिए थे। क्रय केंद्रों के खरीद रजिस्टर, 6-आर पर्ची, आधार कार्ड, बैंक पासबुकें और अन्य रिकॉर्ड जांच में जब्त किए गए थे। इनके बिना विवेचना में अड़चन आ रही है। सहकारिता विभाग के लोग खुद फंसे होने के कारण वहां से विवेचना में कोई मदद नहीं मिल रही है। एडीएम वित्त कार्यालय में संपर्क किया गया तो वहां रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए डीएम की अनुमति जरूरी बताई गई।
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उड़द खरीद में विफल रहे क्रय केंद्रों ने बाजार से सस्ते दाम पर उड़द खरीद कर उसे किसानों का दिखाकर रिकॉर्ड दुरुस्त करने की कोशिश की थी। इससे सरकार को चूना लगाने के साथ ही किसानों के फर्जी कागजात का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी की गई थी। अमर उजाला ने उस वक्त इस मुद्दे को प्राथमिकता से प्रकाशित किया था।
उड़द खरीद मामले में विवेचना की जा रही है। विवेचना के लिए पूर्व में की गई जांच और जब्त रिकॉर्ड की जरूरत है। उसी के लिए डीएम ऑफिस में अर्जी दी गई है। रिकॉर्ड मिलते ही विवेचना को आगे बढ़ाया जाएगा। - रमेश कुमार भारतीय, एसपी क्राइम