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त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा को कमिश्नर आज फैसला करेंगे
बरेली
Updated Mon, 15 Feb 2016 01:37 AM IST
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बरेली। त्रिशूल की सुरक्षा को लेकर कमिश्नर प्रमांशु कुमार सोमवार को कोई न कोई रणनीति तैयार कर सकते हैं। उन्होंने 25 दिन पहले से बीडीए, नगर निगम और तहसील के स्तर से कराए जा रहे सर्वे की रिपोर्ट तलब की है। यह रिपोर्ट 10 फरवरी तक मांगी गई थी लेकिन किन्हीं कारणों से उनके समक्ष पेश नहीं की जा सका था।
पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद से रक्षा मंत्रालय त्रिशूल एयरबेस को लेकर काफी चिंतित है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और प्रदेश सरकार को इसकी सुरक्षा के बारे में निर्देश दिए गए हैं। उन्हीं निर्देशों के तहत सुरक्षा के लिए कमिश्नर ने अवैध निर्माण का सर्वे कराया था। यह रिपोर्ट सोमवार को कमिश्नर देखेंगे, उसी के बाद पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सुरक्षा को लेकर मंथन होगा। साथ में यह खाका भी तैयार होगा कि अवैध निर्माण कैसे हटाए जाए और त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा होती रहे। भविष्य में किसी भी तरह के अवैध निर्माण भी न हों, उसके लिए रणनीति तैयार होगी। इसी में एयरबेस के चारो ओर रिंग रोड बनाने के लिए भी मंथन होगा।
इस बारे में डीएम ने भी नगर निगम, बीडीए और तहसील के अधिकारियों के साथ अलग से बैठक बुलाई है। जिसमें अवैध कब्जों को ध्वस्त करने के बारे में कमिश्नर से मिलने निर्देशों पर अमल किया जाएगा।
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भविष्य की रणनीति
- त्रिशूल एयरबेस के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र में नगर निगम और बीडीए की ओर से बोर्ड लगाए जाएंगे। जिनमें यह अंकित होगा कि 100 मीटर की परिध में किसी भी तरह का निर्माण न हो। यदि कोई निर्माण करे तो उसकी सूचना नगर निगम, बीडीए, डीएम तथा अन्य अधिकारियों के सीयूजी नंबरों पर दी जाए। बोर्ड पर अफसरों के सीयूजी नंबर अंकित करने की योजना है। नया अवैध निर्माण होने पर अब बीडीए के अवर अभियंता की जिम्मेदारी तय होगी। पुराने अवैध निर्माण की वीडियोग्राफी कराई जाएगी, जिससे कि पता चल सके कि नया निर्माण हुआ है। अभियंता यह न कहें कि पुराना निर्माण था।
शासन का सवाल, कैसे हो गए निर्माण
मुख्य सचिव ने नगर निगम और बीडीए से जवाब तलब किया है कि इतना बड़ा अमला होने के बावजूद त्रिशूल एयरबेस के आसपास प्रतिबंधित इलाकों में अवैध निर्माण कैसे हो गए। अब इन अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाए। साथ में यह भी स्पष्ट करें कि बिना मानचित्र पास किए इन अवैध निर्माण के लिए कौन जिम्मेदार हैं। यदि प्रतिबंधित क्षेत्र में मानचित्र पास किए हैं तो उनकी जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाए।
- त्रिशूल की सुरक्षा के बारे में बीडीए और नगर निगम की लापरवाही पर शासन ने मांगी रिपोर्ट
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पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद से रक्षा मंत्रालय त्रिशूल एयरबेस को लेकर काफी चिंतित है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और प्रदेश सरकार को इसकी सुरक्षा के बारे में निर्देश दिए गए हैं। उन्हीं निर्देशों के तहत सुरक्षा के लिए कमिश्नर ने अवैध निर्माण का सर्वे कराया था। यह रिपोर्ट सोमवार को कमिश्नर देखेंगे, उसी के बाद पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सुरक्षा को लेकर मंथन होगा। साथ में यह खाका भी तैयार होगा कि अवैध निर्माण कैसे हटाए जाए और त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा होती रहे। भविष्य में किसी भी तरह के अवैध निर्माण भी न हों, उसके लिए रणनीति तैयार होगी। इसी में एयरबेस के चारो ओर रिंग रोड बनाने के लिए भी मंथन होगा।
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इस बारे में डीएम ने भी नगर निगम, बीडीए और तहसील के अधिकारियों के साथ अलग से बैठक बुलाई है। जिसमें अवैध कब्जों को ध्वस्त करने के बारे में कमिश्नर से मिलने निर्देशों पर अमल किया जाएगा।
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भविष्य की रणनीति
- त्रिशूल एयरबेस के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र में नगर निगम और बीडीए की ओर से बोर्ड लगाए जाएंगे। जिनमें यह अंकित होगा कि 100 मीटर की परिध में किसी भी तरह का निर्माण न हो। यदि कोई निर्माण करे तो उसकी सूचना नगर निगम, बीडीए, डीएम तथा अन्य अधिकारियों के सीयूजी नंबरों पर दी जाए। बोर्ड पर अफसरों के सीयूजी नंबर अंकित करने की योजना है। नया अवैध निर्माण होने पर अब बीडीए के अवर अभियंता की जिम्मेदारी तय होगी। पुराने अवैध निर्माण की वीडियोग्राफी कराई जाएगी, जिससे कि पता चल सके कि नया निर्माण हुआ है। अभियंता यह न कहें कि पुराना निर्माण था।
शासन का सवाल, कैसे हो गए निर्माण
मुख्य सचिव ने नगर निगम और बीडीए से जवाब तलब किया है कि इतना बड़ा अमला होने के बावजूद त्रिशूल एयरबेस के आसपास प्रतिबंधित इलाकों में अवैध निर्माण कैसे हो गए। अब इन अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाए। साथ में यह भी स्पष्ट करें कि बिना मानचित्र पास किए इन अवैध निर्माण के लिए कौन जिम्मेदार हैं। यदि प्रतिबंधित क्षेत्र में मानचित्र पास किए हैं तो उनकी जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाए।
- त्रिशूल की सुरक्षा के बारे में बीडीए और नगर निगम की लापरवाही पर शासन ने मांगी रिपोर्ट