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Bareilly News: मलेरिया-डेंगू के मरीजों की खंगाली जाएगी ट्रैवल हिस्ट्री
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बरेली। स्वास्थ्य विभाग अब मलेरिया के मरीजों की ट्रैवल हिस्ट्री खंगालेगा। माहभर पूर्व वह जिस जिले या राज्य में रहा होगा, केस वहीं दर्ज किया जाएगा। नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल (एनसीवीबीडीसी) प्रोग्राम के तहत यह कवायद शुरू की गई है।
बीते सप्ताह नई दिल्ली में एनसीवीबीडीसी प्रोग्राम के तहत वर्ष 2030 तक देश को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के संबंधित कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया। बरेली से जिला मलेरिया अधिकारी सत्येंद्र कुमार ने इसमें प्रतिभाग किया था। उन्हाेंने बताया कि मच्छरजनित रोगों से पीड़ित मरीज मिलने पर उसकी ट्रैवल व कॉन्टैक्ट हिस्ट्री खंगाली जाएगी, क्योंकि परजीवियों के सक्रिय होने में एक-दो सप्ताह का वक्त लगता है। सामान्य तौर पर बुखार होने पर मरीज दो-तीन दिन तक दवा नहीं लेते।
बताया कि अगर बुखार के अलावा अन्य लक्षण नहीं हैं तो डॉक्टर भी जांच नहीं कराते। औसतन सौ मरीजों में से आठ-दस की ही जांच हो पाती है। लिहाजा, मरीज अगर माहभर पहले किसी दूसरी जगह रहा होगा तो उसकी केस हिस्ट्री संबंधित जिले या राज्य की मानी जाएगी। हालांकि, मरीज का इलाज, उसके घर पर इनडोर रेसिड्यू सर्वे और अन्य गतिविधियां की जाएंगी। इससे संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद है। ब्यूरो
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ज्यादातर ग्रामीण दूसरे जिले या राज्य में करते हैं दिहाड़ी
बरेली के भमोरा, आंवला, रामनगर, फतेहगंज पश्चिमी, बिथरी ब्लॉक मलेरिया के लिहाज से संवेदनशील हैं। यहां के ज्यादातर ग्रामीण सालभर दूसरे जिले या राज्यों में रहकर वहां दिहाड़ी या अन्य रोजगार करते हैं। मानसून के दौरान वे खेती करने के लिए घर लौटते हैं। इसी दौरान संचारी रोगों का प्रकोप बढ़ता है। आशंका है कि वे पूर्व में जहां रहे, वहीं से पैरासाइट्स आए और यहां सक्रिय हुए होंगे।
अब तक डेंगू के तीन, मलेरिया के 130 मरीज
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष अब तक डेंगू के तीन और मलेरिया के 130 मरीज मिले हैं। फाइलेरिया के भी चार मामले सामने आए हैं। जापानी इंसेफलाइटिस का अब तक कोई मामला सामने नहीं आया है।
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बीते सप्ताह नई दिल्ली में एनसीवीबीडीसी प्रोग्राम के तहत वर्ष 2030 तक देश को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के संबंधित कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया। बरेली से जिला मलेरिया अधिकारी सत्येंद्र कुमार ने इसमें प्रतिभाग किया था। उन्हाेंने बताया कि मच्छरजनित रोगों से पीड़ित मरीज मिलने पर उसकी ट्रैवल व कॉन्टैक्ट हिस्ट्री खंगाली जाएगी, क्योंकि परजीवियों के सक्रिय होने में एक-दो सप्ताह का वक्त लगता है। सामान्य तौर पर बुखार होने पर मरीज दो-तीन दिन तक दवा नहीं लेते।
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बताया कि अगर बुखार के अलावा अन्य लक्षण नहीं हैं तो डॉक्टर भी जांच नहीं कराते। औसतन सौ मरीजों में से आठ-दस की ही जांच हो पाती है। लिहाजा, मरीज अगर माहभर पहले किसी दूसरी जगह रहा होगा तो उसकी केस हिस्ट्री संबंधित जिले या राज्य की मानी जाएगी। हालांकि, मरीज का इलाज, उसके घर पर इनडोर रेसिड्यू सर्वे और अन्य गतिविधियां की जाएंगी। इससे संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद है। ब्यूरो
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ज्यादातर ग्रामीण दूसरे जिले या राज्य में करते हैं दिहाड़ी
बरेली के भमोरा, आंवला, रामनगर, फतेहगंज पश्चिमी, बिथरी ब्लॉक मलेरिया के लिहाज से संवेदनशील हैं। यहां के ज्यादातर ग्रामीण सालभर दूसरे जिले या राज्यों में रहकर वहां दिहाड़ी या अन्य रोजगार करते हैं। मानसून के दौरान वे खेती करने के लिए घर लौटते हैं। इसी दौरान संचारी रोगों का प्रकोप बढ़ता है। आशंका है कि वे पूर्व में जहां रहे, वहीं से पैरासाइट्स आए और यहां सक्रिय हुए होंगे।
अब तक डेंगू के तीन, मलेरिया के 130 मरीज
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष अब तक डेंगू के तीन और मलेरिया के 130 मरीज मिले हैं। फाइलेरिया के भी चार मामले सामने आए हैं। जापानी इंसेफलाइटिस का अब तक कोई मामला सामने नहीं आया है।