मैलानी-लखनऊ के बीच दिसंबर तक चलेंगी ट्रेनें!, मार्च में ही संचालन का था दावा
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लखनऊ और मैलानी के बीच ब्रॉडगेज लइन पर ट्रेनों का संचालन दिसंबर से पहले शुरू हो पाना संभव नहीं है, क्योंकि सीआरएस निरीक्षण के करीब एक माह बाद भी रेल विभाग सीतापुर-लखीमपुर के बीच ट्रेन संचालन शुरू नहीं करा सका है। उधर, लखीमपुर-मैलानी के बीच न तो रेल ट्रैक तैयार है और न गोला एवं बांकेगंज में स्टेशन और प्लेटफॉर्म। ऐसे में भले ही रेलवे अधिकारी जून में मैलानी तक ट्रेन चलवाने का दावा कर रहे, लेकिन काम की स्थित एवं उसकी गति को देखकर ऐसा नहीं लगता कि ऐशबाग से मैलानी के बीच दिसंबर से पहले ट्रेनें दौड़ सकेंगी।
ऐशबाग से पीलीभीत के बीच 207 किमी. बिछाई गई मीटर गेज की लाइनों को ब्रॉडगेज (आमानपरिवर्तन) में बदलने की जिम्मेदारी रेलवे ने रेल विकास निगम (आरवीएनएल) को सौंपी थी। दो चरणों में आमानपरिवर्तन का काम शुरू भी कर दिया गया। पहले चरण में ऐशबाग से सीतापुर के बीच 80 किलोमीटर रेलखंड का आमान परिवर्तन करीब 350 करोड़ की लागत से शुरू हुआ।
इसके बाद सीतापुर मैलानी के बीच 67 किलोमीटर रेलखंड के आमानपरिवर्तन का काम करीब 211 करोड़ से और मैलानी से पीलीभीत के बीच 60 किलोमीटर रेलखंड को ब्रॉडगेज में बदलने का काम 160 करोड़ की लागत से हो रहा है। हालांकि इस बीच नौ जनवरी से ऐशबाग सीतापुर के बीच ट्रेन दौड़ने भी लगी हैं, लेकिन ऐशबाग-मैलानी के बीच दिसंबर तक ही ट्रेन दौड़ने की उम्मीद है।
गोला गोकर्णनाथ। रेलवे स्टेशन पर ब्रॉडगेज आमान परिवर्तन के कार्य की धीमी रफ्तार देख कर 2019 में रेल का सफर कर पाना संभव प्रतीत नहीं होता। आमान परिवर्तन का काम शुरू हुए करीब दो वर्ष हो चुके हैं इतने समय में प्लेटफॉर्म, ओवरब्रिज, रेलवे ट्रैक, क्रॉसिंग का आधा काम भी नहीं हो पाया। जब कभी रेलवे ट्रैक पर पत्थर गिरने वाली मालगाड़ी, पैकिंग मशीन, पैक मशीन स्टाफ का कैंपिंग कोच गुजरता है तो लोगों में कौतूहल के साथ शीघ्र ही बड़ी रेलवे लाइन पर सफर करने की उम्मीद जाग उठती है। रेलवे ट्रैक पर काम का आलम यह है कि गिनती के श्रमिक कहीं बजरी कूटते तो कहीं ट्रैक पर पत्थरों को बिछाते दिखाई देते हैं। ऐसे में वर्ष 2019 के अंत तक बड़ी लाइन की ट्रेनों में सफर करने की उम्मीद पूरी होती नजर नहीं आती।
सीआरएस निरीक्षण के बाद भी नहीं चल सकीं ट्रेनें
सीतापुर से लखीमपुर तक ट्रेन चलवाने के लिए कार्यदायी संस्था 18 मार्च को सीआरएस निरीक्षण भी करा चुकी है, लेकिन अभी तक रेल विभाग रेलखंड पर ट्रेन दौड़ाने की कवायद तक शुरू नहीं करा सका है। रेलवे अधिकारियों की माने तो चुनाव बाद ही इस रूट पर ट्रेनें दौड़ सकेंगी।
मैलानी तक जून में ट्रेन संचालन शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके लिए कार्यदायी संस्था को 31 मई तक मैलानी-लखीमपुर के बीच काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी लगातार मॉनीटरिंग भी हो रही है।- आलोक कुमार श्रीवास्तव, जनसंपर्क अधिकारी, पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल
यात्री सुविधाओं का काम अधर में
कार्यदायी संस्था के अधिकारी भले की लखीमपुर-मैलानी के बीच 90 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन हकीकत उसके उलट है। जो काम हो भी रहा है उसकी स्थित देखकर ऐसा नहीं लगता है कि अधूरा कार्य 31 मई तक पूरा सकेगा। स्टेशन पर प्लेटफार्म निर्माण भले पूरा हो चुका हो, लेकिन टिन शेड, शौचालय, रोड, बेंच सहित यात्री सुविधाओं का 50 फीसदी काम अभी शेष है। वहीं वन विभाग की एनओसी न मिलने के कारण बांकेगंज-मैलानी के बीच सिग्नल के लिए केबिल तक नहीं डाली जा सकी है। जबकि ट्रेन संचालन के लिए सिग्नलिंग का कार्य सबसे महत्वपूर्ण है। वन विभाग के अधिकारी चुनाव के बाद ही एनओसी मिल पाने की बात कह रहे हैं। ऐसे में जून में सीआरएस ट्रायल होना संभव नहीं है।