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बढ़ती जा रहीं ट्रेनें, जाम हो रहा रेल का ट्रैफिक
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sun, 19 Jun 2016 12:23 AM IST
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उत्तर रेलवे के रूट पर जंक्शन से पिछले तीन साल में 20 से ज्यादा नई ट्रेनों के आवागमन से रेल का ट्रैफिक जाम होने लगा है। इससे लगभग सारी ट्रेनों का शेड्यूल गड़बड़ा गया है और खमियाजा यात्रियों को भुगतान पड़ रहा है। हर ट्रेन निर्धारित समय से कम से कम आधे घंटे लेट हो रही है।
यात्रियों की बढ़ती संख्या और यात्री सुविधाओं को देखते हुए हर साल रेलवे इस रूट पर छह-सात ट्रेनें बढ़ाता जा रहा है लेकिन रेल के संसाधनों में कोई इजाफा नहीं किया गया है। जंक्शन पर प्लेटफार्म चार ही हैं। इससे ट्रेनें निकालने के लिए कई अन्य ट्रेनों को काफी देर तक रोकना पड़ता है। एक ट्रेन के पांच मिनट सिग्नल के लिए दूसरी ट्रेन को 15-15 मिनट तक प्लेटफार्म पर ही रोका जाता है। पिछले वर्षों में महामना एक्सप्रेस, राजरानी एक्सप्रेस, पाटलीपुत्र, अमृतसर-गौसगंज, ग्वालियर-गोंडा के अलावा इंदौर और चंदौसी जाने के लिए नई ट्रेनें शुरू की गईं। एनईआर की ओर से चलाई गईं कई ट्रेनें भी एनआर की पटरी पर ही दौड़ने से ट्रैफिक और बढ़ गया है। लालकुंआ-काठगोदाम और यहां से बांद्रा तक के लिए एनईआर अपनी ट्रेनें एनआर की पटरियों पर चला रहा है। ट्रैफिक बढ़ने से सबसे ज्यादा प्र्रभावित हो रही हैं आला हजरत एक्सप्रेस और इंटरसिटी जैसी ट्रेनें। इनसे हर दिन बड़ी संख्या में यात्री आते-जाते हैं। पिछले डेढ़ महीने से आला हजरत एक्सप्रेस चार से छह घंटे विलंब से आ जा रही है। स्पेशल ट्रेनें भी रेलवे ने चला रखी हैं। यह भी ट्रैफिक को और जाम कर रही हैं। पिछले दिनों बरेली जंक्शन पर आए उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल रेल प्रबंधक के सामने भी ट्रैफिक जाम का मुद्दा उठा था लेकिन उन्होंने भी इसमें कुछ कर पाने से फिलहाल असमर्थता ही जता दी थी। इतना जरूर कहा कि कोशिश कर रहे हैं कि सारी ट्रेनें शेड्यूल से चलें लेकिन ट्रेनें बढ़ने से यह थोड़ा मुश्किल काम है।
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यात्रियों की बढ़ती संख्या और यात्री सुविधाओं को देखते हुए हर साल रेलवे इस रूट पर छह-सात ट्रेनें बढ़ाता जा रहा है लेकिन रेल के संसाधनों में कोई इजाफा नहीं किया गया है। जंक्शन पर प्लेटफार्म चार ही हैं। इससे ट्रेनें निकालने के लिए कई अन्य ट्रेनों को काफी देर तक रोकना पड़ता है। एक ट्रेन के पांच मिनट सिग्नल के लिए दूसरी ट्रेन को 15-15 मिनट तक प्लेटफार्म पर ही रोका जाता है। पिछले वर्षों में महामना एक्सप्रेस, राजरानी एक्सप्रेस, पाटलीपुत्र, अमृतसर-गौसगंज, ग्वालियर-गोंडा के अलावा इंदौर और चंदौसी जाने के लिए नई ट्रेनें शुरू की गईं। एनईआर की ओर से चलाई गईं कई ट्रेनें भी एनआर की पटरी पर ही दौड़ने से ट्रैफिक और बढ़ गया है। लालकुंआ-काठगोदाम और यहां से बांद्रा तक के लिए एनईआर अपनी ट्रेनें एनआर की पटरियों पर चला रहा है। ट्रैफिक बढ़ने से सबसे ज्यादा प्र्रभावित हो रही हैं आला हजरत एक्सप्रेस और इंटरसिटी जैसी ट्रेनें। इनसे हर दिन बड़ी संख्या में यात्री आते-जाते हैं। पिछले डेढ़ महीने से आला हजरत एक्सप्रेस चार से छह घंटे विलंब से आ जा रही है। स्पेशल ट्रेनें भी रेलवे ने चला रखी हैं। यह भी ट्रैफिक को और जाम कर रही हैं। पिछले दिनों बरेली जंक्शन पर आए उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल रेल प्रबंधक के सामने भी ट्रैफिक जाम का मुद्दा उठा था लेकिन उन्होंने भी इसमें कुछ कर पाने से फिलहाल असमर्थता ही जता दी थी। इतना जरूर कहा कि कोशिश कर रहे हैं कि सारी ट्रेनें शेड्यूल से चलें लेकिन ट्रेनें बढ़ने से यह थोड़ा मुश्किल काम है।
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