बरेलीः ग्रीन जोन में फिर आने के लिए देनी होगी अग्निपरीक्षा
रेड से ग्रीन जोन में वापस लौटने के लिए जिला प्रशासन को 14 दिन तक अग्निपरीक्षा देनी होगी। इस बीच हजियापुर और ब्रह्मपुरा में संक्रमण की चेन तलाशने के साथ उसके सामने यह भी चुनौती रहेगी कि केंद्र सरकार के मानकों के मुताबिक, अगले दो हफ्तों तक संक्रमण किसी और शख्स को शिकार न बनाए। अफसरों का कहना है कि वैसे तो नई चुनौतियों से निपटने के लिए विस्तृत योजना तैयार की जा रही है, लेकिन लॉकडाउन पर सख्ती बढ़ाना इस योजना की सबसे प्रमुख रणनीति रहेगी।
केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित मानकों के आधार पर बरेली जिले को रेड जोन में शामिल करने के बाद पूरी प्रशासनिक मशीनरी इस मंथन में जुटी है कि उससे चूक आखिर कहां हुई। दरअसल, मार्च के आखिरी हफ्ते में कोरोना संक्रमित मिले सुभाषनगर के एक परिवार के सभी छह सदस्यों के इलाज के बाद स्वस्थ हो जाने के बाद जिला प्रशासन के अफसरों की तरफ से सख्ती कम हो गई। शहर के प्रमुख बाजारों, मंडियों के साथ गली-मोहल्लों में भी इसका भरपूर नाजायज फायदा उठाया गया। पब्लिक तो लॉकडाउन और सामाजिक दूरी की हिदायतें ही भूल गई, पुलिस ने भी उन्हें इसके लिए बाध्य नहीं किया।
जिले के कोरोना मुक्त घोषित होने के बाद दस दिन तक निश्चिंतता का माहौल रहा। 27 अप्रैल को हजियापुर में कोरोना संक्रमित मिलने की खबर से हुए धमाके ने सबकी तंद्रा तोड़ दी। दो ही दिन बाद इस युवक के ब्रह्मपुरा में रहने वाले दो और रिश्तेदार कोरोना संक्रमित मिले तो अफसरों के रहे-बचे होश भी उड़ गए।
इस बीच रामनगर ब्लॉक के गांव शहबाजपुर में मुंबई के हॉटस्पॉट एरिया से निकलकर आए एक और युवक में कोरोना संक्रमण पाया गया। हजियापुर और ब्रह्मपुरा में मिले संक्रमितों को कोरोना का शिकार बनाने वाला सोर्स भी तलाश पाने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम रहा। सिर्फ 72 घंटों के अंदर चिंता पैदा करने वाली ये सारी सूचनाएं ऊपर तक पहुंचीं तो बरेली को ग्रीन जोन से निकालकर सीधे रेड जोन में शामिल कर दिया गया।
अब प्रशासन के लिए चुनौती है कि हॉटस्पॉट बनाए गए हजियापुर और ब्रह्मपुरा में रहने करीब 15 हजार परिवारों में स्वास्थ्य विभाग की मदद से उन लोगों को चिह्नित कर सैंपल जांच करानी है जिनमें कोरोना के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। ताकि अगर नए मरीज हैं, उनके जल्द इलाज के साथ संक्रमण को भी फैलने से रोका जा सके। प्रशासन की यह परीक्षा भी है कि अब तक जो केस सामने आए हैं, वे किस चेन से जुड़े हुए हैं। हजियापुर और ब्रह्मपुरा के मामलों से जुड़ी चेन तक पांच-छह दिन बाद भी अभी नहीं पहुंचा जा सका है।
संक्रमण की चेन का पता नहीं लगा पाए फिर भी हॉटस्पॉट एरिया से आने वाले ट्रकों की जांच नहीं
हजियापुरा में एक और उसके बाद ब्रह्मपुरा में दो केस अचानक मिलने से भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि इन लोगों के संक्रमण की चेन अब तक साफ नहीं हो पाई है। संक्रमण फैलने के लिहाज से डेलापीर फल-सब्जी मंडी को भी सबसे ज्यादा संवदेनशील माना जा रहा है क्योंकि यहां हर रोज दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र से तमाम ट्रकों की आवाजाही होती है। ये ट्रक हॉटस्पॉट एरिया में फंसे लोगों को भी लगातार लेकर बरेली पहुंच रहे हैं, शहबाजपुर के कोरोना संक्रमित युवक के सामने आने के बाद इसकी भी पुष्टि हो चुकी है। इसके बाद भी मंडी में अब तक बाहर से आने वाले ट्रकों के स्टाफ के स्वास्थ्य परीक्षण की कोई व्यवस्था नहीं की गई से नहीं है। इसके अलावा भारी तादाद में लोग पैदल या साइकिल-रिक्शा जैसे वाहनों से भी लगातार जिले की सीमाओं के अंदर घुस रहे हैं।