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लखीमपुर खीरी में बाघों के साम्राज्य का होगा विस्तार, उत्तराखंड से बिहार तक के जंगल जोड़ने की कवायद

Wed, 23 Jan 2019 09:53 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखीमपुर खीरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखीमपुर खीरी Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 23 Jan 2019 09:53 PM IST
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Tigers empire will expand in Lakhimpur Kheri
प्रतीकात्मक तस्वीर
लखीमपुर खीरी में बाघों के साम्राज्य को विस्तार देने और उनकी नस्ल को स्वस्थ रखने की मंशा से तराई के जंगलों को आपस में जोड़ने की कवायद तेज हो गई है। इसे लेकर दुधवा नेशनल पार्क में एक इन दिनों एक महत्वपूर्ण बैठक चल रही है। 
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डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तराई आर्क लैंडस्केप नाम दिया गया है। इसके तहत उत्तराखंड से विहार तक 49500 वर्ग किलोमीटर जंगल को आपस में जोड़कर एक लंबा कॉरीडोर बनाया जाना है। 
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इस परियोजना से एक तरफ जहां बाघों की आबादी में बढ़ोत्तरी होगी वहीं मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी भी आएगी। तराई आर्क लैंडस्केप परियोजना पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ वर्ष 2003 से काम कर रहा है। 
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सबसे पहले डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने उत्तराखंड से लेकर बिहार तक तराई के जंगलों का विस्तृत सर्वे कर एक परियोजना तैयार की। इस परियोजना के तहत उत्तराखंड से लेकर पीलीभीत टाइगर रिजर्व, दुधवा टाइगर रिजर्व होते हुए। 

विहार के वाल्मीकि नेशनल पार्क तक के जगंलों को आपस में जोड़कर बाघों और वन्यजीवों के लिए एक कॉरीडोर बनाने का निश्चय किया गया ताकि बाघ एक जंगल से दूसरे जंगल तक विना आबादी और खेतों को पार किए जंगल के अंदर से ही एक जंगल से दूसरे जंगल तक पहुंच सकें।

तराई आर्क लैंडस्केप में जोड़े जाने हैं यह जंगल तराई आर्क लैंडस्केप में उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क, कार्बेट नेशनल पार्क, रामनगर, हल्द्वानी, सोन नदी वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, नेपाल के शुक्लाफांटा वन्यजीव विहार, वर्दिया नेशनल पार्क, चितवन नेशनल पार्क, परसा वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी, दुधवा टाइगर रिजर्व, महराजगंज का सोहागी बरुआ, बलरामपुर का सुहेलवा वन्यजीव विहार, सोहागी बरुआ, रॉयल चितवन नेशनल पार्क और बिहार के वाल्मीकि नेशनल पार्क तक के जंगलों को शामिल किया गया है। इन जंगलों को आपस में जोडऩे की योजना है।

वर्जन
तराई आर्क परियोजना की सफलता से दीर्घकालिक सार्थक परिणाम सामने आएंगे। इससे बाघों की न केवल आबादी बढ़ेगी बल्कि नस्ल में गुणात्मक सुधार आने की संभावना है।
-रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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