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गांव में इस नाम का कोई नहीं: एक अच्छन तीन बार मरा, तीन मृत्यु प्रमाणपत्र; तीनों खातों में जा रही विधवा पेंशन

Sat, 18 Oct 2025 06:51 AM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: विकास कुमार Updated Sat, 18 Oct 2025 06:51 AM IST
सार

एडीओ पंचायत मनीष अग्रवाल ने जांच में स्पष्ट किया है कि वर्ष 2019 में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र ऑनलाइन ई-डिस्ट्रिक्ट के माध्यम से बनाने की व्यवस्था थी। अच्छन खां के बनाए गए तीनों मृत्यु प्रमाणपत्र ऑफलाइन बने हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि तीनों प्रमाणपत्र फर्जी हैं। 

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Three death certificates of same person widow pension going into three accounts
तीन खातों में जा रहा विधवा पेंशन - फोटो : freepik

विस्तार

निराश्रित महिला पेंशन योजना में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। यूपी के बरेली स्थित गांव मजनूपुर में अच्छन खां को अलग-अलग तीन तिथियों में मृत दिखाकर उनके नाम से मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा लिए। इनके जरिये तीन अलग-अलग बैंक खातों में पेंशन भी ली जा रही है। पंचायत सचिव ने तीनों मृत्यु प्रमाणपत्र को फर्जी करार दिया है। योजना का लाभ लेने में कौन-कौन लोग दोषी हैं, उनके नाम पते डीपीआरओ ने जिला महिला कल्याण अधिकारी (डीपीओ) से मांगे हैं।

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सीडीओ के निर्देश पर हुई जांच में पता चला है कि मजनूपुर ग्राम पंचायत में अच्छन खां के नाम से वर्ष 2019 में ही अलग-अलग तिथियों में तीन मृत्यु प्रमाणपत्र जारी हुए थे। इनमें पहला 27 मार्च को जारी हुआ, इसमें मृत्यु 18 मार्च को दिखाई गई। दूसरा मृत्यु प्रमाणपत्र 15 मार्च को जारी हुआ और मृत्यु 10 मार्च को दिखाई गई है। तीसरा प्रमाणपत्र 30 मार्च को जारी हुआ। इसमें उनकी मृत्यु 25 मार्च को दिखाई गई है।

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एडीओ पंचायत मनीष अग्रवाल ने जांच में स्पष्ट किया है कि वर्ष 2019 में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र ऑनलाइन ई-डिस्ट्रिक्ट के माध्यम से बनाने की व्यवस्था थी। अच्छन खां के बनाए गए तीनों मृत्यु प्रमाणपत्र ऑफलाइन बने हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि तीनों प्रमाणपत्र फर्जी हैं। इस मामले में तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी शिप्रा सिंह से भी पूछताछ हुई है, उन्होंने स्पष्ट कह दिया है कि अच्छन खां नाम का कोई भी मृत्यु प्रमाण पत्र उन्होंने ऑफलाइन भी नहीं जारी किया है।

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मजनूपुर ग्राम पंचायत के प्रधान शकील का कहना है कि अच्छन खां नाम से कोई भी व्यक्ति उनके गांव में नहीं है। ऐसे में साफ है कि महिला कल्याण विभाग की विधवा पेंशन योजना में बड़े स्तर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपात्रों को पेंशन दी जा रही है।

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