{"_id":"5a1dc7004f1c1b68678beacb","slug":"this-duty-is-not-easy-papa-will-become-mummy-for-a-day","type":"story","status":"publish","title_hn":"यह ड्यूटी नहीं आसान... एक दिन के लिए पापा बनेंगे ‘मम्मी’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यह ड्यूटी नहीं आसान... एक दिन के लिए पापा बनेंगे ‘मम्मी’
बरेली।
Updated Wed, 29 Nov 2017 01:58 AM IST
विज्ञापन
एक िददिन के िललिए पापा बनेंगे मम्ममी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
महिलाआें के लिए घर की जिम्मेदारी और ऑफिस के काम बराबर हो सकते हैं, लेकिन अगर इसमें चुनाव ड्यूटी का तड़का लग जाए तो पसीने छूट जाते हैं। मंगलवार को पोलिंग पार्टी की रवानगी के दौरान कुछ ऐसा ही नजारा दिखा। मम्मियां अपने छोटे बच्चाें को गोद में उठाए एक हाथ में ईवीएम मशीन लेकर अपनी बस ढूंढ रही थीं। कुछ बच्चों को समझा रही थीं कि वह पापा को न सताएं, उनका कहना मानें। पहली बार चुनाव ड्यूटी में लगे युवा कार्मिकों में उत्सुकता के साथ घबराहट भी दिख रही थी।
पोलिंग पार्टियाें में पुरुषाें के साथ महिलाएं भी शामिल हैं। कई महिलाआें के तो बच्चे इतने छोटे हैं कि वे उन्हें घर भी नहीं छोड़ सकतीं। पिता उनको लगातार पुचकार रहे थे कि वह उनकी गोद में आ जाएं। कुछ महिला कर्मियों ने बताया कि उन्हाेंने बच्चा छोटा होने की बात कहकर चुनाव ड्यूटी से मुक्ति मांगी थी लेकिन मिली नहीं। दरअसल, संयुक्त परिवार का ढांचा टूटने से इस तरह की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ी हैं। महिला कार्मिकों के सामने दिक्कत हैं कि अगर वे बच्चे को घर पर छोड़ें तो उसे देखेगा कौन। एकल परिवारों में अब दादा-दादी, भैया-भाभी, चाचा-चाची जैसे रिश्ते चलन से बाहर हो गए हैं। ऐसे में एक दिन पापा को ही बच्चे के लिए मम्मी की भूमिका निभानी होगी।
पोलिंग पार्टियाें में पुरुषाें के साथ महिलाएं भी शामिल हैं। कई महिलाआें के तो बच्चे इतने छोटे हैं कि वे उन्हें घर भी नहीं छोड़ सकतीं। पिता उनको लगातार पुचकार रहे थे कि वह उनकी गोद में आ जाएं। कुछ महिला कर्मियों ने बताया कि उन्हाेंने बच्चा छोटा होने की बात कहकर चुनाव ड्यूटी से मुक्ति मांगी थी लेकिन मिली नहीं। दरअसल, संयुक्त परिवार का ढांचा टूटने से इस तरह की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ी हैं। महिला कार्मिकों के सामने दिक्कत हैं कि अगर वे बच्चे को घर पर छोड़ें तो उसे देखेगा कौन। एकल परिवारों में अब दादा-दादी, भैया-भाभी, चाचा-चाची जैसे रिश्ते चलन से बाहर हो गए हैं। ऐसे में एक दिन पापा को ही बच्चे के लिए मम्मी की भूमिका निभानी होगी।
विज्ञापन