फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Third-floor furniture purchased from MLA fund

तिहाई भी नहीं पहुंचा विधायक निधि से खरीदा फर्नीचर

Wed, 17 May 2017 01:28 AM IST
बरेली। 
बरेली।  Updated Wed, 17 May 2017 01:28 AM IST
विज्ञापन
Third-floor furniture purchased from MLA fund
तिहाई भी नहीं पहुंचा विधायक निधि से खरीदा फर्नीचर - फोटो : तिहाई भी नहीं पहुंचा विधायक निधि से खरीदा फर्नीचर
दो साल पहले भोजीपुरा विधायक शहजिल इस्लाम ने शहरी क्षेत्र के स्कूल को बच्चों के लिए फर्नीचर खरीदने के लिए अपनी विधायक निधि से पांच लाख रुपये दिए थे। मगर, बाबू और दलाल आधे से ज्यादा फर्नीचर की रकम बीच में ही खा गए। स्कूल को एक तिहाई फर्नीचर भी नहीं पहुंचा। छह कमरों के इस स्कूल में आठवीं तक पढ़ाई होती है। स्कूल के नाम और उसकी मान्यता का बोर्ड भी नहीं टंगा है। शहरी क्षेत्र के मथुरापुर गांव में ज्ञान सरोवर जूनियर हाईस्कूल को वर्ष 2015-16 में भोजीपुरा विधायक शहजिल इस्लाम ने अपनी विधायक निधि से फर्नीचर खरीदने के लिए पांच लाख रुपये दिए थे। नियमानुसार एमएलए की विधायक निधि उसी के विधानसभा क्षेत्र में खर्च होने का प्रावधान है। उस हिसाब से विधायक निधि की ये रकम स्कूल को नियम विरुद्ध दी गई। स्कूल प्रबंधक पूरनलाल की मानें तो वह विधायक शहजिल इस्लाम से न तो कभी मिले और न ही उनसे विधायक निधि देने की मांग की। एक बार उनके स्कूल में महावीर टिंबर से अमित अग्रवाल और दूसरे स्कूल के संचालक मिसिरयार खां आए थे। उन्होंने ही फर्नीचर भिजवाया। उनसे 128 थ्री सीटर बेंच भिजवाने की बात कही गई लेकिन फर्नीचर निर्धारित संख्या से बहुत कम था। महावीर टिंबर ने उनसे 14 प्रतिशत वैट और किराया भी लिया। थ्री सीटर बेंचें शीशम के बजाय पीपल, नीम, पाकड़ या अन्य तरह की लकड़ियों की बनी थी। नीचे लोहा लगा था। 
विज्ञापन

ये मामला तब खुला जब स्कूल प्रबंधक पूरनलाल ने शहर विधायक डा. अरुण कुमार की विधायक निधि से एक लाख रुपये बाउंड्रीवाल के लिए प्रस्तावित करा लिये हालांकि ये प्रस्ताव निरस्त हो गया। स्कूल में बाउंड्रीवाल बनाने की जगह भी नहीं है। मकाननुमा छह कमरों के स्कूल में बाउंड्रीवाल पहले से बनी हुई है। छह कमरों के स्कूल में आठवीं तक पढ़ाई होती है। प्रबंधक के अनुसार स्कूल आठवीं तक मान्यता प्राप्त है। हालांकि स्कूल के नाम और मान्यता का बोर्ड कहीं नहीं टंगा। स्कूल के अंदर पांच लाख की लागत वाला फर्नीचर भी नहीं मिला। प्रबंधक महावीर टिंबर से फर्नीचर खरीद की टिन नंबर वाला पक्का बिल भी नहीं दिखा पाए। प्रबंधक का कहना है कि सिल्ला गोपालपुर में स्कूल चलाने वाले मिसिरयार खां ने फर्नीचर दिलाया। उनको कुछ नहीं पता। 
विज्ञापन

स्कूल में अप्रशिक्षित शिक्षक  
ज्ञान सरोवर स्कूल में प्रबंधक समेत 13 शिक्षक और कर्मचारियों का स्टाफ बताया गया है। इनमें प्रिंसिपल समेत आठ शिक्षक हैं। कोई भी बीएड या बीटीसी नहीं है। सबके सब अप्रशिक्षित हैं। स्कूल की मान्यता पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि न तो बच्चों के निकलने का रास्ता है और न ही खेल का मैदान। अगर स्कूल मान्यता प्राप्त भी है तो उसकी मान्यता बेसिक शिक्षा विभाग से किस आधार पर की गई। 
विज्ञापन
विज्ञापन

मुझे ठीक से याद है कि दो साल पहले मेरे शोरूम से ज्ञान सरोवर स्कूल को पांच लाख का फर्नीचर दिया गया। विधायक निधि से फर्नीचर की सप्लाई हमारे ही शोरूम होती है। स्कूल प्रबंधक क्या कह रहे हैं। ये नहीं पता।  अमित अग्रवाल, महावीर टिंबर 

ज्ञान सरोवर स्कूल को विधायक निधि से पांच लाख के फर्नीचर देने के मामले की फाइल देखकर जांच कराऊंगा। अगर निधि का दुरुपयोग किया गया है तो संबंधित लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।   साहित्य प्रकाश मिश्र, परियोजना निदेशक डीआरडीए 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed