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Bareilly News: छात्राओं के लिए महाविद्यालयों में नहीं सेनेटरी नैपकिन की सुविधा
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बरेली। बरेली कॉलेज, रानी अवंतीबाई महिला विद्यालय व साहूराम स्वरूप महिला महाविद्यालय में छात्राओं के लिए सेनेटरी नैपकिन की सुविधा नहीं है। यहां पर सेनेटरी नैपकिन की मशीनें दान में तो मिली, लेकिन इनका इस्तेमाल तो दूर रख-रखाव सहीं ढंग से नहीं हो सका।
बरेली कॉलेज के जीसीआर (गर्ल्स कॉमन रूम) परिसर में सर्वाधिक छात्राओं का आना होता है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर छात्राओं के लिए सेनेटरी नैपकिन की सुविधा नहीं है। शिक्षकों की मानें तो करीब तीन-चार साल पहले महाविद्यालय को सेनेटरी नैपकिन की मशीन मिली, लेकिन अब उसका कोई पता नहीं है। छात्राओं कहना है कि जीसीआर जैसी जगह पर सेनेटरी नैपकिन की उपलब्धता हो तो यह छात्राओं के लिए बेहतर रहेगा। बरेली कॉलेज के प्राचार्य ओपी राय का कहना है पहले कभी इस तरह की मशीन आई है इसकी जानकारी नहीं है। जानकारी कर उसका संचालन कराया जाएगा। यदि मशीन सक्रिय नहीं है तो इसे मंगवाया जाएगा।
रानी अवंतीबाई राजकीय महिला महाविद्यालय में शिक्षकों का दावा है कि महाविद्यालय में रखी हुई मशीन कार्य करती है, लेकिन मौके पर वह धूल फांकती नजर आई। जब छात्राओं से पूछा गया कि वह इस मशीन का इस्तेमाल आवश्यकता पड़ने पर करती हैं तो उन्होंने कहा कॉलेज में सेनेटरी नैपकिन मिलना मुश्किल रहता है। इसी तरह साहूराम स्वरूप में भी सेनेटरी नैपकिन की मशीन भी पांच साल पहले मिली, लेकिन खराब हो गई। संवाद
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जीसीआर में लगनी चाहिए मशीन
- मैं फरीदपुर से आती हूं, जीसीआर में अधिकांश लड़कियां समय बिताती हैं, अगर यहां सेनेटरी नैपकिन की मशीन लगती है तो लड़कियों के लिए फायदेमंद होगा। - पायल, छात्रा
- मेरा घर करीब दस किलोमीटर दूर है, रोजाना आने-जाने में एक घंटा लग जाता है। सेनेटरी नैपकिन की मशीन हो तो मेरे जैसी दूर से आने वाली लड़कियों को सहायता होगी। - ऋषिता राठौर, छात्रा
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बरेली कॉलेज के जीसीआर (गर्ल्स कॉमन रूम) परिसर में सर्वाधिक छात्राओं का आना होता है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर छात्राओं के लिए सेनेटरी नैपकिन की सुविधा नहीं है। शिक्षकों की मानें तो करीब तीन-चार साल पहले महाविद्यालय को सेनेटरी नैपकिन की मशीन मिली, लेकिन अब उसका कोई पता नहीं है। छात्राओं कहना है कि जीसीआर जैसी जगह पर सेनेटरी नैपकिन की उपलब्धता हो तो यह छात्राओं के लिए बेहतर रहेगा। बरेली कॉलेज के प्राचार्य ओपी राय का कहना है पहले कभी इस तरह की मशीन आई है इसकी जानकारी नहीं है। जानकारी कर उसका संचालन कराया जाएगा। यदि मशीन सक्रिय नहीं है तो इसे मंगवाया जाएगा।
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रानी अवंतीबाई राजकीय महिला महाविद्यालय में शिक्षकों का दावा है कि महाविद्यालय में रखी हुई मशीन कार्य करती है, लेकिन मौके पर वह धूल फांकती नजर आई। जब छात्राओं से पूछा गया कि वह इस मशीन का इस्तेमाल आवश्यकता पड़ने पर करती हैं तो उन्होंने कहा कॉलेज में सेनेटरी नैपकिन मिलना मुश्किल रहता है। इसी तरह साहूराम स्वरूप में भी सेनेटरी नैपकिन की मशीन भी पांच साल पहले मिली, लेकिन खराब हो गई। संवाद
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जीसीआर में लगनी चाहिए मशीन
- मैं फरीदपुर से आती हूं, जीसीआर में अधिकांश लड़कियां समय बिताती हैं, अगर यहां सेनेटरी नैपकिन की मशीन लगती है तो लड़कियों के लिए फायदेमंद होगा। - पायल, छात्रा
- मेरा घर करीब दस किलोमीटर दूर है, रोजाना आने-जाने में एक घंटा लग जाता है। सेनेटरी नैपकिन की मशीन हो तो मेरे जैसी दूर से आने वाली लड़कियों को सहायता होगी। - ऋषिता राठौर, छात्रा