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... तो फिर कौन हटाएगा ये अतिक्रमण
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Mon, 28 Mar 2016 01:15 AM IST
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अिततिक्रमण्ा
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नेशनल हाइवे की जमीन हो या फिर नगर निगम या बीडीए की। मंदिर, मस्जिद और मजार की आड़ में सड़क के किनारे की जमीन दबाई जा रही है। संबंधित विभागों के अफसर आपस में समन्वय न बन पाने के चलते एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अतिक्रमणकारियों के हौसलों को बढ़ावा दे रहे हैं।
शाहदाना से गंगापुर चौराहा- यहां छह सौ मीटर लंबी रोड पर मस्जिद और मजार सड़क के किनारे तक बनी है। मस्जिद में तीन दुकानें भी हैं। दुकानदार इन धार्मिक स्थलों की आड़ में अपना धंधा कर रहे हैं। इससे चौराहे तक सड़क पर ही तीन मंदिर भी बने हैं। इनमें देवी देवताओं की मूर्तियां रखी हैं। गंगापुर चौराहे के दोनों ओर नाले पर मंदिरों की आड़ में दुकानें, खोखे और खाने का ढाबा अनाधिकृत तरीके से चल रहा है।
पीलीभीत बाईपास रोड- सेटेलाइट से सुरेश शर्मा नगर चौराहे तक सड़क के किनारे हाइवे की ग्रीन बेल्ट की जमीन पर दो मजारें, रुहेलखंड विश्वविद्यालय से आगे मस्जिद और डोहरा मार्ग पर मंदिर और आश्रम बन गए हैं। पेड़ काटकर इनका विस्तार किया जा रहा है। नेशनल हाइवे के इंजीनियरों का कहना है कि शहरी सीमा में की इस सड़क के दोनों किनारों से अतिक्रमण हटाने के लिए बीडीए और प्रशासन को पत्र लिख चुके हैं। अब कार्रवाई भी दोनों विभागीय अफसरों को करनी है। फिलहाल, एनएचएआई, बीडीए और प्रशासन के बीच समन्वय न होने के चलते न तो पुराना अतिक्रमण हट पा रहा है और न ही धर्म स्थलों का विस्तार रुक रहा है।
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‘जहां हमारी जमीन है, वहां धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर रणनीति बनानी होगी। बाकी जगहों पर पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई को अतिक्रमण हटाने की पहल करनी चाहिए।’ विकास सेन, सहायक नगर आयुक्त नगर निगम
‘पीलीभीत बाईपास पर हमारा कोई प्रोजेक्ट नहीं चल रहा है। बीडीए ने यहां सड़क बनाई है। हमने बीडीए और प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के लिए पत्र लिखा है। उनको ही निर्णय लेना है।’ आरएस पुरी, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई
‘धार्मिक स्थलों का अतिक्रमण हटाने पर विवाद होने लगते हैं। यहां अतिक्रमण हटाने के लिए हमें मजिस्ट्रेट और पुलिस की जरूरत होती है। दोनों उपलब्ध होने पर हम अतिक्रमण जरूर हटवाएंगे लेकिन इसके लिए तीनों विभागों में समन्वय जरूरी है।’ डा. शशांक विक्रम सिंह, उपाध्यक्ष बीडीए
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शाहदाना से गंगापुर चौराहा- यहां छह सौ मीटर लंबी रोड पर मस्जिद और मजार सड़क के किनारे तक बनी है। मस्जिद में तीन दुकानें भी हैं। दुकानदार इन धार्मिक स्थलों की आड़ में अपना धंधा कर रहे हैं। इससे चौराहे तक सड़क पर ही तीन मंदिर भी बने हैं। इनमें देवी देवताओं की मूर्तियां रखी हैं। गंगापुर चौराहे के दोनों ओर नाले पर मंदिरों की आड़ में दुकानें, खोखे और खाने का ढाबा अनाधिकृत तरीके से चल रहा है।
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पीलीभीत बाईपास रोड- सेटेलाइट से सुरेश शर्मा नगर चौराहे तक सड़क के किनारे हाइवे की ग्रीन बेल्ट की जमीन पर दो मजारें, रुहेलखंड विश्वविद्यालय से आगे मस्जिद और डोहरा मार्ग पर मंदिर और आश्रम बन गए हैं। पेड़ काटकर इनका विस्तार किया जा रहा है। नेशनल हाइवे के इंजीनियरों का कहना है कि शहरी सीमा में की इस सड़क के दोनों किनारों से अतिक्रमण हटाने के लिए बीडीए और प्रशासन को पत्र लिख चुके हैं। अब कार्रवाई भी दोनों विभागीय अफसरों को करनी है। फिलहाल, एनएचएआई, बीडीए और प्रशासन के बीच समन्वय न होने के चलते न तो पुराना अतिक्रमण हट पा रहा है और न ही धर्म स्थलों का विस्तार रुक रहा है।
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‘जहां हमारी जमीन है, वहां धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर रणनीति बनानी होगी। बाकी जगहों पर पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई को अतिक्रमण हटाने की पहल करनी चाहिए।’ विकास सेन, सहायक नगर आयुक्त नगर निगम
‘पीलीभीत बाईपास पर हमारा कोई प्रोजेक्ट नहीं चल रहा है। बीडीए ने यहां सड़क बनाई है। हमने बीडीए और प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के लिए पत्र लिखा है। उनको ही निर्णय लेना है।’ आरएस पुरी, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई
‘धार्मिक स्थलों का अतिक्रमण हटाने पर विवाद होने लगते हैं। यहां अतिक्रमण हटाने के लिए हमें मजिस्ट्रेट और पुलिस की जरूरत होती है। दोनों उपलब्ध होने पर हम अतिक्रमण जरूर हटवाएंगे लेकिन इसके लिए तीनों विभागों में समन्वय जरूरी है।’ डा. शशांक विक्रम सिंह, उपाध्यक्ष बीडीए