फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   thekedar

चहेते ठेकेदार के लिए कायदे बदल दिए

Thu, 15 Jan 2015 01:22 AM IST
बरेली
बरेली Updated Thu, 15 Jan 2015 01:22 AM IST
विज्ञापन
thekedar
बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) में दिशासूचक बोर्ड लगाने के लिए अवस्थापना निधि से स्वीकृत 1.48 करोड़ रुपये के बंदरबांट की तैयारी चल रही है। बाहरी ठेकेदार को काम देने के लिए  नियम कानून दरकिनार कर टेंडर की शर्तें भी बदल दी गईं। खुली बिक्री नहीं होने से टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। टेंडर देने की इतनी जल्दी है कि एक साल में भी तैयार न हो पाने वाली सड़क पर आठ माह में साइनेज लगाने का काम दे दिया गया है।
विज्ञापन

31 दिसंबर 2014 को बीडीए ने अवस्थापना निधि से स्वीकृत 2.10 करोड़ की लागत से छह कामों के टेंडर आमंत्रित किए हैं। इनमें शहर के विभिन्न स्थानों पर 28 कैंटीलीवर रेट्रोरिफ्लैक्टिव (दिशा सूचक बोर्ड ) लगाने 1.48 करोड़ के टेंडर लखनऊ के खास ठेकेदार को देने का खेल चल रहा है। बीडीए के चीफ इंजीनियर ने टेंडर की शर्तों में पंजीकृत ठेकेदारों के अलावा अपंजीकृत ठेकेदारों को टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेने की छूट दे दी है।  खास बात ये भी है कि बीडीए ने उन मार्गों पर दिशा सूचक साइनिंग बोर्ड लगाने के एस्टीमेट स्वीकृत कर टेंडर मांग लिए, जो अभी बने भी नहीं हैं। इन मार्र्गों के निर्माण में कम से कम एक साल लगेगा जबकि साइनेज बोर्ड लगाने की शर्त आठ माह है। टेंडर में टाइप-फोर के साइनेज बोर्ड लगाने की शर्त है जबकि ये साइनेज बोर्ड आउट डेटेड हो चुके हैं। अवस्थापना निधि से टाइप-11 के साइनेज बोर्ड की लागत दिखाकर बजट स्वीकृत कराया गया है। प्रति साइनेज बोर्ड की औसत लागत 5.5 लाख प्रति बोर्ड दर्शायी गई है।
विज्ञापन

क्या है दोनों साइनेज बोर्ड में अंतर
पीडब्ल्यूडी के एसई पीके गर्ग के मुताबिक टाइप-11 के साइनेज बोर्ड की सात साल तक गारंटी होती है। इनकी लागत टाइप फोर के साइनेज बोर्ड की तुलना में ढाई से तीन गुनी अधिक आती है। इनके अलावा टाइप-11 के बोर्ड किसी भी ओर से देखने में एक जैसे दिखते हैं और लाइफ भी ज्यादा होती है। टाइप फोर के साइनेज बोर्ड कई साल पहले आउट डेटेड हो चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
1- पीडब्ल्यूडी ने अगस्त 2014 से एक करोड़ से ज्यादा के टेंडर ऑनलाइन अनिवार्य कर दिए हैं। बीडीए में टेंडरों की ऑनलाइन बिक्री नहीं की गई।
2- साइनेज बोर्ड के टेंडरों का आगणन का पीडब्ल्यूडी से अनुमोदन नहीं कराया गया।
3- टेंडरों की बिक्री डीएम या कमिश्नर के दफ्तर से न कराकर बीडीए अफसरों ने अपने ही दफ्तर में कराई। चहेते ठेकेदार को मैनेज करने के लिए टेंडरों की खुली बिक्री नहीं की गई।

4-डेढ़ करोड़ के काम को टू बिड सिस्टम (एक टेंडर के दो पार्ट) में बांटा गया जबकि 7.5 करोड़ के टेंडर सिंगल बिड सिस्टम से किए गए।
5- एक जनवरी 2015 के विज्ञापन में केवल टेंडर प्रकाशित किया गया है जबकि उसकी शर्तें गायब कर दी गईं।

इन मार्गों पर लगने हैं दिशासूचक
1-किला से मिनी बाईपास 2-धर्मकांटा से डेलापीर 3-संजय नगर से सौ फुटा तक 4-श्यामगंज से सेटेेलाइट तक 5- डोहरा से रामगंगा आवासीय योजना  
 
‘बीडीए में सड़क या बिल्डिंग निर्माण के रजिस्ट्रेशन होते हैं। ये काम विशिष्ट श्रेणी का है। इसलिए अपंजीकृत ठेकेदारों से भी टेंडर मांग लिए गए। खास ठेकेदार को टेंडर देने की कोई बात नहीं है।’ अजय सिंह, चीफ इंजीनियर बीडीए

‘साइनेज बोर्ड लगाना तकनीकी काम है। इसलिए बाहर के ठेकेदारों को बुलाया गया है। ऑनलाइन टेंडरों की बिक्री बीडीए ने शुरू नहीं की है।’   
-शफाकत कमाल, उपाध्यक्ष बीडीए 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed