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नकल पर नकेलः ‘टर्निटिन’ और ‘ओरकुंड’ से थमेगी थीसिस की चोरी
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MJP Rohilkhand university
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महाविद्यालयों को सॉफ्टवेयर से थीसिस की जांच करने के दिए निर्देश
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शोध प्रोजेक्ट में अब नकल करना पड़ सकता है भारी, जेल जाना पड़ेगा
बरेली। शोध प्रबंध (थीसिस) की चोरी को अपराध माना गया है, लेकिन तमाम निर्देशों और कार्रवाई के बावजूद इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। लिहाजा, अब रुहेलखंड विश्वविद्यालय शोध प्रोजेक्ट की थीसिस की जांच के लिए टर्निटिन और ओरकुंड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने जा रहा है। सभी संबद्ध महाविद्यालयों से भी इन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने को कहा गया है। ताकि नकलविहीन और गुणवत्तापरक शोध कार्य हो सकें।
महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के मिनिस्टीरियल स्टाफ सभागार में कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह की अध्यक्षता में ‘प्रवेश परीक्षा एवं शोध कार्यों में सुधार’ विषय पर सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक हुई। दो दिन चली बैठक का संचालन करते हुए डॉ. आलोक श्रीवास्तव ने विषय संबंधी और दस डायरेक्टरेड की जानकारी दी। विश्वविद्यालय के डायरेक्टरेट ऑफ रिसर्च के कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर सुधीर कुमार ने शोध प्रबंध पर बात रखी। कहा, आरईटी की परीक्षा फिर से कराई जाएगी। उन्होंने पीएचडी को शोधगंगा पोर्टल पर हरहाल में उपलब्ध कराने की बात कही। कहा, रिसर्च डायरेक्टरेट को विश्वविद्यालय के नेहरू केंद्र में स्थापित किया गया है ताकि छात्र, शिक्षकों को आसानी रहे। स्कॉलरशिप के लिए भी नेहरू केंद्र में संपर्क करना होगा। सभी कॉलेजों को रिसर्च केंद्र स्थापित करने को कहा। शोध की संख्या के बजाय गुणवत्ता पर जोर देने का सुझाव दिया। विश्वविद्यालय में जल्द शोध कार्यों के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने की जानकारी दी।
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90 फीसदी तक पकड़ी जाएगी नकल
प्रोफेसर सुधीर के मुताबिक, विश्वविद्यालय राजकीय एवं वित्तीय सहायता प्राप्त कॉलेजों को प्लैग्रिज्म सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराएगा। इसमें शोध प्रबंधों में की गई नकल को पकड़ा जा सकेगा। टर्निटिन, ओरकुंड सॉफ्टवेयर से नकल के मामले 90 फीसदी तक पकड़ में आ सकेंगे। बताया कि इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल अब अनिवार्य है। इसके प्रयोग से शोध प्रोजेक्ट में सिर्फ 10 फीसदी ही नकल अथवा कोट करने की सुविधा दी जाएगी। डॉ. बृजेश कुमार ने सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर प्रैक्टिकल जानकारी दी।
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ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा की भी तैयारी
विश्वविद्यालय के प्रवेश परीक्षा समन्वयक प्रोफेसर एसके पांडे ने नई तकनीकी के प्रयोग को प्रवेश परीक्षा के लिए जरूरी बताया। कहा, उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका अहम है, इसलिए पुरानी पद्धतियों से आगे बढ़कर नवाचार एवं तकनीक का इस्तेमाल कर छात्रों, शिक्षकों के लिए बेहतर शैक्षिक माहौल देना मकसद है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में अभी भी छात्रों का गलत डाटा विश्वविद्यालय को महाविद्यालयों की ओर से मिलने पर आपत्ति जताई। उन्होंने मल्टी एंट्री पॉलिसी, नैक मूल्यांकन करवाने का सुझाव दिया है।
अयोग्य छात्रों के प्रवेश पर लगे अंकुश
कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडे और परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार सिंह ने सॉफ्टवेयर के प्रयोग से अयोग्य छात्रों का विश्वविद्यालय में प्रवेश रोकने में मदद मिलने की बात कही। बताया, विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों से डाटा लेकर एक पोर्टल का निर्माण करा रहा है ताकि दूरदराज के क्षेत्रों से छात्रों एवं शिक्षकों को सुविधा हो। शिक्षकों को मिल रहे वेतन आदि की जानकारी पोर्टल से विश्वविद्यालय को मिल सके। इस पोर्टल के माध्यम से सूचनाओं के आदान-प्रदान में न केवल तेजी आएगी बल्कि समय भी बचेगा।
साल में दो बार होगा पीएचडी में प्रवेश
कुलपति ने साल में दो बार जुलाई और दिसंबर में पीएचडी में प्रवेश शुरू करने की जानकारी दी। शोध के लिए रिसर्च गाइड की संख्या बढ़ाने के लिए दस साल या इससे अधिक यूजी शिक्षक के रूप में कार्य कर चुके शिक्षकों को भी रिसर्च गाइड बनाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने महाविद्यालयों को वेबसाइट पर सूचनाओं को तत्काल अपलोड करने का सुझाव दिया। प्राचार्यों से कहा कि वे इस बात का ध्यान रखें कि शोध कार्य में छात्र अपने नाम के साथ विश्वविद्यालय का नाम जरूर अंकित करें। आईपीआर सेल के गठन के बाद पेटेंट संबंधी गतिविधि होने की बात कही। बैठक में मीडिया प्रभारी डॉ. अमित सिंह, सहायक कुल सचिव आनंद मौर्य, प्रशासनिक अधिकारी अनिल सिंह, प्रोग्रामर रविंद्र गौतम, तपन वर्मा आदि मौजूद रहे।
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शोध प्रोजेक्ट में अब नकल करना पड़ सकता है भारी, जेल जाना पड़ेगा बरेली। शोध प्रबंध (थीसिस) की चोरी को अपराध माना गया है, लेकिन तमाम निर्देशों और कार्रवाई के बावजूद इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। लिहाजा, अब रुहेलखंड विश्वविद्यालय शोध प्रोजेक्ट की थीसिस की जांच के लिए टर्निटिन और ओरकुंड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने जा रहा है। सभी संबद्ध महाविद्यालयों से भी इन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने को कहा गया है। ताकि नकलविहीन और गुणवत्तापरक शोध कार्य हो सकें।
महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के मिनिस्टीरियल स्टाफ सभागार में कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह की अध्यक्षता में ‘प्रवेश परीक्षा एवं शोध कार्यों में सुधार’ विषय पर सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक हुई। दो दिन चली बैठक का संचालन करते हुए डॉ. आलोक श्रीवास्तव ने विषय संबंधी और दस डायरेक्टरेड की जानकारी दी। विश्वविद्यालय के डायरेक्टरेट ऑफ रिसर्च के कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर सुधीर कुमार ने शोध प्रबंध पर बात रखी। कहा, आरईटी की परीक्षा फिर से कराई जाएगी। उन्होंने पीएचडी को शोधगंगा पोर्टल पर हरहाल में उपलब्ध कराने की बात कही। कहा, रिसर्च डायरेक्टरेट को विश्वविद्यालय के नेहरू केंद्र में स्थापित किया गया है ताकि छात्र, शिक्षकों को आसानी रहे। स्कॉलरशिप के लिए भी नेहरू केंद्र में संपर्क करना होगा। सभी कॉलेजों को रिसर्च केंद्र स्थापित करने को कहा। शोध की संख्या के बजाय गुणवत्ता पर जोर देने का सुझाव दिया। विश्वविद्यालय में जल्द शोध कार्यों के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने की जानकारी दी।
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90 फीसदी तक पकड़ी जाएगी नकल
प्रोफेसर सुधीर के मुताबिक, विश्वविद्यालय राजकीय एवं वित्तीय सहायता प्राप्त कॉलेजों को प्लैग्रिज्म सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराएगा। इसमें शोध प्रबंधों में की गई नकल को पकड़ा जा सकेगा। टर्निटिन, ओरकुंड सॉफ्टवेयर से नकल के मामले 90 फीसदी तक पकड़ में आ सकेंगे। बताया कि इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल अब अनिवार्य है। इसके प्रयोग से शोध प्रोजेक्ट में सिर्फ 10 फीसदी ही नकल अथवा कोट करने की सुविधा दी जाएगी। डॉ. बृजेश कुमार ने सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर प्रैक्टिकल जानकारी दी।
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