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जो काम सिस्टम नहीं करवा पाया, वो कोरोना ने चंद दिनों में करवाया

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Fri, 27 Mar 2020 12:04 AM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
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सार

क्या आप यकीन करेंगे कि आपके शहर में चार दिन के अंदर प्रदूषण का स्तर दस गुना कम हो गया है और उस सीमा पर पहुंच गया है जो न्यूनतम से भी कम है। हो सकता है कि यह यकीन करना थोड़ा मुश्किल पड़े लेकिन लेकिन आंकड़े यही सच्चाई बयान कर रहे हैं कि अपनी जो जिम्मेदारी सिस्टम पूरी नहीं कर पाया, वह कोरोना की दहशत की वजह से खुद ब खुद हो गया। मिसाल सिर्फ प्रदूषण के मामले में नहीं स्थापित हुई है, सफाई के मामले में भी शहर का हाल देखते-देखते काफी सुधर गया है। नगर निगम तो सफाई कराने में जुटा हुआ ही है, गली-मोहल्लों लोग खुद भी सफाई करते नजर आ रहे हैं। लॉक डाउन की बदौलत जाम, अतिक्रमण जैसी न जाने और कितनी समस्याएं दूर हो गई हैं। मन को सुकून देने वाले तमाम नतीजे सामने हैं, थोड़ा अफसोस इस बात पर जरूर किया जा सकता है कि ये नतीजे सामाजिक जागरूकता और सिस्टम की लगन से आने चाहिए थे लेकिन आए एक महामारी की वजह से।
 

विस्तार

सांस लेने लायक हुई हवा.. 20 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंचा प्रदूषण

अंधाधुंध ट्रैफिक, पुलों का निर्माण और चौराहों पर जलने वाला कूड़ा बंद होते ही धड़ाम हुआ प्रदूषण

बरेली। कोरोना की दहशत के माहौल में भी खुश करने वाली खबर यह है कि देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में कुछ ही समय छठे नंबर पर अपना नाम दर्ज कराने वाले बरेली में अब प्रदूषण पिछले 20 सालों के न्यूनतम स्तर पर है। सिर्फ चार दिनों में आए बदलाव ने यह कमाल कर दिखाया है। प्रदूषण के ताजा आंकड़ों में दस गुना तक गिरावट रिकॉर्ड की गई है।
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ग्रीन पीस इंडिया की ओर से इसी साल जनवरी में जारी रिपोर्ट में बरेली को देश के सबसे प्रदूषित शहरों में छठे नंबर पर रखा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक बरेली में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई पर प्रदूषण स्तर तीन सौ का आंकड़ा पार करते-करते चार सौ के ऊपर पहुंच गया था। प्रदूषण विभाग और पर्यावरणविदों की ओर से शहर में बेतहाशा ट्रैफिक, बेतरतीब ढंग से चल रहे निर्माण कार्य, पराली और कूड़ा-कचरा जलाने को इसका कारण बताते हुए इस पर नियंत्रण करने का सुझाव दिया था लेकिन फिर भी न प्रशासन गंभीर हुआ और शहर के लोग। इस बीच दिल्ली की संस्था डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर ने भी प्रदूषित शहरों में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका जताई थी। सिस्टम तो इन आशंकाओं और चिंताओं के बावजूद कुछ नहीं कर पाया लेकिन चार दिन लॉक डाउन के बाद प्रदूषण स्तर में खुद ब खुद दस गुना की गिरावट आ गई।
एक्यूआई
पीएम- 10 का स्तर 400 से गिरकर 41 पर आया

कुछ समय पहले तक एक्यूआई पर चार सौ पार कर रहा पीएम- 10 का स्तर अब 41 दर्ज हुआ है। बरेली कॉलेज के एमिरेट प्रोफेसर डॉ. डीके सक्सेना के मुताबिक 20 सालों में पहली बार इतना कम एक्यूआई दर्ज हुआ है जो सामान्य से भी करीब 20 एक्यूआई कम है यानी शहर की हवा पूरी तरह शुद्ध हो गई है। उन्होंने शहरवासियों और प्रशासन से लॉक डाउन खत्म होने के बाद भी इस स्तर को बनाए रखने का अनुरोध किया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि प्रशासन निर्माण कार्यों में एनजीटी की गाइडलाइन का पालन कराए। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों का चालान हो। लोग जरूरी होने पर ही गाड़ी लेकर शहर में निकलें।

जाम भूल जाइए.. फिलहाल तो हर सड़क पर सन्नाटा है

दुगनी से भी ज्यादा नजर आ रही है अतिक्रमण से घिरे रास्तों की चौड़ाई
इसका श्रेय वैसे कोरोना की दहशत और लॉक डाउन को ही जाता है लेकिन चार दिनों से पूरा शहर शांत है। जिन चौराहों और सड़कों पर दिन भर लोग जाम से जूझते थे, उन पर पुलिस या फिर इक्का-दुक्का राहगीर ही नजर आ रहा है। ऐसे तमाम रास्तों की चौड़ाई भी दो से तीन गुनी तक नजर आ रही है जो अतिक्रमण से पटे रहते थे।

चौपुला चौराहा: अब नहीं दिख रहे धूल के गुबार

जनता कर्फ्यू के दिन से ही यहां ओवरब्रिज का निर्माण बंद कर दिया गया है। भीषण ट्रैफिक और ओवरब्रिज के निर्माण की वजह से यहां सुबह से देर रात तक जाम लगा रहता था। दुकानदार और इधर से गुजरने वाले लोग दिन धूल फांकते थे लेकिन अब सबकुछ शांत है। पुलिस या खरीददारी करने निकलने एकाध आदमी के अलावा यहां फिलहाल कोई नजर नहीं आ रहा।

अयूब खां चौराहा: चार दिन में सारी चहलपहल खत्म

दिन भर में लगभग 18 घंटे व्यस्त रहने वाले इस चौराहे पर भी अब सन्नाटा पसरा हुआ है। लॉक डाउन लागू होने से पहले यहां मार्केट में खरीददारी करने वालों, ऑफिस जाने वालों और घुमक्कड़ों की भीड़ नजर आती थी लेकिन अब यहां सिर्फ पुलिस तैनात है।

श्यामगंज चौराहा: टेंपो-ऑटो के जाल से मुक्ति

शहर के सबसे ज्यादा व्यस्त श्यामगंज चौराहे पर अब कुछ ही लोग चहलकदमी करते नजर आते हैं। चार दिन पहले तक यहां खरीदारी करने वाले लोगों और रिक्शे-ठेलों की भरमार थी लेकिन अब सन्नाटा है। आगे फल मंडी वाले तिराहे पर भी सन्नाटा है। टेंपो और डग्गामार गाड़ियों के अवैध स्टैंड सुनसान पड़े हुए हैं।

रेत-बजरी के ढेरों से मुक्त हुईं सड़कें

लॉक डाउन के बाद रेत-बजरी की सड़कों पर बनी अवैध टालें भी काफी हद तक कम हो गई हैं। कारोबारियों ने रेत-बजरी के ढेर या तो हटा दिए हैं या फिर उन्हें सड़कों से हटाकर पटरी के पीछे सीमित कर लिया है। डेलापीर रोड पर सड़क पर बनाए गए सेल्फी प्वाइंट की आड़ में पिछले दिनों दोबारा बनाया गया रेत का टीला भी अब गायब हो गया है।

निजी अस्पताल और अपार्टमेंट भी चमचमाए

यूं तो नगर निगम भी लगातार सफाई करा रहा है लेकिन जहां नगर निगम की टीमें नहीं पहुंच पा रही हैं, कोरोना के डर से लोगों ने मोहल्लों में सफाई की कमान खुद संभाल ली है। सूफी टोला और रोहली टोला जैसे कई इलाकों में पिछले दिनों लोग खुद बजबजाती नालियों की सफाई करने में जुटे नजर आए। कोरोना की गंभीरता का एहसास होने के बाद मरीजों की भरमार होने के बावजूद सफाई का खास ख्याल न रखने वाले अस्पतालों में भी सफाई की मुहिम शुरू हुई और अब ज्यादातर अस्पतालों की तस्वीर कुछ अलग ही नजर आ रही है। कई अपार्टमेंट भी लोगों ने खुद साफ कर डाले।
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