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बाघिन ने ऐसा घुमाया कि विशेषज्ञ भी लौट गए
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- फोटो : demo photo
बारिश के बाद नहीं मिल रही बाघिन की लोकेशन, योजना में होगा बदलाव
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देहरादून से बुलाए गए एक्सपर्ट पहले ही जा चुके हैं वापस
बरेली (फतेहगंज पश्चिमी)। बीते करीब चार माह तक रबर फैक्टरी के जंगल में डेरा जमाए बैठी बाघिन का रेस्क्यू अब थमता दिखाई दे रहा है। बीते दिनों देहरादून और पीलीभीत से आए विशेषज्ञों के बाद गुरुवार को कानपुर से आए दो विशेषज्ञ भी वापस लौट गए हैं। दोपहर में मुख्य वन संरक्षक और वन संरक्षक फैक्टरी पहुंचे। अफसरों ने कहा कि विशेषज्ञों के कानपुर से लौटने के बाद नई योजना बनाकर फिर से ऑपरेशन शुरू किया जाएगा।
फैक्टरी में बेखौफ घूम रही बाघिन की पैंतरेबाजी के सामने वन विभाग की योजनाएं धरी की धरी रह गई हैं। उसे पकड़ने आए विशेषज्ञों का दल भी वापस लौट चुका है। दो टीमों की वापसी के बाद कानपुर के विशेषज्ञ डॉ. आरके सिंह और आगरा से बुधवार को पहुंचे डॉ. एल्ले राजा भी गुरुवार को कानपुर वापस चले गए हैं। जिसकी जानकारी पर गुरुवार को मुख्य वन सरंक्षक ललित वर्मा और वन सरंक्षक जावेद अख्तर ने बाघिन की चहलकदमी को जानने के लिए क्षेत्र में रेस्क्यू वैन से भ्रमण किया। करीब आधे घंटे तक मौके पर रहकर बाघिन को पकड़ने के लिए रणनीति बनाई। बारिश में बाघिन को ट्रेंक्युलाइज करना मुश्किल है। जिसे देखते हुए अधिकारियों ने पिंजड़ेनुमा कमरा बनाने का निर्णय लिया है। बताते हैं कि इसमें प्रवेश करते ही बाघिन कैद हो जाएगी। उन्होंने फैक्टरी में मौजूद अन्य कई कमरों को भी इसी तरह पिजड़े में बदलने की योजना बनाने का निर्णय लिया है। मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि कानपुर में गैंडे के चोट लगने के कारण दोनों एक्सपर्ट कानपुर गए हैं। शनिवार को वह फिर आएंगे उसके बाद ही नई योजना पर काम किया जाएगा।
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देहरादून से बुलाए गए एक्सपर्ट पहले ही जा चुके हैं वापस बरेली (फतेहगंज पश्चिमी)। बीते करीब चार माह तक रबर फैक्टरी के जंगल में डेरा जमाए बैठी बाघिन का रेस्क्यू अब थमता दिखाई दे रहा है। बीते दिनों देहरादून और पीलीभीत से आए विशेषज्ञों के बाद गुरुवार को कानपुर से आए दो विशेषज्ञ भी वापस लौट गए हैं। दोपहर में मुख्य वन संरक्षक और वन संरक्षक फैक्टरी पहुंचे। अफसरों ने कहा कि विशेषज्ञों के कानपुर से लौटने के बाद नई योजना बनाकर फिर से ऑपरेशन शुरू किया जाएगा।
फैक्टरी में बेखौफ घूम रही बाघिन की पैंतरेबाजी के सामने वन विभाग की योजनाएं धरी की धरी रह गई हैं। उसे पकड़ने आए विशेषज्ञों का दल भी वापस लौट चुका है। दो टीमों की वापसी के बाद कानपुर के विशेषज्ञ डॉ. आरके सिंह और आगरा से बुधवार को पहुंचे डॉ. एल्ले राजा भी गुरुवार को कानपुर वापस चले गए हैं। जिसकी जानकारी पर गुरुवार को मुख्य वन सरंक्षक ललित वर्मा और वन सरंक्षक जावेद अख्तर ने बाघिन की चहलकदमी को जानने के लिए क्षेत्र में रेस्क्यू वैन से भ्रमण किया। करीब आधे घंटे तक मौके पर रहकर बाघिन को पकड़ने के लिए रणनीति बनाई। बारिश में बाघिन को ट्रेंक्युलाइज करना मुश्किल है। जिसे देखते हुए अधिकारियों ने पिंजड़ेनुमा कमरा बनाने का निर्णय लिया है। बताते हैं कि इसमें प्रवेश करते ही बाघिन कैद हो जाएगी। उन्होंने फैक्टरी में मौजूद अन्य कई कमरों को भी इसी तरह पिजड़े में बदलने की योजना बनाने का निर्णय लिया है। मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि कानपुर में गैंडे के चोट लगने के कारण दोनों एक्सपर्ट कानपुर गए हैं। शनिवार को वह फिर आएंगे उसके बाद ही नई योजना पर काम किया जाएगा।
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