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विधायकों का फिर वही दुखड़ा... नहीं सुनते अफसर

Sun, 01 Aug 2021 01:40 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 01 Aug 2021 01:40 AM IST
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The same pain of MLAs again... Officers do not listen
बैठक में शामिल अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

जिला विकास समन्वय एवं अनुश्रवण समिति की बैठक में नहीं आए कई अफसर तो निकली भड़ास
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विकास कार्यों में धांधली और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का लगाया आरोप
संतोष गंगवार ने भी जताई नाराजगी, डीएम ने एक्सईएन का वेतन रोका

बरेली। जिला विकास समन्वय एवं अनुश्रवण समिति यानी दिशा की बैठक में शनिवार को एक बार फिर जिले में जनप्रतिनिधियों पर अफसरशाही के भारी पड़ने का मामला गरमाया। बैठक में कई अफसरों की गैरमौजूदगी पर पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के साथ विधायक भी जमकर भड़के। आरोप लगाया कि अफसरशाही पूरी मनमानी से काम कर रही है। विकास कार्य न समय पर पूरे हो रहे हैं, न उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है। ऊपर से अफसर जनप्रतिनिधियों की भी एक सुनने को तैयार नहीं हैं।
जिले के विधायकों की ओर से काफी समय से अफसरों पर मनमानी से काम करने का आरोप लगाया जाता रहा है। कई बार यह मुद्दा जिले के प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा और प्रभारी अधिकारी नवनीत सहगल के सामने भी उठ चुका है। शनिवार को भी दिशा की बैठक में यह मुद्दा तब गरमाया जब सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने बरेली-सीतापुर हाईवे के निर्माण की धीमी गति पर सवाल किया लेकिन जवाब देने के लिए एनएचएआई के पीडी बैठक में ही मौजूद नहीं थे। इस पर डीएम से मुखातिब हुए संतोष गंगवार ने नाराजगी जताई तो विधायकों ने भी शिकायतों की झड़ी लगा दी। उन्होंने आरोप लगाया कि एनएचएआई के अफसर न उनका फोन उठाते हैं न शिकायत सुनते हैं। दूसरे अफसरों का भी यही रवैया है। किस विधायक के क्षेत्र में विकास का क्या काम स्वीकृत हुआ है, यह तक उन्हें नहीं बताया जाता।
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सीतापुर हाईवे के बाद ग्रामीण इलाकों में पीएमजीएसवाई की सड़कों की घटिया गुणवत्ता का मामला उठा तो पता चला कि एक्सईएन राजवीर सिंह भी बैठक में नहीं आए हैं। विधायकों ने आरोप लगाया कि पीडब्ल्यूडी के अफसर सड़कों के निर्माण में जमकर धांधली कर रहे हैं। एक्सईएन दफ्तर से निकलते ही नहीं। हाल ही में जिन सड़कों का रिन्यूवल हुआ, उनमें गड्ढे हो गए हैं। अफसर यह तक नहीं बता रहे हैं कि किन सड़कों का रिन्यूवल किया गया है। डीएम ने बगैर सूचना बैठक में न आने पर एक्सईएन का वेतन रोकने का आदेश दिया। संतोष गंगवार ने पीएमजीएसवाई के तहत बनी सड़कों की सूची जनप्रतिनिधियों को दिलाने का निर्देश दिया। बहेड़ी विधायक छत्रपाल ने शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। कहा, गांवों में बने शौचालयों की गुणवत्ता ठीक नहीं है। सार्वजनिक शौचालयों के ताले भी नहीं खोले गए हैं। बैठक में निशुल्क खाद्यान्न वितरण कार्यक्रम के लाभार्थियों से प्रधानमंत्री के संवाद के कार्यक्रम की तैयारियां पूरी करने को भी कहा गया।
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बैठक में कई अफसर भी नदारद रहे। बिना सूचना बैठक में न आने पर पीएमजीएसवाई खंड के एक्सईएन का वेतन रोकने के निर्देश दिए गये।

कुपोषण नियंत्रण के हवाई आंकड़ों पर डीएम नाराज

कुपोषण खत्म करने की लड़ाई में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की सुस्ती पर डीएम ने नाराजगी जताई। सवालों के जवाब मांगने पर हवाई आंकड़े पेश करने पर उन्होंने आंकड़े सुधारने के निर्देश दिए। विभागीय अधिकारियों ने जागरूकता की कमी को भी कुपोषण की वजह बताया। तर्क दिया कि गांवों में मांएं कुपोषित बच्चों के खानपान का ख्याल नहीं रख पातीं। शहर विधायक अरुण कुमार ने शहर के आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकत्रियों के क्षेत्र में न जाने की बात कही।

विधायकों ने कहा- एनएचएआई के अफसरों पर कार्रवाई हो

बैठक में सबसे ज्यादा हंगामा सीतापुर हाईवे को लेकर हुआ। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया एनएचएआई अफसरों की लापरवाही की वजह से ही प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है लिहाजा उन पर कार्रवाई की जाए। प्रोजेक्ट की समीक्षा में पता चला कि अब तक सिर्फ एक-तिहाई काम ही पूरा हुआ है। बताया गया कि काम पूरा करने के लिए 16 मार्च 2021 की समयसीमा तय की गई थी जिसे बाद में बढ़ाकर 31 मार्च 2022 कर दिया गया। इसके बावजूद प्रोजेक्ट काफी धीमा चल रहा है। अब तक सिर्फ 37.5 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। प्रोजेक्ट मार्च 2022 तक भी पूरा होने की उम्मीद नहीं है।

गांवों में जान ले रही हैं जर्जर बिजली की लाइनें फिर भी नहीं बदल रहे

बिजली के तार टूटने से हाल ही में हुई दो मौतों का मामला भी बैठक में उठा। पावर कॉरपोरेशन की समीक्षा के दौरान जनप्रतिनिधियों ने गांवों में बिजली के जर्जर तारों और खंभों का मुद्दा उठाया। अफसरों ने बताया एबीसी बिछाने के लिए एजेंसी तय करने के साथ सर्वे पूरा हो गया है। जल्द ही गांवों में जर्जर तार बदलने का काम शुरू होगा। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना समेत पावर कॉरपोरेशन की कई दूसरी योजनाओं की भी समीक्षा की गई।

नए उद्योगों के 145 आवेदनों में से सिर्फ 15 मंजूर, नहीं दे पाए जवाब

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की दुर्दशा पर भी सांसद संतोष गंगवार ने जिला उद्योग केंद्र के अफसरों को आड़े हाथ लिया। समीक्षा में पता चला कि इस योजना के तहत उद्योग लगाने के लिए अब तक 145 आवेदन किए गए हैं लेकिन अफसरों ने सिर्फ 15 को ही स्वीकृति दी है। इतने कम आवेदन स्वीकृत होने पर अफसरों से जवाब मांगा गया तो वे बगलें झांकने लगे। सांसद ने इस पर सख्त नाराजगी जताने के साथ जल्द सुधार लाने का निर्देश दिया।

स्मार्ट सिटी के तहत बने संजय कम्युनिटी हॉल की छत

संजय कम्युनिटी हॉल की जर्जर छत का मुद्दा भी उठाया गया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि संजय कम्युनिटी हॉल की छत जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है जो हादसे की वजह बन सकती है। इस पर हॉल की छत का जीर्णोद्धार स्मार्ट सिटी के तहत कराने के निर्देश दिए गए। नगर आयुक्त को भी अमृत योजना के कामों की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
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