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सिफारिश हुई तब लगाया जिला अस्पताल में प्लास्टर
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Tue, 15 Nov 2016 12:54 AM IST
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जिला अस्पताल में एक मरीज को देखने में डॉक्टर किस हद तक लापरवाही करते हैं इसकी तस्वीर सोमवार को दिखी। कर्मचारी नगर में रहने वाले एक श्रमिक को प्लास्टर चढ़ाने में दस दिन लग गए। न तो डॉक्टर ने ध्यान दिया और न प्लास्टर चढ़ाने वाले कर्मियों ने ही सुनी। प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की तब जाकर उसका काम हुआ।
60 वर्षीय शिवलाल 12 दिन पहले एक निर्माण कार्य के काम पर लगे हुए थे। यहां ऊंचाई से गिरने पर इनके दोनों हाथ की हड्डी टूट गई और चोट भी आई। पहले निजी अस्पताल में इलाज चला, जहां पट्टी कर दी गई। इलाज को पैसे नहीं थे तो उनकी बेटी उन्हें जिला अस्पताल ले आई। यहां हड्डी रोग विशेषज्ञों को दिखाया गया, लेकिन डॉ. शिवदत्ता ने आपरेशन की मशीन न होने की बात बताकर पल्ला झाड़ लिया। वहीं, डॉ. टीएस आर्या ने मरीज को बिना देखे ही ओपीडी से भगा दिया। मरीज छह दिन तक जिला अस्पताल में राउंड लगाता रहा, लेकिन कोई इलाज नहीं हुआ। पांच दिन पहले सिफारिश पर डॉ. टीएस आर्या ने शिवलाल को देखा और प्लास्टर लिख दिया, लेकिन कर्मचारियाें ने सिर्फ पट्टी कर कुछ दिन बाद आने को कहा। सोमवार को शिवलाल फिर अस्पताल पहुंचे तो प्लास्टर कक्ष के कर्मचारी टरकाते रहे। इसकी शिकायत शिवलाल की बेटी ने सीएमएस कक्ष में जाकर की तब उन्हाेंने प्लास्टर लगवाया। शिवलाल की बेटी ने कहा कि प्लास्टर लगाने के लिए पैसे नहीं थे इसलिए उनको टरकाया जाता रहा।
नौकरी पर बनी तो मरीज ने बचाया
जिला अस्पताल में 102 एंबुलेंस से 24 अक्तूबर को भगवानपुर बलरामपुर के धीरेंद्र यादव और उनकी पत्नी को न ले जाने पर ईएमटी को हटा दिया गया है। ईएमटी की नौकरी खतरे में आने पर मरीज धीरेंद्र ने इसे झूठा आरोप बताते हुए एंबुलेंस एजेंसी को सफाई दी है। धीरेंद्र ने कहा कि एबुलेंस चालक और ईएमटी निर्दोष हैं। इसके लिए उन्होंने हलफनामा भी दिया है। सभी को पता है कि धीरेंद्र ने ऐेसा एबुलेंस चालक और ईएमटी की नौकरी बचाने के लिए किया है।
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60 वर्षीय शिवलाल 12 दिन पहले एक निर्माण कार्य के काम पर लगे हुए थे। यहां ऊंचाई से गिरने पर इनके दोनों हाथ की हड्डी टूट गई और चोट भी आई। पहले निजी अस्पताल में इलाज चला, जहां पट्टी कर दी गई। इलाज को पैसे नहीं थे तो उनकी बेटी उन्हें जिला अस्पताल ले आई। यहां हड्डी रोग विशेषज्ञों को दिखाया गया, लेकिन डॉ. शिवदत्ता ने आपरेशन की मशीन न होने की बात बताकर पल्ला झाड़ लिया। वहीं, डॉ. टीएस आर्या ने मरीज को बिना देखे ही ओपीडी से भगा दिया। मरीज छह दिन तक जिला अस्पताल में राउंड लगाता रहा, लेकिन कोई इलाज नहीं हुआ। पांच दिन पहले सिफारिश पर डॉ. टीएस आर्या ने शिवलाल को देखा और प्लास्टर लिख दिया, लेकिन कर्मचारियाें ने सिर्फ पट्टी कर कुछ दिन बाद आने को कहा। सोमवार को शिवलाल फिर अस्पताल पहुंचे तो प्लास्टर कक्ष के कर्मचारी टरकाते रहे। इसकी शिकायत शिवलाल की बेटी ने सीएमएस कक्ष में जाकर की तब उन्हाेंने प्लास्टर लगवाया। शिवलाल की बेटी ने कहा कि प्लास्टर लगाने के लिए पैसे नहीं थे इसलिए उनको टरकाया जाता रहा।
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नौकरी पर बनी तो मरीज ने बचाया
जिला अस्पताल में 102 एंबुलेंस से 24 अक्तूबर को भगवानपुर बलरामपुर के धीरेंद्र यादव और उनकी पत्नी को न ले जाने पर ईएमटी को हटा दिया गया है। ईएमटी की नौकरी खतरे में आने पर मरीज धीरेंद्र ने इसे झूठा आरोप बताते हुए एंबुलेंस एजेंसी को सफाई दी है। धीरेंद्र ने कहा कि एबुलेंस चालक और ईएमटी निर्दोष हैं। इसके लिए उन्होंने हलफनामा भी दिया है। सभी को पता है कि धीरेंद्र ने ऐेसा एबुलेंस चालक और ईएमटी की नौकरी बचाने के लिए किया है।
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