फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   The panchayat secretary holding a patchwork of half million seats occupied

मनरेगा में डेढ़ करोड़ का घपला करने वाले पंचायत सचिव सीटों पर काबिज

Thu, 02 Jun 2016 12:50 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Thu, 02 Jun 2016 12:50 AM IST
विज्ञापन
 दमखोदा ब्लाक की ग्राम पंचायतों में मनरेगा के 1.57 करोड़ का घपला करने वालों का पत्ता तक नहीं हिला। जो जहां पर था, वहीं मिला। ग्राम पंचायत सचिवों के निलंबन की चिट्ठियां फाइलों में दबी रहीं। अब प्रशासनिक और विकास विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि जवाब मिल गया है, बहाल कर देंगे।  यह तो जिले के एक ब्लाक की तस्वीर है, बाकी के 14 और ब्लाकों का भी ऐसा हाल है। सवाल यह है कि ‘आडिट’ सरकारी विभाग है, जिसे सरकार ने घपला और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बनाया है। उसी की रिपोर्ट को दर किनार करके सब कुछ ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
विज्ञापन

जिला पंचायतराज अधिकारी दिनेश सिंह का कहना है कि आडिट रिपोर्ट गलत है और जिस अवधि के घपले की बात कही गई है, उस अवधि में करन सिंह, नजरूल हसन सहित पांचों पंचायत कर्मी उन गांवों में तैनात नहीं थे। अब सवाल यह है कि यदि ऐसा था तो उनको निलंबित ही क्यों किया गया। निलंबन किया गया तो उनके निलंबन आदेश खंड विकास अधिकारियों के यहां क्यों नहीं भेजे गए। नियम है कि निलंबन के बाद जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें आरोपी को चार्जशीट थमाते हैं। उसके लिए जांच अधिकारी नामित होता है । आरोपी  आरोपपत्र के आधार पर जांच अधिकारी को जवाब देता है। जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर दोषी होने पर दंड या फिर निर्दोष होने की स्थिति में सवेतन बहाली के आदेश होते हैं। यहां पर तो पंद्रह दिन तक निलंबन आदेश फाइलों में रखा रहा । बकौल, डीपीआरओ आरोपियों को निलंबन आदेश की प्रति जिले से ही थमा दी गई और अब उनका प्रत्यावेदन लेकर बहाल करने की तैयारी है।
विज्ञापन

ये हैं आरोप  
 दमखोदा ब्लाक की 64 ग्राम पंचायतों में तीन साल के दौरान मनरेगा के 9.23 करोड़ से कराए गए कामों में 1.57 करोड़ के गोल माल का खुलासा हुआ  । इस राशि के कामों के आडिट टीम को समायोजन, लेखा व्यय, वाउचर, कार्य मापक आदि अभिलेख न दिखाना । पंचायत सचिव करन सिंह और नजरुल हसन को पूरे ब्लाक की 69 फीसदी धनराशि (6.40 करोड़) से 33 गांवों में मनरेगा के काम कराना। जबकि इतने ही गांवों में मात्र 31 फीसदी धनराशि (2.83 करोड़ ) से विकास कराना। इनके अलावा इसी ब्लाक के पंचायत सचिव बरकत खां, मोहम्मद बसीम और शशांक वर्मा को भी धनराशि के दुरुपयोग के आरोप में निलंबित किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


तो घपला करने वाले कर्मी कौन
डीपीआरओ का कहना है कि आडिट रिपोर्ट में जिन गांवों में घपला और अनियमितताओं का उल्लेख किया है। उस अवधि में ये नहीं बल्कि दूसरे कर्मचारी थे। यदि दूसरे कर्मचारी थे तो वो कौन हैं और उनके खिलाफ कब और क्या कार्रवाई की जाएगी। इसको लेकर अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है। 

कोट
‘निलंबित पंचायत सचिवों के प्रत्यावेदन मिल गए हैं। उनके प्रत्यावेदन से प्रतीत हुआ है कि आरोपों में दम नहीं है, इसीलिए उन्हें बहाल करने की तैयारी है। जल्द ही बहाल कर दिए जाएंगे।’ दिनेश सिंह, जिला पंचायतराज अधिकारी


‘पूरे मामले की डीपीआरओ से रिपोर्ट तलब की है। बकौल डीपीआरओ इन पंचायत सचिवों का गलत निलंबन हुआ है। आडिटर की रिपोर्ट में जिस अवधि में तैनाती का उल्लेख किया है, उस अवधि में ये पंचायत सचिव तैनात नहीं थे। मनरेगा के 6.40 करोड़ से कराए गए कामों का सवाल है, उनकी अधिकारियों की टीम बनाकर जांच कराने का निर्णय लिया है।’ गौरव दयाल, डीएम 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed