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एमफार्मा में दो ब्रांच पर पदक एक ही मिलेगा
बरेली।
Updated Fri, 06 Oct 2017 02:32 AM IST
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विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में इस बार फार्मेसी विभाग एमफार्मा के मेडल को लेकर विवाद में घिर गया है। यहां एमफार्मा की दो ब्रांच हैं और विश्वविद्यालय ने सिर्फ एक ही टॉपर घोषित किया है। मामला राजभवन तक पहुंचा लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला। डीन आईटी भी यह लिखकर दे चुके हैं कि एमफार्मा की दोनों ब्रांच अलग-अलग हैं।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग में फार्माकोलॉजी और फार्मासियूटिक्स में एमफार्मा कराया जाता है। 2014-16 बैच में प्रीति खंडूरी ने फार्माकोलॉजी और पवन कुमार ने फार्मासियूटिक्स में टॉप किया। पिछले साल इनको दीक्षांत समारोह के वक्त रिजल्ट घोषित न होने पर मेडल नहीं मिल सका। इस बार आनन-फानन में परीक्षा कराकर रिजल्ट घोषित किया गया। अब इन विद्यार्थियों ने मेडल दिए जाने की मांग की तो विवि ने पल्ला झाड़ लिया। इस बार फार्माकोलॉजी से मुजीबा ने टॉप किया और फार्मासियूटिक्स में करिश्मा सिंह ने बाजी मारी। विवि ने करिश्मा सिंह को टॉपर घोषित किया और फार्माकोलॉजी को छोड़ दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन एमफार्मा को एक ही कोर्स मान रहा है और अधिक नंबर वाले विद्यार्थी को टॉपर घोषित कर दिया। दूसरी तरफ विभाग के शिक्षक और डीन कोर्स को अलग-अलग मान रहे हैं। राजभवन भी यह मामला गया लेकिन कोई हल नहीं निकला। ध्यातव्य है कि विश्वविद्यालय एमबीए, इंजीनियरिंग, एमए में अलग-अलग विषयों में मेडल देता है। डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता ने बताया कि विभाग अलग नहीं है। इसलिए इसपर कोई फैसला नहीं हो सका।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग में फार्माकोलॉजी और फार्मासियूटिक्स में एमफार्मा कराया जाता है। 2014-16 बैच में प्रीति खंडूरी ने फार्माकोलॉजी और पवन कुमार ने फार्मासियूटिक्स में टॉप किया। पिछले साल इनको दीक्षांत समारोह के वक्त रिजल्ट घोषित न होने पर मेडल नहीं मिल सका। इस बार आनन-फानन में परीक्षा कराकर रिजल्ट घोषित किया गया। अब इन विद्यार्थियों ने मेडल दिए जाने की मांग की तो विवि ने पल्ला झाड़ लिया। इस बार फार्माकोलॉजी से मुजीबा ने टॉप किया और फार्मासियूटिक्स में करिश्मा सिंह ने बाजी मारी। विवि ने करिश्मा सिंह को टॉपर घोषित किया और फार्माकोलॉजी को छोड़ दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन एमफार्मा को एक ही कोर्स मान रहा है और अधिक नंबर वाले विद्यार्थी को टॉपर घोषित कर दिया। दूसरी तरफ विभाग के शिक्षक और डीन कोर्स को अलग-अलग मान रहे हैं। राजभवन भी यह मामला गया लेकिन कोई हल नहीं निकला। ध्यातव्य है कि विश्वविद्यालय एमबीए, इंजीनियरिंग, एमए में अलग-अलग विषयों में मेडल देता है। डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता ने बताया कि विभाग अलग नहीं है। इसलिए इसपर कोई फैसला नहीं हो सका।
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