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Bareilly News: एक कक्षा में विद्यार्थियों की अधिकतम संख्या 60 निर्धारित
Tue, 30 Jun 2026 01:26 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Tue, 30 Jun 2026 01:26 AM IST
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बरेली। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वर्ष 2027 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी है। बरेली क्षेत्रीय कार्यालय की सचिव रेखा दिवाकर ने बरेली और मुरादाबाद मंडल के सभी प्रधानाचार्यों से नियमों का कड़ाई से पालन करने के लिए कहा है।
नए नियमों के तहत किसी भी विद्यालय में कक्षा 10 और 12 में सीधे बाहरी विद्यार्थियों का प्रवेश 10 से अधिक संख्या में नहीं लिया जा सकता। विशेष परिस्थिति में इससे अधिक प्रवेश के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। प्रत्येक कक्षा या सेक्शन में छात्रों की अधिकतम संख्या 60 निर्धारित की गई है।
सचिव के अनुसार, संस्थागत छात्र-छात्राओं के प्रवेश, परीक्षा शुल्क जमा करने और उनके शैक्षिक विवरणों को परिषद की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड व संशोधित करने के संबंध में कड़े नियम लागू किए गए हैं। प्रधानाचार्यों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि ऑनलाइन आवेदनों को केवल मान्य विषयों के तहत ही नियमानुसार आगे बढ़ाया जाए।
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यदि किसी भी विद्यालय की ओर से अपात्र या नियमों के विपरीत आवेदन आगे बढ़ाए जाते हैं, तो इसके लिए संस्था के प्रधान सीधे जिम्मेदार होंगे। ऐसे प्रधानाचार्यों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और उन्हें परिषद के पारिश्रमिक कार्यों से भी हटा दिया जाएगा।
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नए नियमों के तहत किसी भी विद्यालय में कक्षा 10 और 12 में सीधे बाहरी विद्यार्थियों का प्रवेश 10 से अधिक संख्या में नहीं लिया जा सकता। विशेष परिस्थिति में इससे अधिक प्रवेश के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। प्रत्येक कक्षा या सेक्शन में छात्रों की अधिकतम संख्या 60 निर्धारित की गई है।
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सचिव के अनुसार, संस्थागत छात्र-छात्राओं के प्रवेश, परीक्षा शुल्क जमा करने और उनके शैक्षिक विवरणों को परिषद की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड व संशोधित करने के संबंध में कड़े नियम लागू किए गए हैं। प्रधानाचार्यों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि ऑनलाइन आवेदनों को केवल मान्य विषयों के तहत ही नियमानुसार आगे बढ़ाया जाए।
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यदि किसी भी विद्यालय की ओर से अपात्र या नियमों के विपरीत आवेदन आगे बढ़ाए जाते हैं, तो इसके लिए संस्था के प्रधान सीधे जिम्मेदार होंगे। ऐसे प्रधानाचार्यों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और उन्हें परिषद के पारिश्रमिक कार्यों से भी हटा दिया जाएगा।