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Bareilly News: जिस घर में पत्नी-बेटे की हत्या हुई... उसे बेच दिया, अब किराये पर रह रहे अरविंद
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बरेली। पत्नी सुधा व बेटे वासु की मौत के बाद उस मकान में रहना मुश्किल हो गया था। पत्नी-बच्चों के लिए ही वह मकान बनवाया था। जब वही नहीं रहे तो मकान का क्या करता? इसलिए उसे बेच दिया। अदालत के फैसले पर संतोष जाहिर करते हुए अरविंद सक्सेना ने ये बातें कहीं। अब वह किराये के मकान में रह रहे हैं।
डेलापीर की कैलाशपुरम काॅलोनी में रहने वाले अरविंद सक्सेना की पत्नी सुधा व उनके पुत्र वासु (16) पर दो दिसंबर 2013 को डकैतों ने घर में घुसकर लूटपाट के बाद हमला किया था। दोनों के सिर कुचल दिए थे। इसमें सुधा की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि वासु ने छह साल इलाज के बाद वर्ष 2019 में दम तोड़ दिया था। इस मामले में बुधवार को अदालत ने इज्जतनगर की चंद्रमणि काॅलोनी निवासी नरेंद्र उर्फ लालाराम व उसके भाई सुनील कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अरविंद ने बताया कि घटना से तीन साल पहले वर्ष 2010 में बड़े ही लगाव से वह घर बनवाया था। अब न पत्नी बचीं न बेटा। इसलिए घर को बेच दिया। अरविंद ने वर्ष 2019 तक तो मुकदमा लड़ा, लेकिन बेटे की मौत के बाद वह टूट गए। उन्होंने अदालत जाना भी छोड़ दिया था। अखबार पढ़कर बृहस्पतिवार को उन्हें फैसले की जानकारी हुई।
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छह साल तक जिंदा लाश बने बेटे को देखते रहे
अरविंद ने बताया कि छह साल तक बेटा जिंदा लाश बना रहा। आखिर तक वह बोल नहीं पाया, बिस्तर पर ही रहा। कई ऑपरेशन हुए। वासु के इलाज में एक करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च हुए। प्रधानमंत्री कोष से तीन लाख रुपये व राज्य सरकार ने 15 लाख रुपये इलाज के लिए दिए थे। शहर के लोगों ने भी इलाज में मदद की थी। नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में उसका इलाज चला। इसके बाद भी वह बच नहीं सका।
मृत्युदंड की सजा पर भी हुई सुनवाई
इस मामले में विशेष लोक अभियोजक सुनील पांडेय ने दोषी दोनों भाइयों को मृत्युदंड देने की मांग की थी। न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी की अदालत ने इसे विरल से विरलतम की श्रेणी में नहीं माना। दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। संवाद
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डेलापीर की कैलाशपुरम काॅलोनी में रहने वाले अरविंद सक्सेना की पत्नी सुधा व उनके पुत्र वासु (16) पर दो दिसंबर 2013 को डकैतों ने घर में घुसकर लूटपाट के बाद हमला किया था। दोनों के सिर कुचल दिए थे। इसमें सुधा की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि वासु ने छह साल इलाज के बाद वर्ष 2019 में दम तोड़ दिया था। इस मामले में बुधवार को अदालत ने इज्जतनगर की चंद्रमणि काॅलोनी निवासी नरेंद्र उर्फ लालाराम व उसके भाई सुनील कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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अरविंद ने बताया कि घटना से तीन साल पहले वर्ष 2010 में बड़े ही लगाव से वह घर बनवाया था। अब न पत्नी बचीं न बेटा। इसलिए घर को बेच दिया। अरविंद ने वर्ष 2019 तक तो मुकदमा लड़ा, लेकिन बेटे की मौत के बाद वह टूट गए। उन्होंने अदालत जाना भी छोड़ दिया था। अखबार पढ़कर बृहस्पतिवार को उन्हें फैसले की जानकारी हुई।
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छह साल तक जिंदा लाश बने बेटे को देखते रहे
अरविंद ने बताया कि छह साल तक बेटा जिंदा लाश बना रहा। आखिर तक वह बोल नहीं पाया, बिस्तर पर ही रहा। कई ऑपरेशन हुए। वासु के इलाज में एक करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च हुए। प्रधानमंत्री कोष से तीन लाख रुपये व राज्य सरकार ने 15 लाख रुपये इलाज के लिए दिए थे। शहर के लोगों ने भी इलाज में मदद की थी। नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में उसका इलाज चला। इसके बाद भी वह बच नहीं सका।
मृत्युदंड की सजा पर भी हुई सुनवाई
इस मामले में विशेष लोक अभियोजक सुनील पांडेय ने दोषी दोनों भाइयों को मृत्युदंड देने की मांग की थी। न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी की अदालत ने इसे विरल से विरलतम की श्रेणी में नहीं माना। दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। संवाद