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माननीयों के अपने गांव ही बदहाल
बरेली।
Updated Mon, 13 Nov 2017 01:11 AM IST
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सांसद के गांव
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हमेशा की तरह सरकार में रही पार्टी की तरह अबकी निकाय चुनाव में भाजपा अधूरे विकास कार्यों और वादे न निभा पाने के लिए घेरी जाएगी। सांसदों और विधायकों को लेकर घेराबंदी भी शुरू हो चुकी है। विपक्षी दलों के उकसावे पर ही सही, मगर जनता अब पूछ रही है कि केंद्रीय मंत्री सांसद संतोष गंगवार और सांसद धर्मेंद्र कश्यप जब अपने गांवों के हालात नहीं सुधार सके तो पूरी बरेली की स्थिति क्या सुधार सकेंगे। संतोष के गांव ट्यूलिया को तो भीतर जाकर देखने की जरूरत ही नहीं, बस गांव की ओर बढ़ते ही गड्ढों-धूल से भरे मुख्य मार्ग की हालत देखकर विकास की पूरी तस्वीर सामने आ जाती है। ऐसा ही हाल धर्मेंद्र कश्यप के गांव कांधरपुर का है। कूड़े के ढेरों ने पूरे गांव और उधर से गुजरने वाले दूसरे गांव वालों का भी हाल बुरा किया हुआ है। इसी तरह सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के गांव गुलड़िया की सड़कें गड्ढों से भरी हैं तो बहेड़ी विधायक छत्रपाल सिंह के गांव दमखोदा में खुद उनके घर के सामने वाली सड़क ही चलने लायक नहीं है। इन बदहाल हालात के बीच बड़ा सवाल पार्टी के सामने यही है कि किस मुंह से जनता के बीच जाकर निकाय चुनाव के लिए वोट मांगे। उनसे क्या वादे करें और कैसे करें, क्योंकि अब तक किए वादों का हश्र तो जनता देख ही रही है।
अपने गांव की ही सड़क नहीं बनवा पाए मंत्री जी
बरेली। दिल्ली हाईवे पर परसाखेड़ा औद्योगिक एरिया के रोड नंबर चार पर गैस प्लांट चौराहे से दाहिने हाथ की सड़क केंद्रीय श्रम रोजगार मंत्री संतोष गंगवार के पैतृक गांव ट्यूलिया जाती है। यह सड़क 15 साल पहले पहले बनी थी, जिसकी जगह बड़े और गहरे गड्ढों के सिवा कुछ नजर नहीं आता। हालांकि ट्यूलिया में संतोष गंगवार खुद नहीं रहते, मगर उनके परिवार के लोग जरूर यहां बसे हुए हैं।
गांव के अंदर घुसने पर भी कुछ ही दूर तक पक्की सड़क मिलती है, फिर गली में खड़ंजा शुरू हो जाता है जो जगह-जगह टूट चुका है। सड़क पर नालियों का गंदा पानी बहता है। दो गलियों में टाइल्स बिछी हैं, लेकिन बाकी गांव की गलियां बदहाल हैं। वैसे पांच हजार की आबादी वाले इस गांव में छोटी-बड़ी 50 से ज्यादा गलियां हैं, ये सबकी-सब टूटी और जर्जर हैं। गांव वालों का कहना है कि गलियों में दस साल पहले खड़ंजा पड़ा था, जो कई साल पहले ही टूटकर जर्जर हो चुका है। ज्यादातर नालियां भी कच्ची हैं। कुछ एक जो पक्की नालियां हैं, वह भी टूट चुकी हैं। तालाब की सफाई बरसों से नहीं हुई हैं। बिजली सिर्फ 12 घंटे मिलती है। गांव वाले उम्मीद जताते हैं कि मंत्री जी कभी न कभी तो गलियां पक्की करा ही देंगे। जर्जर सड़क से भड़ौली, वोहित, हमीरपुर, इमामगंज, मुड़िया और मिलक गौंटिया के लोगों को भी गुजरना पड़ता है।
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नगर निगम ने गांवों में काम नहीं कराया
केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के प्रतिनिधि और भाजपा जिला महामंत्री वीरेंद्र गंगवार वीरू का कहना है कि ट्यूलिया मंत्री जी का पैतृक गांव जरूर है लेकिन उनका जन्म बरेली शहर में हुआ है। अपनी सांसद निधि से उन्होंने ट्यूलिया के विकास के लिए 20 लाख रुपये दिए हैं। पूरी सांसद निधि तो गांव को नहीं दे सकते। गांव की मुख्य रोड भी उन्होंने तब हाटमिक्स बनवाई थी, जब वह पेट्रोलियम मंत्री थे। दोबारा भी इस सड़क के टेंडर हो चुके हैं। गांव की गलियां जल्द ही पक्की कराई जाएंगी। वैसे टयूलिया की बदहाली के लिए नगर निगम जिम्मेदार है क्योंकि यह गांव शहर में शामिल तो कर लिए गए लेकिन काम कोई नहीं कराया। क्या वजह है कि रामपुर बाग और राजेंद्र नगर की सड़कों में हर छह माह में नई लेयर पड़ती है लेकिन शहर की सीमा वाले गांवों में बरसों से रोड नहीं बनती।
धर्मेंद्र के गांव में कूड़े और गंदगी के ढेर
बरेली। आंवला से निर्वाचित भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप कांधरपुर गांव में रहते हैं। लगभग 20 हजार की आबादी वाले इस गांव में सांसद के घर के सामने ही कूड़े का ढेर लगा है। यही नहीं, उनके के घर को जाने वाली जर्जर गली में नाली चोक होने से घरों से निकलने वाला गंदा पानी भरा हुआ है। गांव के खाली प्लाटों में भी कूड़े के ढेर इकट्ठे हैं। गांव की गलियां कभी पक्की बनी होंगी जो अब जर्जर होकर टूट चुकी हैं। सांसद के घर के सामने बने पंचायत भवन का हाल भी बदहाल है। तेज हवा चलती है तो पूरे गांव में धूल उड़ती दिखाई देती है।
लाल फाटक रेलवे क्रॉसिंग पार करते ही कांधरपुर शुरू होता है। शहर का नजदीकी गांव होने की वजह से बिल्डरों ने गांव वालों से सस्ती जमीनें खरीदकर कई कालोनियां खड़ी कर दी हैं। गांव के आसपास अब भी कई कालोनियां भी विकसित हो रही हैं। सांसद का गांव होने के बाद भी यहां पेयजल के लिए कोई बेहतर साधन नहीं हैं। गांव के लोग इसके लिए निजी संसाधनों पर ही निर्भर हैं। 100 से ज्यादा घरों में शौचालय नहीं बने हैं। ये सभी परिवार खुले में शौच जाते हैं। कहीं-कहीं संकरी गलियां हैं। पढ़े-लिखे होने के बाद भी युवा बेरोजगार हैं। गांव के लोग बताते हैं कि गांव में दो सफाई कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन फिर भी नियमित सफाई नहीं होती।
अपने गांव की ही सड़क नहीं बनवा पाए मंत्री जी
बरेली। दिल्ली हाईवे पर परसाखेड़ा औद्योगिक एरिया के रोड नंबर चार पर गैस प्लांट चौराहे से दाहिने हाथ की सड़क केंद्रीय श्रम रोजगार मंत्री संतोष गंगवार के पैतृक गांव ट्यूलिया जाती है। यह सड़क 15 साल पहले पहले बनी थी, जिसकी जगह बड़े और गहरे गड्ढों के सिवा कुछ नजर नहीं आता। हालांकि ट्यूलिया में संतोष गंगवार खुद नहीं रहते, मगर उनके परिवार के लोग जरूर यहां बसे हुए हैं।
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गांव के अंदर घुसने पर भी कुछ ही दूर तक पक्की सड़क मिलती है, फिर गली में खड़ंजा शुरू हो जाता है जो जगह-जगह टूट चुका है। सड़क पर नालियों का गंदा पानी बहता है। दो गलियों में टाइल्स बिछी हैं, लेकिन बाकी गांव की गलियां बदहाल हैं। वैसे पांच हजार की आबादी वाले इस गांव में छोटी-बड़ी 50 से ज्यादा गलियां हैं, ये सबकी-सब टूटी और जर्जर हैं। गांव वालों का कहना है कि गलियों में दस साल पहले खड़ंजा पड़ा था, जो कई साल पहले ही टूटकर जर्जर हो चुका है। ज्यादातर नालियां भी कच्ची हैं। कुछ एक जो पक्की नालियां हैं, वह भी टूट चुकी हैं। तालाब की सफाई बरसों से नहीं हुई हैं। बिजली सिर्फ 12 घंटे मिलती है। गांव वाले उम्मीद जताते हैं कि मंत्री जी कभी न कभी तो गलियां पक्की करा ही देंगे। जर्जर सड़क से भड़ौली, वोहित, हमीरपुर, इमामगंज, मुड़िया और मिलक गौंटिया के लोगों को भी गुजरना पड़ता है।
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नगर निगम ने गांवों में काम नहीं कराया
केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के प्रतिनिधि और भाजपा जिला महामंत्री वीरेंद्र गंगवार वीरू का कहना है कि ट्यूलिया मंत्री जी का पैतृक गांव जरूर है लेकिन उनका जन्म बरेली शहर में हुआ है। अपनी सांसद निधि से उन्होंने ट्यूलिया के विकास के लिए 20 लाख रुपये दिए हैं। पूरी सांसद निधि तो गांव को नहीं दे सकते। गांव की मुख्य रोड भी उन्होंने तब हाटमिक्स बनवाई थी, जब वह पेट्रोलियम मंत्री थे। दोबारा भी इस सड़क के टेंडर हो चुके हैं। गांव की गलियां जल्द ही पक्की कराई जाएंगी। वैसे टयूलिया की बदहाली के लिए नगर निगम जिम्मेदार है क्योंकि यह गांव शहर में शामिल तो कर लिए गए लेकिन काम कोई नहीं कराया। क्या वजह है कि रामपुर बाग और राजेंद्र नगर की सड़कों में हर छह माह में नई लेयर पड़ती है लेकिन शहर की सीमा वाले गांवों में बरसों से रोड नहीं बनती।
धर्मेंद्र के गांव में कूड़े और गंदगी के ढेर
बरेली। आंवला से निर्वाचित भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप कांधरपुर गांव में रहते हैं। लगभग 20 हजार की आबादी वाले इस गांव में सांसद के घर के सामने ही कूड़े का ढेर लगा है। यही नहीं, उनके के घर को जाने वाली जर्जर गली में नाली चोक होने से घरों से निकलने वाला गंदा पानी भरा हुआ है। गांव के खाली प्लाटों में भी कूड़े के ढेर इकट्ठे हैं। गांव की गलियां कभी पक्की बनी होंगी जो अब जर्जर होकर टूट चुकी हैं। सांसद के घर के सामने बने पंचायत भवन का हाल भी बदहाल है। तेज हवा चलती है तो पूरे गांव में धूल उड़ती दिखाई देती है।
लाल फाटक रेलवे क्रॉसिंग पार करते ही कांधरपुर शुरू होता है। शहर का नजदीकी गांव होने की वजह से बिल्डरों ने गांव वालों से सस्ती जमीनें खरीदकर कई कालोनियां खड़ी कर दी हैं। गांव के आसपास अब भी कई कालोनियां भी विकसित हो रही हैं। सांसद का गांव होने के बाद भी यहां पेयजल के लिए कोई बेहतर साधन नहीं हैं। गांव के लोग इसके लिए निजी संसाधनों पर ही निर्भर हैं। 100 से ज्यादा घरों में शौचालय नहीं बने हैं। ये सभी परिवार खुले में शौच जाते हैं। कहीं-कहीं संकरी गलियां हैं। पढ़े-लिखे होने के बाद भी युवा बेरोजगार हैं। गांव के लोग बताते हैं कि गांव में दो सफाई कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन फिर भी नियमित सफाई नहीं होती।