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Bareilly News: पांच गुना महंगा पिंजरा निगल रहा बजट, आजाद घूम रही दहशत

Thu, 06 Feb 2025 02:19 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 06 Feb 2025 02:19 AM IST
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The five times expensive cage is swallowing the budget, panic is roaming free
बरेली। बंदर पकड़ने का पिंजरा पांच गुना महंगा हो गया है, पर इसमें बंदर नहीं फंस रहे। कागजी उछलकूद दिखाकर सिर्फ बजट खपाया जा रहा है, जबकि बंदर आजाद घूम रहे हैं। कालीबाड़ी में मंगलवार को बंदरों के हमले से बचाव के दौरान छत से गिरकर बुजुर्ग जगदीश (62) की मौत हो गई थी। पार्षद हरीशंकर की सूचना के बावजूद बुधवार को भी नगर निगम की टीम वहां बंदर पकड़ने नहीं पहुंची।
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मारवाड़ीगंज में बुधवार को पिंजरा लगाया, पर घंटेभर बाद ही हटा लिया। इससे नाराज वार्ड-दो की पार्षद गरिमा कमांडो शिकायत करने के लिए उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नैन सिंह के कार्यालय पहुंच गईं। तब टीम को दोबारा भेजा गया। पार्षद के मुताबिक, शाम तक उनके वार्ड में सिर्फ 25 बंदर पकड़े जा सके।
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28 सितंबर 2024 तक बंदरों को पकड़ने का खर्च 157 रुपये था। नए टेंडर हुए तो इस राशि को करीब पांच गुना बढ़ाकर 779 रुपये कर दिया गया। इसके बावजूद स्थिति काबू में नहीं आ रही है। नगर निगम के अफसरों का दावा है कि 24 लाख खर्च कर 3,128 बंदर पकड़े गए हैं। हालांकि, शहर में इसका असर कतई नहीं दिखता।
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इन इलाकों में है आतंक
माधौबाड़ी, गंगापुर, मारवाड़ीगंज, महावीर एन्क्लेव, जाटवपुरा, वाल्मीकि बस्ती, टायर मंडी, ईंट पजाया, आलमगिरीगंज, रामपुर गार्डन, पवन विहार, राजेंद्रनगर, डीडीपुरम, सन सिटी, कुर्मांचलनगर, शास्त्रीनगर, मढ़ीनाथ।
लंगूर का कटआउट लगाकर बंदर को भगा रहे लोग
लंगूर का कटआउट लगाकर लोग बंदरों पर काबू करने का प्रयास करते हैं। बाजार में लंगूर का एक कटआउट 550 रुपये में मिल रहा है। कटआउट देखकर बंदर डरकर भाग जाते हैं। पार्षद सरिता देवी कश्यप ने कहा कि नगर निगम बंदर पकड़ने पर खर्च कर रहा है। बेहतर होगा कि लंगूर मंगा लिए जाएं, बंदर खुद ही भाग जाएंगे।
बंदर की जान बचाने में गई मेरे पिता की जान
कालीबाड़ी निवासी जगदीश राणा के बेटे अमन ने बताया कि उनके पिता की जान बंदर की जान बचाने में चली गई। दरअसल, जब वह छत पर गए तो देखा कि एक बंदर किसी कपड़े में फंसा हुआ था। डंडा लेकर उसे हटाने का प्रयास किया तो दूसरे बंदर हमलावर हो गए। बचने के लिए भागे तो छत से नीचे गिर गए।
बंदर ले रहे जान, पर नहीं बना रोस्टर

बंदरों का उत्पात काफी बढ़ गया है, लेकिन निगम का अभियान व्यवस्थित नहीं है। इसका कोई रोस्टर नहीं बना है। इस मुद्दे पर अधिकारियों से बात होगी। बोर्ड की बैठक में भी मुद्दा उठाएंगे। - छंगामल मौर्य, पार्षद

मेरे मोहल्ले में महिलाओं का मंदिर तक जाना दुश्वार है। रास्ते में बंदरों के झुंड बैठ जाते हैं। मैंने कई बार इस मुद्दे को उठाया। काफी प्रयास और इंतजार के बाद डेढ़ साल में दो बार ही बंदर पकड़े गए। - गरिमा कमांडो, पार्षद
मेरी मां ऊषा देवी भी बंदरों के हमले में घायल हो चुकी हैं। इसके बाद टीम पहुंची और 70 बंदर पकड़े गए, लेकिन घटनाएं थमी नहीं। अब खानापूरी हो रही है। टीम बंदरों को पकड़कर आसपास ही छोड़ देती है। - मुकेश सिंघल, पार्षद


वर्जन



बंदर पकड़ने के लिए अभियान चल रहा है। पकड़े गए बंदरों को शहर के आसपास नहीं छोड़ा जाता। बंदरों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जहां से शिकायत आती है, वहां टीम भेजते हैं। -डाॅ. नैन सिंह, उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी

बंदर और कुत्ते पकड़ने के लिए 15 दिन का विशेष अभियान चलाने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। नगर निगम के टोल फ्री नंबर पर कॉल करें तो टीम मौके पर पहुंचेगी। - उमेश गौतम, महापौर
अमर उजाला ब्यूरो
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