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बच्ची हुई तेंदुए का पहला शिकार आखिर वही हुआ जिसका डर था

Tue, 29 Sep 2020 02:16 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2020 02:16 AM IST
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The first victim of the baby leopard was the one who was afraid
ग्रामीणों से मामले की जानकारी लेते एसडीएम मीरगंज। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

चार-पांच दिन से इलाके में छाया था तेंदुए का खौफ
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चार छोटे जानवरों को उठा ले जाने के बाद भी वन विभाग नहीं हुआ सक्रिय
रात में ही गांव पहुंची प्रशासनिक टीम मगर गन्ने के खेतों में नहीं घुसा कोई

मीरगंज (बरेली)। शीशगढ़ इलाके में तेंदुए की मौजूदगी की वजह से चार-पांच दिनों से लोग काफी खौफ में थे। दो गांवों से तेंदुआ चार जानवरों को उठा चुका था। पांच दिन पहले प्रधान की सूचना पर पुलिस और वन विभाग की टीम पहुंची लेकिन खानापूरी करके लौट गई। आखिरकार गांव वालों की आशंका सच साबित हुई और सोमवार रात तेंदुआ बच्ची को उठा ले गया। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक टीम गांव पहुंची लेकिन रात के वक्त कोई गन्ने के खेतों में घुसने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
बुझिया गांव के प्रधान ओमप्रकाश के मुताबिक, चार-पांच दिन से तेंदुआ का क्षेत्र में आतंक है। खिदरपुर, सुकटिया, रोठ, टेहरा, खमरिया आदि गांवों में तेंदुआ को देखे जाने की सूचना मिल रही थी। इस बीच खिदरपुर गांव से तेंदुआ बकरी के दो और सुकटिया से सुअर के दो बच्चे भी उठा ले गया। उन्होंने पांच दिन पहले पुलिस को सूचना दी तो चौकी इंचार्ज और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची लेकिन तेंदुआ न दिखा तो किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। सोमवार को तेंदुआ बबलू की बच्ची उपासना को उठा ले गया। इसे लेकर गांव वालों में वन विभाग को लेकर आक्रोश है।
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ईख में घुसने की नहीं पड़ी हिम्मत

तेंदुआ जब बच्ची को उठा ले गया तो पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। तमाम गांव वाले भी जुट आए और वे लोग आसपास के छोटी फसलों वाले खेतों में बच्ची को तलाशते रहे। मगर रात होने के कारण गन्ने के खेतों में घुसने की किसी की हिम्मत नहीं पड़ी। सभी गांव में बैठकर सुबह होने का इंतजार करते रहे।
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रबर फैक्टरी में डेरा जमाए बाघिन का भी पता नहीं

करीब तीन महीने पहले फतेहगंज पश्चिमी में बंद पड़ी रबर फैक्टरी परिसर में बाघिन और शावक देखे जाने की बात सामने आई थी। उन्हें पकड़ने के लिए स्थानीय स्तर के अलावा लखनऊ और देहरादून के विशेषज्ञ भी पहुंचे थे। लंबे समय तक वहां कैमरे लगाकर निगरानी की गई लेकिन बाघिन या शावक को पकड़ने में कामयाबी नहीं मिली। इसी नेशनल हाईवे पर रबर फैक्टरी के पास ही एक बाघिन की सड़क हादसे में मौत हो गई थी।

महीने भर पहले खमरिया सानी में दिखा था तेंदुआ

मीरगंज के गांव खमरिया सानी के खेतों में करीब एक महीने पहले भी तेंदुआ दिखा था। एक बार वह गांव में भी घुस गया तो लोगों ने भगा दिया। इसके बाद वह मंडनपुर के बाग में नजर आया तो लोगों ने आग जलाकर भगा दिया। इसके बाद भी वन विभाग की टीम पहुंची और चेतावनी देकर लौट आई, तेंदुआ को पकड़ने का कोई प्रयास नहीं किया।

एसडीओ समेत वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई है। चार-पांच जगह खून पड़ा मिला है लेकिन बच्ची या तेंदुआ का देर रात तक कोई सुराग नहीं लगा है। - रविंद्र सक्सेना, रेंजर, बहेड़ी

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