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बजट तो पी गए अब मुफ्त में करवा रहे लीलौर झील पर काम
बरेली।
Updated Sun, 14 May 2017 01:37 AM IST
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The budget has been drunk, now working on Lake Leylor for free
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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सरकार बदलते ही सिंचाई विभाग के घपले सामने आने लगे हैं। आंवला तहसील की लीलौर झील के सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट में करोड़ों का घपला उजागर होने के बाद जिम्मेदार लोग तो अपनी गर्दन बचाने की जुगत में द्वार पूज रहे हैं। बजट तो ठेकोदारों ने ठिकाने लगा दिया अब जाने किसके पैसे से वहां नए सिरे से लीपापोती हो रही है। सिंचाई मंत्री की नाराजगी से घबराए अफसरों ने बिना किसी बजट के ही खामियां दूर कराना शुरू कर दिया। पिछले सप्ताह शुरू हुआ कार्य अभी जारी है, इस बीच झील किनारे बनी सड़क धंसने से अधिकारी परेशान हो गए हैं।
सिंचाई मंत्री बनते ही धर्मपाल सिंह ने पहली पत्रकार वार्ता ने लीलौर झील समेत अन्य प्रोजेक्टों में घपलों की जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की घोषणा की थी। लीलौर झील प्रोजेक्ट की जांच शुरू हुई लेकिन एक माह से ज्यादा समय बीतने पर एक भी अफसर चिह्नित नहीं हुआ है। प्रत्यक्षत:घपले में शामिल अफसर अभी बरेली में ही तैनात हैं।
शनिवार दोपहर अधीक्षण अभियंता एके सेंगर सहायक इंजीनियर मुनेंद्र सिंह, दीपक कुमार और आशीष रंजन आदि के साथ मौके पर पहुंचे। एसई ने मौके पर दर्जनों खामियां देखीं। झील में पानी लाने और निकासी आदि व्यवस्था नहीं थी, इसे देख वे भड़क गए। साथ गए सहायक इंजीनियरों ने झील प्रोजेक्ट पर निर्माण कराया था। उनका कहना था जो ऊपर से निर्देश मिला वही कराया है। सेंगर ने जब धंसी सड़क देखी तो उनका पारा चढ़ गया, उन्होंने सवाल किया कि क्या सड़क का भुगतान हो चुका है, सिर झुकाए अधीनस्थों ने कहा- जी सर। झील पर किस मद से सुधार कार्य हो रहा है तो अफसर बगले झांकने लगे। बताया गया कि खामियाें मिल जुलकर दूर करायी जा रही हैं। सेंगर ने नाराजगी जतायी- बोले कि एक भी नहीं बचेगा।
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अधिशासी अभियंता लंबे अवकाश पर
लीलौर झील निर्माण कार्य से जुड़े अधिशासी अभियंता आरबी यादव अचानक लंबे अवकाश पर चले गए हैं। दो सप्ताह तक अवकाश पर गए यादव ने अपने कार्यकाल में ठेके निस्तारित किए थे और प्रोजेक्ट पूरा कराया। उनके अवकाश पर जाने से विभाग में चर्चा बनी हुई है।
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सिंचाई मंत्री बनते ही धर्मपाल सिंह ने पहली पत्रकार वार्ता ने लीलौर झील समेत अन्य प्रोजेक्टों में घपलों की जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की घोषणा की थी। लीलौर झील प्रोजेक्ट की जांच शुरू हुई लेकिन एक माह से ज्यादा समय बीतने पर एक भी अफसर चिह्नित नहीं हुआ है। प्रत्यक्षत:घपले में शामिल अफसर अभी बरेली में ही तैनात हैं।
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शनिवार दोपहर अधीक्षण अभियंता एके सेंगर सहायक इंजीनियर मुनेंद्र सिंह, दीपक कुमार और आशीष रंजन आदि के साथ मौके पर पहुंचे। एसई ने मौके पर दर्जनों खामियां देखीं। झील में पानी लाने और निकासी आदि व्यवस्था नहीं थी, इसे देख वे भड़क गए। साथ गए सहायक इंजीनियरों ने झील प्रोजेक्ट पर निर्माण कराया था। उनका कहना था जो ऊपर से निर्देश मिला वही कराया है। सेंगर ने जब धंसी सड़क देखी तो उनका पारा चढ़ गया, उन्होंने सवाल किया कि क्या सड़क का भुगतान हो चुका है, सिर झुकाए अधीनस्थों ने कहा- जी सर। झील पर किस मद से सुधार कार्य हो रहा है तो अफसर बगले झांकने लगे। बताया गया कि खामियाें मिल जुलकर दूर करायी जा रही हैं। सेंगर ने नाराजगी जतायी- बोले कि एक भी नहीं बचेगा।
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अधिशासी अभियंता लंबे अवकाश पर
लीलौर झील निर्माण कार्य से जुड़े अधिशासी अभियंता आरबी यादव अचानक लंबे अवकाश पर चले गए हैं। दो सप्ताह तक अवकाश पर गए यादव ने अपने कार्यकाल में ठेके निस्तारित किए थे और प्रोजेक्ट पूरा कराया। उनके अवकाश पर जाने से विभाग में चर्चा बनी हुई है।