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कैंसर से जीती जंग.. मरीज बोले- अब लाइलाज नहीं रहा कैंसर
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कैंसर
- फोटो : Demo Pic.
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विश्व कैंसर दिवस पर विशेष
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बरेली। इंसान बीमारी से एक बार, लेकिन इसके खौफ से हर रोज मरता है। उसे लगता है कि जिंदगी अब खत्म हो गई है, लेकिन यह सच नहीं जनाब। हमारे बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने न केवल कैंसर के खिलाफ जंग जीती, बल्कि कई ऐसे मरीजों के लिए सबक बने हैं, जो बीमारी के नाम से घबराकर हौसला छोड़ देते हैं। ये विदेश से महंगा इलाज कराकर आने वाले सेलिब्रिटी नहीं, बल्कि आम लोग हैं।
आठ साल पहले बिहारीपुर निवासी रानी (73) को पेशाब संबंधी दिक्कतें महसूस हुईं। उन्हें पेशाब करने में जलन महसूस होती थी। निजी अस्पताल में दिखाया, जहां कैंसर की पुष्टि हुई। आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के चलते परिवार वालों ने रानी को 13 मार्च 2012 को एसआरएमएस में भर्ती कराया। आपरेशन हुआ और फि र पांच हफ्ते सिकाई हुई। आज रानी पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉ. पीयूष अग्रवाल बताते हैं कि ऐसे कई मरीजों को यहां ठीक किया गया है। ऐसे ही शहर निवासी माया देवी को बच्चेदानी में कैंसर हुआ। आयुष्मान योजना के तहत उनका इलाज कराया गया। वह स्वस्थ्य हैं, उनकी सिकाई चल रही है।
मयूर वन चेतना केंद्र मुड़िया अहमद नगर निवासी 32 वर्षीय मखदूम अली को दो साल पहले कैंसर हुआ। शुरू में उन्हें पता नहीं चला। इधर-उधर इलाज कराते रहे। तकलीफ बढ़ी तो जांच कराई, जिसमें कैंसर निकला। फिर आयुष्मान योजना के तहत बरेली में उन्होंने इलाज कराया। आज वह स्वस्थ्य जीवन जी रहे हैं। गंगाचरण हॉस्पिटल के डॉ. प्रमेंद्र महेश्वरी ने बताया कि 16 साल पहले तिलहर के 18 वर्षीय मुन्नलाल को लाइकोमा कैंसर हुआ। इसका सफल आपरेशन हुआ, डॉक्टरों ने कुछ दिन फालोअप किया और आज 16 साल बाद भी मुन्नालाल स्वस्थ्य जीवन जी रहे हैं।
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आयुष्मान योजना में है इलाज
कैंसर पीड़ित व्यक्ति किसी भी सूचीबद्व चिकित्सालय में कैंसर का इलाज करा सकता है। आयुष्मान की टीम ऐसे मरीजों की तलाश भी करती है और भर्ती कराने में उनकी मदद भी करती है।
- डॉ. अमीर बेग, जिला शिकायत अधिकारी
कैंसर का कारण भावनात्मक और आर्थिक तनाव भी
वैश्विक रूप से देखें तो बीमारी से होने वाली मौतों में कैंसर दूसरा सबसे बड़ा कारण हैं। वर्ष 2018 में करीब 96 लाख लोगों की कैंसर से जान गई। यानी छह में एक मरीज के निधन की वजह कैंसर बना। फेफ ड़ा, प्रोस्टेट, कोलोरेक्टल, पेट और लिवर कैंसर से पुरुष ज्यादा प्रभावित हुए, जबकि ब्रेस्ट, कोलोरेक्टल, फेफ ड़ा और सरवाइकल कैंसर ने महिलाओं पर ज्यादा असर डाला।
कुछ यह भी हैं आंकड़े
-भारत में प्रति मिनट सरवाइकल कैंसर से एक एक महिला की मौत
- देश में प्रति मिनट दो महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता चलता है और एक की मौत हो जाती है।
- देश में तंबाकू की वजह से मुंह के कैंसर से प्रतिदिन 3500 लोगों की मृत्यु। वर्ष 2018 में कैंसर से कुल 7,84,921 लोगों की मौत।
- धुएं (बीड़ी, सिगरेट के धुएं सहित) से वर्ष 2018 में 3,17,928 लोगों की मौत।
- कैंसर से मरने वाले पुरुषों में सबसे ज्यादा 25 फ ीसद वजह मुंह और फेफ ड़ों का कैंसर, जबकि महिलाओं में सबसे ज्यादा 25 फीसद वजह मुंह और ब्रेस्ट कैंसर।
जागरूकता ही बचाव का एकमात्र उपाय
कैंसर लाइलाज नहीं, बस जागरूकता की कमी से फैल रहा है। शुरूआती चरणों में इस पर काबू करना बेहद आसान है, लेकिन इसकी जांच के लिए बायोप्सी कराना आवश्यक होता है, जिससे लोग डरते हैं। रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी को लेकर गलत धारणाओं से लोग इसके इलाज से बचते हैं। ऐसे में लापरवाही से कैंसर अंतिम चरण में पहुंचकर लाइलाज हो जाता है। डॉ. पीयूष अग्रवाल और डॉ. प्रमेंद्र महेश्वरी बताते हैं कि शरीर में किसी गांठ, घाव या बीमारी की एक माह से ज्यादा अनदेखी न करें। तुरंत विशेषज्ञ से मिलें और कैंसर की जांच कराएं।
आठ साल पहले बिहारीपुर निवासी रानी (73) को पेशाब संबंधी दिक्कतें महसूस हुईं। उन्हें पेशाब करने में जलन महसूस होती थी। निजी अस्पताल में दिखाया, जहां कैंसर की पुष्टि हुई। आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के चलते परिवार वालों ने रानी को 13 मार्च 2012 को एसआरएमएस में भर्ती कराया। आपरेशन हुआ और फि र पांच हफ्ते सिकाई हुई। आज रानी पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉ. पीयूष अग्रवाल बताते हैं कि ऐसे कई मरीजों को यहां ठीक किया गया है। ऐसे ही शहर निवासी माया देवी को बच्चेदानी में कैंसर हुआ। आयुष्मान योजना के तहत उनका इलाज कराया गया। वह स्वस्थ्य हैं, उनकी सिकाई चल रही है।
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मयूर वन चेतना केंद्र मुड़िया अहमद नगर निवासी 32 वर्षीय मखदूम अली को दो साल पहले कैंसर हुआ। शुरू में उन्हें पता नहीं चला। इधर-उधर इलाज कराते रहे। तकलीफ बढ़ी तो जांच कराई, जिसमें कैंसर निकला। फिर आयुष्मान योजना के तहत बरेली में उन्होंने इलाज कराया। आज वह स्वस्थ्य जीवन जी रहे हैं। गंगाचरण हॉस्पिटल के डॉ. प्रमेंद्र महेश्वरी ने बताया कि 16 साल पहले तिलहर के 18 वर्षीय मुन्नलाल को लाइकोमा कैंसर हुआ। इसका सफल आपरेशन हुआ, डॉक्टरों ने कुछ दिन फालोअप किया और आज 16 साल बाद भी मुन्नालाल स्वस्थ्य जीवन जी रहे हैं।
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आयुष्मान योजना में है इलाज
कैंसर पीड़ित व्यक्ति किसी भी सूचीबद्व चिकित्सालय में कैंसर का इलाज करा सकता है। आयुष्मान की टीम ऐसे मरीजों की तलाश भी करती है और भर्ती कराने में उनकी मदद भी करती है।
- डॉ. अमीर बेग, जिला शिकायत अधिकारी
कैंसर का कारण भावनात्मक और आर्थिक तनाव भी
वैश्विक रूप से देखें तो बीमारी से होने वाली मौतों में कैंसर दूसरा सबसे बड़ा कारण हैं। वर्ष 2018 में करीब 96 लाख लोगों की कैंसर से जान गई। यानी छह में एक मरीज के निधन की वजह कैंसर बना। फेफ ड़ा, प्रोस्टेट, कोलोरेक्टल, पेट और लिवर कैंसर से पुरुष ज्यादा प्रभावित हुए, जबकि ब्रेस्ट, कोलोरेक्टल, फेफ ड़ा और सरवाइकल कैंसर ने महिलाओं पर ज्यादा असर डाला।
कुछ यह भी हैं आंकड़े
-भारत में प्रति मिनट सरवाइकल कैंसर से एक एक महिला की मौत
- देश में प्रति मिनट दो महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता चलता है और एक की मौत हो जाती है।
- देश में तंबाकू की वजह से मुंह के कैंसर से प्रतिदिन 3500 लोगों की मृत्यु। वर्ष 2018 में कैंसर से कुल 7,84,921 लोगों की मौत।
- धुएं (बीड़ी, सिगरेट के धुएं सहित) से वर्ष 2018 में 3,17,928 लोगों की मौत।
- कैंसर से मरने वाले पुरुषों में सबसे ज्यादा 25 फ ीसद वजह मुंह और फेफ ड़ों का कैंसर, जबकि महिलाओं में सबसे ज्यादा 25 फीसद वजह मुंह और ब्रेस्ट कैंसर।
जागरूकता ही बचाव का एकमात्र उपाय
कैंसर लाइलाज नहीं, बस जागरूकता की कमी से फैल रहा है। शुरूआती चरणों में इस पर काबू करना बेहद आसान है, लेकिन इसकी जांच के लिए बायोप्सी कराना आवश्यक होता है, जिससे लोग डरते हैं। रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी को लेकर गलत धारणाओं से लोग इसके इलाज से बचते हैं। ऐसे में लापरवाही से कैंसर अंतिम चरण में पहुंचकर लाइलाज हो जाता है। डॉ. पीयूष अग्रवाल और डॉ. प्रमेंद्र महेश्वरी बताते हैं कि शरीर में किसी गांठ, घाव या बीमारी की एक माह से ज्यादा अनदेखी न करें। तुरंत विशेषज्ञ से मिलें और कैंसर की जांच कराएं।