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जमकर चल रहा है मिलावट का खेल

Wed, 18 Oct 2017 01:44 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Wed, 18 Oct 2017 01:44 AM IST
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Tackling game
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मिठाई त्योहाराें की परंपरा में शामिल है, यानी इसके बगैर रौनक ही नहीं। मगर बाजार इस मजबूरी का जमकर फायदा उठा रहा है। मिठाई में मिलावट करके लोगों की जेेबें काटने के साथ सेहत से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। रंग- बिरंगी खूबसूरत दिखने वाली मिठाइयों में लाल-पीले रंग मिला होने से केमिकल आपकी सेहत को बिगाड़ता है। चांदी वर्क में एल्युमीनियम व अन्य धातुएं भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। मावा वाली दिल लुभाती बर्फी में शकरकंद, आलू, मैदा, रिफाइंड खिलाया जा रहा है। मिठाई में लगी मेवा यानी पिस्ता की जगह रंगी हुई मूंगफली भी हो सकती है। बेसन में पिसी हुई मटर- रंग से चूना तो डिब्बा मिठाई के वजन में तोलकर भी आपकी जेब काटी जा रही है। ऐसा नहीं है कि हर किसी स्टोर पर मिलावटी मिठाई बिक रही है, मगर बाजार में बड़े पैमाने में मिलावटी मिठाई खपाई गई है। अब आपकी समझ पर है कि आप किस तरह इस मिलावटी खेल से बचकर अपनी सेहत और जेब बचा पाते हैं।  
बरेली मंडल में शहर से देहात तक बाजार से गलियों तक मिलावटी और घटिया मिठाइयों का बाजार गुलजार है। मिठाई में चमक-दमक लाने के लिए ज्यादातर दुकानदार केमिकल युक्त अखाद्य रंगों का प्रयोग कर रहे हैं। आइटम को और आकर्षक बनाने के लिए ऊपर से कथित चांदी के वर्क भी लगाए जा रहे हैं जो एल्युमीनियम और अन्य घातक धातु के बने हुए हैं। लाजमी है कि मिठाई के साथ खतरनाक रंग और वर्क पेट में पहुंचता ही है। पेट में जाकर क्या रिएक्शन होता है, क्या प्रभाव होता है यह तुरंत तो पता नहीं चलता लेकिन ऐसी मिठाइयां ज्यादा इस्तेमाल करने पर सेहत बिगड़ना तय है। गरम-गरम गुलाब जामुन खाने में अच्छे जरूर लगते हैं लेकिन उनका निर्माण कैसे होता है यह शायद हर कोई नहीं जानता। यही स्थिति लगभग हर तरह की मिठाइयों में है। मिल्क केक, मावा केक, सोनपापड़ी, छेना मिठाई कहीं न कहीं कुछ न कुछ खेल इसमें किया जाता है। ब्रांडेड पैकिंग वाली मिठाइयां भी अछूती नहीं हैं।
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घटतौली में आगे 
मिठाई के साथ डिब्बे भी तौले जा रहे हैं। कीमत मिठाई के बराबर वसूली जा रही है। यही स्थिति नमकीन बाजार में भी है। ब्रांडेड कंपनी की रिजेक्टेड नमकीन थोक में लाकर लोग लोकल नमकीन में मिलाकर बेच रहे हैं। नमकीन तलने में इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल की क्वालिटी भी अच्छी नहीं है। बेकरी के आइटमों में भी सफाई का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। शहर की एक प्रचलित मिठाई की दुकान से डिब्बा बंद बिस्कुट खरीदे गए, उसमें बिस्कुट के बीच में पन्नी और बाल निकला। शिकायत करने पर ग्राहक को दौड़ा दिया, जब यह मामला एफएसडीए पहुंचा तो वहां कार्रवाई न करके कई नियम समझा दिए गए।
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