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संदिग्ध स्वाइन फ्लू मरीज की मौत पर अस्पताल में हंगामा
बरेली
Updated Sun, 07 Feb 2016 02:01 AM IST
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बरेली। वेंटीलेटर पर रखे गए मरीज की उपचार के दौरान मौत हो गई। परिवार वालों का कहना था कि चार दिन पहले ही मरीज की मौत हो गई थी और अस्पताल वाले अधिक बिल बनाने के लिए उसे वेंटीलेटर पर रखे थे। इसको लेकर परिवार वालों ने काफी हंगामा किया, लेकिन मामला निपट जाने के बाद परिवार वाले शव अस्पताल से ले गए। मरीज को स्वाइन फ्लू संदिग्ध बताया जा रहा है।
कस्बा बहेड़ी में टेलर मास्टर अकरम की पत्नी यासमीन (30) लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उनके फेफड़ों में इंफेक्शन था। परिजनों ने बताया कि सप्ताह भर पहले यासमीन को मिशन अस्पताल में भर्ती कराया तो डॉक्टरों ने संदिग्ध स्वाइन फ्लू बताकर वेंटीलेटर पर रखा था। शनिवार सुबह तड़के अस्पताल वालों ने बताया कि यासमीन की मौत हो गई। इस पर परिवार वाले भड़क उठे और हंगामा करने लगे। दोपहर बारह बजे तक हंगामा चला। मौके पर पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई। जिससे अस्पताल में अफरातफरी का माहौल हो गया। परिवार वालों का कहना था कि यासमीन की चार दिन पहले ही मौत हो गई थी। बिल बनाने के चक्कर में उन्हें इसके बारे में बताया ही नहीं गया और बिल एक लाख 25 हजार हो गया। बाद में अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के परिवार वालों से बातचीत कर बिल भी कम कर दिया। जिससे मामला निपट गया और परिवार वाले शव ले गए।
मरीज की हालत बेहद गंभीर थी। उसे वेंटीलेटर पर रखकर उपचार हो रहा था। घरवालों से कई बार किसी अन्य हायर सेंटर पर ले जाने की लगातार सलाह दी जा रही थी।
- अमिताभ द्रोण, एग्जीक्यूटिव सेक्रेट्री, मिशन अस्पताल
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कस्बा बहेड़ी में टेलर मास्टर अकरम की पत्नी यासमीन (30) लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उनके फेफड़ों में इंफेक्शन था। परिजनों ने बताया कि सप्ताह भर पहले यासमीन को मिशन अस्पताल में भर्ती कराया तो डॉक्टरों ने संदिग्ध स्वाइन फ्लू बताकर वेंटीलेटर पर रखा था। शनिवार सुबह तड़के अस्पताल वालों ने बताया कि यासमीन की मौत हो गई। इस पर परिवार वाले भड़क उठे और हंगामा करने लगे। दोपहर बारह बजे तक हंगामा चला। मौके पर पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई। जिससे अस्पताल में अफरातफरी का माहौल हो गया। परिवार वालों का कहना था कि यासमीन की चार दिन पहले ही मौत हो गई थी। बिल बनाने के चक्कर में उन्हें इसके बारे में बताया ही नहीं गया और बिल एक लाख 25 हजार हो गया। बाद में अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के परिवार वालों से बातचीत कर बिल भी कम कर दिया। जिससे मामला निपट गया और परिवार वाले शव ले गए।
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मरीज की हालत बेहद गंभीर थी। उसे वेंटीलेटर पर रखकर उपचार हो रहा था। घरवालों से कई बार किसी अन्य हायर सेंटर पर ले जाने की लगातार सलाह दी जा रही थी।
- अमिताभ द्रोण, एग्जीक्यूटिव सेक्रेट्री, मिशन अस्पताल