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बंदी ने की खुदकुशी
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बरेली। सिरौली के गांव भदपुरा जगन्नाथपुर निवासी 36 वर्षीय भूरा ने जिला जेल में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। शुक्रवार रात उसका शव बैरक के शौचालय में फंदे पर लटका मिला। परिवार वालों ने जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में सिरौली पुलिस ने 2001 में भूरा गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जमानत मिलने पर वह जेल से बाहर आ गया लेकिन पिछली कई तारीखों पर कोर्ट में पेश न होने के चलते गैर जमानती वारंट जारी हो गया था। इसके चलते चार फरवरी को सिरौली पुलिस ने उसे दोबारा गिरफ्तार करके जेल भेजा था। इन दिनों वह जिला जेल की बैरक नंबर एक में बंद था। शुक्रवार रात करीब पौने दो बजे एक बंदी ने बैरक के शौचालय में उसका शव गमछे के सहारे दरवाजे पर लटका देखा। उसने शोर मचाया तो जेल प्रशासन के अफसरों ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल के बाद रात करीब तीन बजे उसके परिवार वालों को सूचना दी और शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पोस्टमार्टम हाउस पर भूरा के भाई बदन सिंह ने बताया कि तीन-चार दिन पहले उसकी जमानत मंजूर हो गई थी और अब कागजी प्रक्रिया चल रही थी। सोमवार को उसके बाहर आ जाने की पूरी संभावना थी, उन्होंने भाई को इसकी सूचना भी दे दी। जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्होंने उसकी मौत का कारण समझ में नहीं आने की बात कही। वहीं, जिला जेल अधीक्षक विजय विक्रम सिंह का कहना है कि परिवार वालों की फोन पर उससे अक्सर बात होती थी। आत्महत्या का कोई पारिवारिक कारण हो सकता है।
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मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में सिरौली पुलिस ने 2001 में भूरा गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जमानत मिलने पर वह जेल से बाहर आ गया लेकिन पिछली कई तारीखों पर कोर्ट में पेश न होने के चलते गैर जमानती वारंट जारी हो गया था। इसके चलते चार फरवरी को सिरौली पुलिस ने उसे दोबारा गिरफ्तार करके जेल भेजा था। इन दिनों वह जिला जेल की बैरक नंबर एक में बंद था। शुक्रवार रात करीब पौने दो बजे एक बंदी ने बैरक के शौचालय में उसका शव गमछे के सहारे दरवाजे पर लटका देखा। उसने शोर मचाया तो जेल प्रशासन के अफसरों ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल के बाद रात करीब तीन बजे उसके परिवार वालों को सूचना दी और शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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पोस्टमार्टम हाउस पर भूरा के भाई बदन सिंह ने बताया कि तीन-चार दिन पहले उसकी जमानत मंजूर हो गई थी और अब कागजी प्रक्रिया चल रही थी। सोमवार को उसके बाहर आ जाने की पूरी संभावना थी, उन्होंने भाई को इसकी सूचना भी दे दी। जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्होंने उसकी मौत का कारण समझ में नहीं आने की बात कही। वहीं, जिला जेल अधीक्षक विजय विक्रम सिंह का कहना है कि परिवार वालों की फोन पर उससे अक्सर बात होती थी। आत्महत्या का कोई पारिवारिक कारण हो सकता है।
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