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Bareilly News: विद्यार्थी समझ रहे भारतीय लोकतंत्र की नींव
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बरेली। बरेली कॉलेज के कक्षा नंबर नौ में बृहस्पतिवार की दोपहर 12:40 बजे बीए प्रथम सेमेस्टर में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन एवं भारतीय संविधान पढ़ाया जा रहा था। इस कक्षा में विद्यार्थी भारतीय लोकतंत्र की नींव को समझ रहे थे।
कक्षा में डॉ. मिन्नी यादव सिर्फ किताबी बातें नहीं कर रहे थे, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के उन वीर नायकों की कहानियों को जीवंत कर रही थे, जिन्होंने देश को आजादी दिलाई। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. बीआर आंबेडकर के संघर्ष और योगदान को इतने सजीव ढंग से पेश किया कि हर विद्यार्थी का ध्यान उनकी ओर हो गया।
डॉ. मिन्नी यादव ने विद्यार्थियों को बताया कि संविधान सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। यह वह दर्पण है जिसमें हम अपने अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतंत्र की तस्वीर देख सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को मौलिक अधिकारों, जैसे समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारों के साथ-साथ हमारे कुछ कर्तव्य भी होते हैं, जैसे देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना।
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कक्षा के माहौल को और जीवंत बनाते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से सवाल भी पूछे। एक विद्यार्थी से उन्होंने पूछा क्या आप जानते हैं कि मौलिक कर्तव्य क्या हैं और वह क्यों जरूरी हैं? छात्र ने जवाब दिया कि मौलिक कर्तव्य हमें यह सिखाते हैं कि हमें अपने देश के प्रति क्या योगदान देना चाहिए। यह हमें एक जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। इस संवाद से यह स्पष्ट था कि यह सिर्फ एकतरफा शिक्षण नहीं था, बल्कि एक सहभागी प्रक्रिया थी। डॉ. मिन्नी यादव ने बताया कि उन्होंने शिक्षण की यह शैली इसलिए अपनाई है ताकि विद्यार्थी केवल रट्टा न मारे। संवाद
बातचीत
संविधान को समझना जरूरी
हमें पहले लगा था कि संविधान पढ़ना बहुत उबाऊ होगा, लेकिन सर जिस तरह से पढ़ाते हैं, उससे सब कुछ बहुत आसान और दिलचस्प लगता है। हमें अब लगता है कि संविधान सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन को समझने के लिए भी जरूरी है। - शिवानी, छात्रा
सर, ने जिस तरह से आजादी के आंदोलन और संविधान के निर्माण को जोड़ा, उससे हमें यह एहसास हुआ कि हमारे पूर्वजों ने कितनी मेहनत से हमें यह लोकतंत्र दिया है। अब हम इसे और भी महत्व देते हैं। - काजल, छात्रा
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कक्षा में डॉ. मिन्नी यादव सिर्फ किताबी बातें नहीं कर रहे थे, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के उन वीर नायकों की कहानियों को जीवंत कर रही थे, जिन्होंने देश को आजादी दिलाई। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. बीआर आंबेडकर के संघर्ष और योगदान को इतने सजीव ढंग से पेश किया कि हर विद्यार्थी का ध्यान उनकी ओर हो गया।
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डॉ. मिन्नी यादव ने विद्यार्थियों को बताया कि संविधान सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। यह वह दर्पण है जिसमें हम अपने अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतंत्र की तस्वीर देख सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को मौलिक अधिकारों, जैसे समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारों के साथ-साथ हमारे कुछ कर्तव्य भी होते हैं, जैसे देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना।
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कक्षा के माहौल को और जीवंत बनाते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से सवाल भी पूछे। एक विद्यार्थी से उन्होंने पूछा क्या आप जानते हैं कि मौलिक कर्तव्य क्या हैं और वह क्यों जरूरी हैं? छात्र ने जवाब दिया कि मौलिक कर्तव्य हमें यह सिखाते हैं कि हमें अपने देश के प्रति क्या योगदान देना चाहिए। यह हमें एक जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। इस संवाद से यह स्पष्ट था कि यह सिर्फ एकतरफा शिक्षण नहीं था, बल्कि एक सहभागी प्रक्रिया थी। डॉ. मिन्नी यादव ने बताया कि उन्होंने शिक्षण की यह शैली इसलिए अपनाई है ताकि विद्यार्थी केवल रट्टा न मारे। संवाद
बातचीत
संविधान को समझना जरूरी
हमें पहले लगा था कि संविधान पढ़ना बहुत उबाऊ होगा, लेकिन सर जिस तरह से पढ़ाते हैं, उससे सब कुछ बहुत आसान और दिलचस्प लगता है। हमें अब लगता है कि संविधान सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन को समझने के लिए भी जरूरी है। - शिवानी, छात्रा
सर, ने जिस तरह से आजादी के आंदोलन और संविधान के निर्माण को जोड़ा, उससे हमें यह एहसास हुआ कि हमारे पूर्वजों ने कितनी मेहनत से हमें यह लोकतंत्र दिया है। अब हम इसे और भी महत्व देते हैं। - काजल, छात्रा