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तेज रफ्तार बाइकों के बीच भी कायम है साइकिल का जलवा
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बरेली। कोरोना महामारी से पहले साइकिल की बिक्री में दर्ज हुई 22 फीसदी की गिरावट अब दस फीसदी बढ़त के साथ फिर पटरी पर आ गई है। पिछले दो सालों से सलाना कारोबार 60 करोड़ हो रहा है। जानकार इस बदलाव की वजह सेहत के प्रति जागरूकता, बच्चों की शारीरिक गतिविधि बढ़ाने का विकल्प और पेट्रोल के दामों में आए बेतहाशा उछाल को मानते हैं।
बरेली शहर के कुतुबखाना, घंटाघर रोड, इस्लामिया मार्केट, चौकी चौराहा, सिविल लाइंस, नकटिया, राजेंद्रनगर, इज्जतनगर आदि इलाकों में साइकिल की करीब 42 दुकानें थीं। वर्ष 2020 से पहले साइकिल की मांग लगातार घटती रही। बिक्री में 22 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। लिहाजा, अलग-अलग इलाकों की करीब 12 दुकानों पर ताला लग गया। इस दरम्यान जो नई दुकानें खुलीं वे भी लंबे समय तक कारोबार नहीं कर सकीं। एक्सपोर्ट और स्टैंडर्ड श्रेणी की साइकिलों की मांग में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई थी। उस वक्त बाजार संभलने के आसार भी बेहद कम ही लग रहे थे।
इस्लामिया मार्केट के साइकिल विक्रेता विनय अग्रवाल के मुताबिक कोरोना महामारी ने लोगों को सेहत के प्रति जागरूक किया। लिहाजा, बच्चे और उम्रदराज सभी का रुझान साइकिलिंग के प्रति बढ़ा। साल 2021 में साइकिल बाजार में पिछले कई सालों की मंदी का सिलसिला टूट गया। गिरावट पर अंकुश लगने के साथ ही नुकसान की भरपाई होने लगी। साइकिलों की बिक्री में आई तेजी अब भी जारी है।
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प्रीमियम और किड्स साइकिल की मांग अधिक
साइकिल इंडस्ट्री चार श्रेणी स्टैंडर्ड, प्रीमियम, किड्स और एक्सपोर्ट में है। महामारी ने सेहत और एक्सरसाइज के लिए साइकिल की मांग को बढ़ाया। साइकिल की बिक्री में प्रीमियम और किड्स की मांग 30 से बढ़कर 50 फीसदी तक पहुंच गई है। वहीं, सामान्य साइकिल (स्टैंडर्ड) की मांग में अब भी कोई खास सुधार नहीं हो सका है। शहर समेत बरेली जिले में बड़ी दुकानों की तादाद करीब 50 है। प्रतिदिन करीब तीन सौ साइकिल की बिक्री होती है। औसतन छह हजार रुपये प्रति साइकिल की दर से प्रतिमाह पांच करोड़ और सालाना 60 करोड़ का कारोबार हो रहा है।
गांवों से ज्यादा शहरों में दौड़ने लगी साइकिल
ग्रामीण इलाकों से साइकिल की खरीदारी का स्तर सामान्य ही है पर महामारी के बाद शहरी क्षेत्रों में अप्रत्याशित बढ़त दर्ज की गई। सार्वजनिक जगहों, शॉपिंग मॉल, जिम जाने से बचने वाले लोगों को फिटनेस के प्रति जागरूकता साइकिल की ओर ले गई। ज्यादातर प्रीमियम यानी रेंजर साइकिल की बिक्री हुई। हालांकि, गियर वाली साइकिल से लोग दूरी बनाए हुए हैं। बच्चों के लिए गियर वाली साइकिल की मांग है। एसेंबल और हेवी वेट साइकिल की मांग कम हुई है।
साइकिल चलाने के कई फायदे
- साइकिल चलाने से नकारात्मक विचार कम आते हैं।
- शारीरिक संतुलन और दिमाग स्वस्थ रहता है।
- शुगर, बीपी, हृदय रोग की आशंका कम होती है।
- साइकिल चलाने की मुद्रा, चक्रीय गति से पीठ दर्द से राहत मिलती है।
- रक्तप्रवाह बढ़ने से ऑक्सीजन सैचुरेशन में सुधार होता है।
- 30 मिनट तक साइकिलिंग से तीन सौ कैलोरी बर्न होती है।
- अंगों की सक्रियता बढ़ती है, शारीरिक गतिविधि में सुधार होता है।
- पर्यावरण संरक्षण के साथ ही, ईंधन पर धन खर्च की बचत होती है।
साइकिलिंग से बढ़ती है दर्द सहने की शक्ति
ग्रेटर ग्रीन पार्क के रहने वाले 73 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रो. एके शर्मा प्रतिदिन पांच किमी. साइकिल चलाते हैं। जरूरत पड़ने पर घर के काम भी वह साइकिल से ही निपटाते हैं। बताया कि इस आयु में साइकिल चलाने से घुटनों के दर्द, कमर दर्द के राहत मिलती है। सहनशक्ति भी बढ़ती है। शारीरिक गतिविधि बने रहने से थकावट का एहसास भी नहीं होता। उन्होंने दूसरों से भी साइकिलिंग की अपील की है।
फिर चोट के दर्द की दवा बनी साइकिल
महानगर के रहने वाले 42 वर्षीय वैभव चौधरी को करीब सात साल पहले कमर में चोट लग गई थी। बेतहाशा दर्द से निजात के लिए काफी इलाज कराया पर खास फायदा नहीं हुआ। वैभव के मुताबिक चिकित्सक के सुझाव पर उन्होंने साइकिल चलाना शुरू किया। इस से काफ ी फर्क पड़ा। दर्द से राहत के साथ ही, शारीरिक सक्रियता भी बढ़ी। प्रतिदिन करीब पांच किमी. साइकिल चलाते हैं।
परिसर को प्रदूषण से मुक्त रखना जरूरी
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के सुरक्षा प्रभारी सुधांशू प्रतिदिन सुबह और शाम पूरे परिसर का साइकिल से ही भ्रमण कर जायजा लेते हैं। 52 वर्षीय सुधांशू बताते हैं कि दस साल की आयु में उन्होंने साइकिल चलाना सीखा। तब से अब तक प्रतिदिन वह सुबह और शाम साइकिल चला रहे हैं। कहा कि इससे व्यायाम की जरूरत नहीं होती। प्रदूषण मुक्त परिसर बनाने में मदद मिलती है।
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बरेली शहर के कुतुबखाना, घंटाघर रोड, इस्लामिया मार्केट, चौकी चौराहा, सिविल लाइंस, नकटिया, राजेंद्रनगर, इज्जतनगर आदि इलाकों में साइकिल की करीब 42 दुकानें थीं। वर्ष 2020 से पहले साइकिल की मांग लगातार घटती रही। बिक्री में 22 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। लिहाजा, अलग-अलग इलाकों की करीब 12 दुकानों पर ताला लग गया। इस दरम्यान जो नई दुकानें खुलीं वे भी लंबे समय तक कारोबार नहीं कर सकीं। एक्सपोर्ट और स्टैंडर्ड श्रेणी की साइकिलों की मांग में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई थी। उस वक्त बाजार संभलने के आसार भी बेहद कम ही लग रहे थे।
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इस्लामिया मार्केट के साइकिल विक्रेता विनय अग्रवाल के मुताबिक कोरोना महामारी ने लोगों को सेहत के प्रति जागरूक किया। लिहाजा, बच्चे और उम्रदराज सभी का रुझान साइकिलिंग के प्रति बढ़ा। साल 2021 में साइकिल बाजार में पिछले कई सालों की मंदी का सिलसिला टूट गया। गिरावट पर अंकुश लगने के साथ ही नुकसान की भरपाई होने लगी। साइकिलों की बिक्री में आई तेजी अब भी जारी है।
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प्रीमियम और किड्स साइकिल की मांग अधिक
साइकिल इंडस्ट्री चार श्रेणी स्टैंडर्ड, प्रीमियम, किड्स और एक्सपोर्ट में है। महामारी ने सेहत और एक्सरसाइज के लिए साइकिल की मांग को बढ़ाया। साइकिल की बिक्री में प्रीमियम और किड्स की मांग 30 से बढ़कर 50 फीसदी तक पहुंच गई है। वहीं, सामान्य साइकिल (स्टैंडर्ड) की मांग में अब भी कोई खास सुधार नहीं हो सका है। शहर समेत बरेली जिले में बड़ी दुकानों की तादाद करीब 50 है। प्रतिदिन करीब तीन सौ साइकिल की बिक्री होती है। औसतन छह हजार रुपये प्रति साइकिल की दर से प्रतिमाह पांच करोड़ और सालाना 60 करोड़ का कारोबार हो रहा है।
गांवों से ज्यादा शहरों में दौड़ने लगी साइकिल
ग्रामीण इलाकों से साइकिल की खरीदारी का स्तर सामान्य ही है पर महामारी के बाद शहरी क्षेत्रों में अप्रत्याशित बढ़त दर्ज की गई। सार्वजनिक जगहों, शॉपिंग मॉल, जिम जाने से बचने वाले लोगों को फिटनेस के प्रति जागरूकता साइकिल की ओर ले गई। ज्यादातर प्रीमियम यानी रेंजर साइकिल की बिक्री हुई। हालांकि, गियर वाली साइकिल से लोग दूरी बनाए हुए हैं। बच्चों के लिए गियर वाली साइकिल की मांग है। एसेंबल और हेवी वेट साइकिल की मांग कम हुई है।
साइकिल चलाने के कई फायदे
- साइकिल चलाने से नकारात्मक विचार कम आते हैं।
- शारीरिक संतुलन और दिमाग स्वस्थ रहता है।
- शुगर, बीपी, हृदय रोग की आशंका कम होती है।
- साइकिल चलाने की मुद्रा, चक्रीय गति से पीठ दर्द से राहत मिलती है।
- रक्तप्रवाह बढ़ने से ऑक्सीजन सैचुरेशन में सुधार होता है।
- 30 मिनट तक साइकिलिंग से तीन सौ कैलोरी बर्न होती है।
- अंगों की सक्रियता बढ़ती है, शारीरिक गतिविधि में सुधार होता है।
- पर्यावरण संरक्षण के साथ ही, ईंधन पर धन खर्च की बचत होती है।
साइकिलिंग से बढ़ती है दर्द सहने की शक्ति
ग्रेटर ग्रीन पार्क के रहने वाले 73 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रो. एके शर्मा प्रतिदिन पांच किमी. साइकिल चलाते हैं। जरूरत पड़ने पर घर के काम भी वह साइकिल से ही निपटाते हैं। बताया कि इस आयु में साइकिल चलाने से घुटनों के दर्द, कमर दर्द के राहत मिलती है। सहनशक्ति भी बढ़ती है। शारीरिक गतिविधि बने रहने से थकावट का एहसास भी नहीं होता। उन्होंने दूसरों से भी साइकिलिंग की अपील की है।
फिर चोट के दर्द की दवा बनी साइकिल
महानगर के रहने वाले 42 वर्षीय वैभव चौधरी को करीब सात साल पहले कमर में चोट लग गई थी। बेतहाशा दर्द से निजात के लिए काफी इलाज कराया पर खास फायदा नहीं हुआ। वैभव के मुताबिक चिकित्सक के सुझाव पर उन्होंने साइकिल चलाना शुरू किया। इस से काफ ी फर्क पड़ा। दर्द से राहत के साथ ही, शारीरिक सक्रियता भी बढ़ी। प्रतिदिन करीब पांच किमी. साइकिल चलाते हैं।
परिसर को प्रदूषण से मुक्त रखना जरूरी
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के सुरक्षा प्रभारी सुधांशू प्रतिदिन सुबह और शाम पूरे परिसर का साइकिल से ही भ्रमण कर जायजा लेते हैं। 52 वर्षीय सुधांशू बताते हैं कि दस साल की आयु में उन्होंने साइकिल चलाना सीखा। तब से अब तक प्रतिदिन वह सुबह और शाम साइकिल चला रहे हैं। कहा कि इससे व्यायाम की जरूरत नहीं होती। प्रदूषण मुक्त परिसर बनाने में मदद मिलती है।