{"_id":"9d687e89fc731c0e0f09e15dabd9e0d8","slug":"sterilization-failure-compensation-order-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नसबंदी फेल होने पर क्षतिपूर्ति का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नसबंदी फेल होने पर क्षतिपूर्ति का आदेश
बरेली
Updated Tue, 09 Feb 2016 01:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नसबंदी के बाद भी बच्चा होने के एक मामले में स्थायी लोक अदालत ने सीएमओ और पीएचसी प्रभारी को 60 हजार रुपये अदा करने का आदेश दिया है।
फतेहगंज पश्चिमी के गांव धन्तिया निवासी तौफीकन ने स्थायी लोक अदालत में पीएचसी के प्रभारी चिकित्सक व मुख्य चिकित्साधिकारी के खिलाफ परिवाद दायर किया था। इसमें कहा गया है कि उसके पांच संतानें हैं। अन्य किसी संतान का भरण-पोषण करने में असमर्थ होने पर उसने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, फतेहगंज पश्चिमी पर 20 मार्च, 2009 को लूप विधि से नसबंदी कराई थी। सितंबर, 2014 में परीक्षण कराने पर गर्भवती होने की जानकारी मिली। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व जिला अस्पताल के चक्कर लगाने के बाद भी उसे कोई उचित परामर्श या मदद नहीं दी गई। 12 मई, 2015 को उसने शिशु को जन्म दिया। चिकित्सकों की लापरवाही से छठी संतान पालने में असमर्थ होने के कारण नोटिस दिया, लेकिन उसे क्षतिपूर्ति नहीं दी गई। इस पर उसने परिवाद दायर किया। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्र, वरिष्ठ सदस्य चंद्रप्रकाश अरोरा व शशिबाला सक्सेना ने इसे चिकित्सकों की स्पष्ट लापरवाही मानते हुए दो माह के भीतर 60 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। निर्धारित समय में धनराशि अदा न करने पर सात प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।
विज्ञापन
फतेहगंज पश्चिमी के गांव धन्तिया निवासी तौफीकन ने स्थायी लोक अदालत में पीएचसी के प्रभारी चिकित्सक व मुख्य चिकित्साधिकारी के खिलाफ परिवाद दायर किया था। इसमें कहा गया है कि उसके पांच संतानें हैं। अन्य किसी संतान का भरण-पोषण करने में असमर्थ होने पर उसने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, फतेहगंज पश्चिमी पर 20 मार्च, 2009 को लूप विधि से नसबंदी कराई थी। सितंबर, 2014 में परीक्षण कराने पर गर्भवती होने की जानकारी मिली। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व जिला अस्पताल के चक्कर लगाने के बाद भी उसे कोई उचित परामर्श या मदद नहीं दी गई। 12 मई, 2015 को उसने शिशु को जन्म दिया। चिकित्सकों की लापरवाही से छठी संतान पालने में असमर्थ होने के कारण नोटिस दिया, लेकिन उसे क्षतिपूर्ति नहीं दी गई। इस पर उसने परिवाद दायर किया। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्र, वरिष्ठ सदस्य चंद्रप्रकाश अरोरा व शशिबाला सक्सेना ने इसे चिकित्सकों की स्पष्ट लापरवाही मानते हुए दो माह के भीतर 60 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। निर्धारित समय में धनराशि अदा न करने पर सात प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।