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स्टॉफ नर्स और हेल्थ विजिटर को हटाया, वेतन रोका
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Thu, 05 May 2016 01:04 AM IST
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सीएमओ की टीम पहुंची भोजीपुरा सीएचसी
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भोजीपुरा पीएचएचसी में परेवा मोहम्मद अली गांव की गर्भवती किरन को भर्ती न करने के मामले में प्रथम दृष्टया मौके पर मौजूद स्टॉफ नर्स प्रियंका सक्सेना और हेल्थ विजिटर शांता दताल को दोषी पाया गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विजय यादव ने दोनों का तबादला करने के आदेश जारी कर दिए हैं। साथ ही वेतन रोकने और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भी लिखा है।
बुधवार को सड़क पर प्रसव से खलबली मचने पर सीएमओ डॉ. विजय यादव ने दो सदस्यीय टीम को जांच सौंपी। बुधवार को एसीएमओ डॉ. मनोहर लाल और डॉ. एसएस चौहान पीएचसी भोजीपुरा पहुंचे। उन्होंने स्टाफ से पूछताछ की और बयान दर्ज किए। जो रिपोर्ट बनाई गई है उसमें प्रथम दृष्टया स्टॉफ नर्स और हेल्थ विजिटर को दोषी पाया गया। किसी भी हालत में प्रसूता को अस्पताल में भर्ती न करना उनका दोष बताया गया है। हालांकि अभी तक पैसे मांगने की बात साबित नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है पीएचसी पर तैनात स्टॉफ काफी समय से यहां तैनात है। आशा भी इनकी शिकायत करती आई हैं।
प्रसूता से लगवाया सादे कागज पर अंगूठा, बयान बदलने की कोशिश
पीएचसी के स्टॉफ की कारस्तानी
प्रसूता की इलाज में लापरवाही और पैसे मांगने वाले कथित स्टॉफ ने पूरे सीन को अपने ढंग से बदलने की कोशिश शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि बुधवार को प्रसूता के गांव परेवा मोहम्मद अली पहुंची पीएचसी की टीम ने प्रसूता के पति रामपाल से पैसे मांगने को झूठा बताकर अंगूठा लगवाने की कोशिश की गई, लेकिन रामपाल ने मना कर दिया। रामपाल के न होने पर प्रसूता से बयान के कागज पर अंगूठा लगवाया गया है।
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महिला को अस्पताल से भगाने वाली भोजीपुरा पीएचसी की टीम ने बुधवार को प्रसूता के घर पहुंचकर जच्चा- बच्चा का टीकाकरण किया। गांव के प्रधान ने प्रसूता किरन के पति रामपाल के बयान दर्ज किए। बयान दर्ज करने के बाद रामपाल ने अंगूठा नहीं लगाया। बताया जा रहा है कि कागज पर लिखा था कि किसी ने पैसे नहीं मांगे। जबकि रामपाल इस बात पर अड़ा रहा कि स्टॉफ द्वारा पैसे मांगे गए। आरोप है कि किसी नर्स ने एक कोरे कागज पर प्रसूता का अंगूठा जबरन लगवा लिया। जबकि पीएचसी प्रभारी इस बात को नकार रहे हैं। उनका कहना है कि बयान प्रधान और गांव वालाें के सामने लिए गए हैं।
बयान गांव के प्रधान और करीब 20 से 25 लोगाें के सामने लिए गए हैं। रामपाल मौके पर नहीं थे इसलिए बयान पर अंगूठा रामपाल के नहीं बल्कि उसकी पत्नी किरन के हैं।
डॉ. सौरभ सिंह, प्रभारी, पीएचसी
रामपाल बोलता रहा और मैं लिखता रहा। बयान पर मेरे हस्ताक्षर और मोहर है। रामपाल ने अंगूठा नहीं लगाया वह भाग गया। गांव के लोग, डॉक्टर और आशा सभी रामपाल के घर गए। वहां उसकी पत्नी किरन ने अंगूठा लगाया है।
-प्यारेलाल गंगवार, प्रधान
कैच वर्ड सीएचसी, पीएचसी का खेल
हाई रिस्क गर्भवती को जानते हैं, लेकिन फिर भी नहीं भेजते
पैसे बनाने के चक्कर में महिलाओं को अंतिम समय में करते हैं रिफर
बरेली। सरकार माताआें और बच्चों की सेहत के लिए परेशान हैं और स्वास्थ्य विभाग के कर्मी इस पर पलीता लगा रहे हैं। अभियान चलाकर हाईरिस्क महिलाआें को चिह्नित किया गया। ऐसी महिलाआें को पहचानने के बाद ही जिला महिला अस्पताल में भेजा जाना था लेकिन सीएचसी और पीएचसी पर अमूमन ऐसा नहीं हो रहा है। रामपाल की पत्नी किरन का हीमोग्लोबिन जांच करने के बाद भी उसे हाईरिस्क में जानकर बरेली रिफर किया गया था तो वे उसे पहले ही बता सकते थे। लेकिन अंतिम समय तक टरकाते रहे।
भोजीपुरा में ही एक साल मे 106 केस जिला अस्पताल के लिए रेफ र किए गये। अप्रैल में अकेले 14 केस रिफर हैं। मार्च में 189 और अप्रैल में 176 प्रसव के केस हुए। पांच फरवरी 2015 से 3 मई 2016 तक 106 केस रेफर हुए। जिला महिला अस्पताल की डॉक्टराें ने बताया कि सीएचसी और पीएचसी के अधिकतर मरीज यहां रेफर होकर आ जाते हैं। इनमें से अधिकतर की हालत गंभीर ही रहती है। डॉ. शशि कहती हैं कि सीएचसी और पीएचसी पर पहले से ही हाईरिस्क की गर्भवती महिलाआें को चिह्नित कर लिया जाता है लेकिन फिर भी वे इन्हें वहीं संभालते हैं। जबकि इन्हें महिला अस्पताल भेज देना चाहिए। हाईरिस्क में थायराइड, बीपी, शुगर, पहले से हो चुका आपरेशन, पोलियो और हीमोग्लोबिन कम की गर्भवती महिलाआें को इसमें शामिल किया गया है। डॉ. शशि के अनुसार आशा और स्वास्थ्य केंद्रों की स्टॉफ नर्स को भी पता है कि हाईरिस्क की महिलाआें को तुरंत भेजना चाहिए।
तो 108 वालों ने भी मांगे पैसे
भोजीपुरा। प्रसूता को सीएचसी से भगाने के मामले में 108 एंबुलेंस चालकाें पर भी पैसे मांगने के आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि बरेली रिफर करने की बात पर एंबुलेंस चालकाें ने भी पैसे मांगे थे, इसलिए भी रामपाल अपनी पत्नी को किसी अन्य साधन से घर ले जा रहा था। हालांकि इसे पीएचसी के स्टॉफ को बचाने की एक कोशिश भी बताई जा रही है क्याेंकि प्रसूता की चाची सुनीता और पति रामपाल ने कहा कि उनसे एक लेडी ने पांच सौ रुपये मांगे थे।
फरीदपुर में भी दबाए बैठे हैं जननी सुरक्षा का पैसा
सीएमओ ने फटकार लगाई, तबादले की चेतावनी
फरीदपुर। यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी जननी सुरक्षा योजना का लाभ पात्रों को नहीं मिल रहा है। प्रसव के छह महीने बाद तक लाभार्थियों के खाते में धनराशि जमा नहीं हो पाई है। इसकी पोल बुधवार को तब खुली जब सीएमओ डॉ. विजय यादव सीएचसी के निरीक्षण में पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों को फटकार लगाते हुए दूरस्थ तबादले की चेतावनी भी दी।
सीएमओ विजय यादव बुधवार अपराह्न अचानक सीएचसी पहुंचे। जननी सुरक्षा योजना की प्रगति पर नाराजगी जताते हुए किा कि महिला के डिस्चार्ज होते ही धनराशि दे देनी चाहिए थी। अब जल्द वितरण नहीं हुआ तो कार्रवाई होगी। इसकी रिपोर्ट भी रोज देनी होगी। उन्होंने बीएच मीरा सागर की शिकायतों पर भी फटकार लगाई। तबादला करने हिदायत देते हुए कहा कि किसी नेता की सिफारिश नहीं मानेंगे। अस्पताल की सफाई और आवारा कुत्तों को परिसर से बाहर करने को भी कहा।
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बुधवार को सड़क पर प्रसव से खलबली मचने पर सीएमओ डॉ. विजय यादव ने दो सदस्यीय टीम को जांच सौंपी। बुधवार को एसीएमओ डॉ. मनोहर लाल और डॉ. एसएस चौहान पीएचसी भोजीपुरा पहुंचे। उन्होंने स्टाफ से पूछताछ की और बयान दर्ज किए। जो रिपोर्ट बनाई गई है उसमें प्रथम दृष्टया स्टॉफ नर्स और हेल्थ विजिटर को दोषी पाया गया। किसी भी हालत में प्रसूता को अस्पताल में भर्ती न करना उनका दोष बताया गया है। हालांकि अभी तक पैसे मांगने की बात साबित नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है पीएचसी पर तैनात स्टॉफ काफी समय से यहां तैनात है। आशा भी इनकी शिकायत करती आई हैं।
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प्रसूता से लगवाया सादे कागज पर अंगूठा, बयान बदलने की कोशिश
पीएचसी के स्टॉफ की कारस्तानी
प्रसूता की इलाज में लापरवाही और पैसे मांगने वाले कथित स्टॉफ ने पूरे सीन को अपने ढंग से बदलने की कोशिश शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि बुधवार को प्रसूता के गांव परेवा मोहम्मद अली पहुंची पीएचसी की टीम ने प्रसूता के पति रामपाल से पैसे मांगने को झूठा बताकर अंगूठा लगवाने की कोशिश की गई, लेकिन रामपाल ने मना कर दिया। रामपाल के न होने पर प्रसूता से बयान के कागज पर अंगूठा लगवाया गया है।
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महिला को अस्पताल से भगाने वाली भोजीपुरा पीएचसी की टीम ने बुधवार को प्रसूता के घर पहुंचकर जच्चा- बच्चा का टीकाकरण किया। गांव के प्रधान ने प्रसूता किरन के पति रामपाल के बयान दर्ज किए। बयान दर्ज करने के बाद रामपाल ने अंगूठा नहीं लगाया। बताया जा रहा है कि कागज पर लिखा था कि किसी ने पैसे नहीं मांगे। जबकि रामपाल इस बात पर अड़ा रहा कि स्टॉफ द्वारा पैसे मांगे गए। आरोप है कि किसी नर्स ने एक कोरे कागज पर प्रसूता का अंगूठा जबरन लगवा लिया। जबकि पीएचसी प्रभारी इस बात को नकार रहे हैं। उनका कहना है कि बयान प्रधान और गांव वालाें के सामने लिए गए हैं।
बयान गांव के प्रधान और करीब 20 से 25 लोगाें के सामने लिए गए हैं। रामपाल मौके पर नहीं थे इसलिए बयान पर अंगूठा रामपाल के नहीं बल्कि उसकी पत्नी किरन के हैं।
डॉ. सौरभ सिंह, प्रभारी, पीएचसी
रामपाल बोलता रहा और मैं लिखता रहा। बयान पर मेरे हस्ताक्षर और मोहर है। रामपाल ने अंगूठा नहीं लगाया वह भाग गया। गांव के लोग, डॉक्टर और आशा सभी रामपाल के घर गए। वहां उसकी पत्नी किरन ने अंगूठा लगाया है।
-प्यारेलाल गंगवार, प्रधान
कैच वर्ड सीएचसी, पीएचसी का खेल
हाई रिस्क गर्भवती को जानते हैं, लेकिन फिर भी नहीं भेजते
पैसे बनाने के चक्कर में महिलाओं को अंतिम समय में करते हैं रिफर
बरेली। सरकार माताआें और बच्चों की सेहत के लिए परेशान हैं और स्वास्थ्य विभाग के कर्मी इस पर पलीता लगा रहे हैं। अभियान चलाकर हाईरिस्क महिलाआें को चिह्नित किया गया। ऐसी महिलाआें को पहचानने के बाद ही जिला महिला अस्पताल में भेजा जाना था लेकिन सीएचसी और पीएचसी पर अमूमन ऐसा नहीं हो रहा है। रामपाल की पत्नी किरन का हीमोग्लोबिन जांच करने के बाद भी उसे हाईरिस्क में जानकर बरेली रिफर किया गया था तो वे उसे पहले ही बता सकते थे। लेकिन अंतिम समय तक टरकाते रहे।
भोजीपुरा में ही एक साल मे 106 केस जिला अस्पताल के लिए रेफ र किए गये। अप्रैल में अकेले 14 केस रिफर हैं। मार्च में 189 और अप्रैल में 176 प्रसव के केस हुए। पांच फरवरी 2015 से 3 मई 2016 तक 106 केस रेफर हुए। जिला महिला अस्पताल की डॉक्टराें ने बताया कि सीएचसी और पीएचसी के अधिकतर मरीज यहां रेफर होकर आ जाते हैं। इनमें से अधिकतर की हालत गंभीर ही रहती है। डॉ. शशि कहती हैं कि सीएचसी और पीएचसी पर पहले से ही हाईरिस्क की गर्भवती महिलाआें को चिह्नित कर लिया जाता है लेकिन फिर भी वे इन्हें वहीं संभालते हैं। जबकि इन्हें महिला अस्पताल भेज देना चाहिए। हाईरिस्क में थायराइड, बीपी, शुगर, पहले से हो चुका आपरेशन, पोलियो और हीमोग्लोबिन कम की गर्भवती महिलाआें को इसमें शामिल किया गया है। डॉ. शशि के अनुसार आशा और स्वास्थ्य केंद्रों की स्टॉफ नर्स को भी पता है कि हाईरिस्क की महिलाआें को तुरंत भेजना चाहिए।
तो 108 वालों ने भी मांगे पैसे
भोजीपुरा। प्रसूता को सीएचसी से भगाने के मामले में 108 एंबुलेंस चालकाें पर भी पैसे मांगने के आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि बरेली रिफर करने की बात पर एंबुलेंस चालकाें ने भी पैसे मांगे थे, इसलिए भी रामपाल अपनी पत्नी को किसी अन्य साधन से घर ले जा रहा था। हालांकि इसे पीएचसी के स्टॉफ को बचाने की एक कोशिश भी बताई जा रही है क्याेंकि प्रसूता की चाची सुनीता और पति रामपाल ने कहा कि उनसे एक लेडी ने पांच सौ रुपये मांगे थे।
फरीदपुर में भी दबाए बैठे हैं जननी सुरक्षा का पैसा
सीएमओ ने फटकार लगाई, तबादले की चेतावनी
फरीदपुर। यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी जननी सुरक्षा योजना का लाभ पात्रों को नहीं मिल रहा है। प्रसव के छह महीने बाद तक लाभार्थियों के खाते में धनराशि जमा नहीं हो पाई है। इसकी पोल बुधवार को तब खुली जब सीएमओ डॉ. विजय यादव सीएचसी के निरीक्षण में पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों को फटकार लगाते हुए दूरस्थ तबादले की चेतावनी भी दी।
सीएमओ विजय यादव बुधवार अपराह्न अचानक सीएचसी पहुंचे। जननी सुरक्षा योजना की प्रगति पर नाराजगी जताते हुए किा कि महिला के डिस्चार्ज होते ही धनराशि दे देनी चाहिए थी। अब जल्द वितरण नहीं हुआ तो कार्रवाई होगी। इसकी रिपोर्ट भी रोज देनी होगी। उन्होंने बीएच मीरा सागर की शिकायतों पर भी फटकार लगाई। तबादला करने हिदायत देते हुए कहा कि किसी नेता की सिफारिश नहीं मानेंगे। अस्पताल की सफाई और आवारा कुत्तों को परिसर से बाहर करने को भी कहा।