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गोली चली तो वर्दी पर क्यों नहीं था निशान

Tue, 08 Dec 2015 02:01 AM IST
बरेली
बरेली Updated Tue, 08 Dec 2015 02:01 AM IST
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So why was not shot on the uniform mark
बरेली। फरीदपुर थाने में भाजपा के जांच दल में शामिल रिटायर डीजीपी ब्रजलाल और रिटायर आईजी उमानाथ सिंह ने घंटे भर तक दरोगा मनोज मिश्रा हत्याकांड की एफआईआर, विवेचना, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य रिकार्ड से संबंधित फाइलों की बारीकी से पड़ताल की। थाना कैंपस में मनोज के क्वार्टर का निरीक्षण किया। इसमें अब दूसरा दरोगा रह रहा है, इसलिए ताला तुड़वाकर वह क्वार्टर देखा। उसके पास स्थित एक अन्य कमरा देखा, जिसकी छत का मलबा नीचे गिरा हुआ था और कूड़ा भी पड़ा था। कमरे की हालत देखकर मनोज के पिता श्यामबिहारी मिश्रा बोले- पहले तो यह कमरा ठीक था फिर थाने के पुलिस कर्मियों से पूछा। यह कूड़ा क्यों डाल रखा है। इस पर किसी ने कोई जवाब नहीं दिया तो श्यामबिहारी ने एक और खुलासा करते हुए टीम को बताया- बेटे की वर्दी पर गोली का कोई निशान नहीं था, उसकी बनियान पर गोली का निशान था। इस पर टीम के सदस्यो ने आशंका जताई कि मनोज को यहां मारा गया हो और उसे वर्दी पहनाकर जो घटना स्थल बताया जा रहा है, वहां उसकी बाडी को ले लाया गया हो और दीवार पर खून के छीटे मिटाने के लिए यहां मलबा और कूड़ा डाल दिया गया।
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टीम ने फरीदपुर इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह से क्वार्टर दूसरे दरोगा को आवंटित करने पर भी सवाल उठाए। इसके बाद टीम के सदस्य थाने से लगभग चार-पांच किलोमीटर दूर बिदनापुर गांव में घटना स्थल देखने पहुंचे। इस दौरान उनके साथ विवेचक एके सिंह भी थे। यहां नहर के पास टीम के सदस्यों ने वह पेड़ भी देखा, पुलिस की कहानी के मुताबिक जिसकी आड़ में खड़े होकर मनोज ने बदमाशों से मोर्चा लिया था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी और रिटायर डीजीपी ब्रजलाल ने पेड़ को बारीकी से देखने के बाद कहा कि अगर यहां गोली लगी होती तो पेड़ पर इसका कोई निशान होता, लेकिन ऐसा नहीं है। इस बीच श्याम बिहारी ने कहा- यहां तो इतनी धूल मिट्टी पड़ी है लेकिन अगर मनोज यहां गिरते तो उनके शरीर पर यह धूलमिट्टी लगी होती लेकिन ऐसा नहीं था। उनके शरीर में गोली का कोई निशान नहीं था। टीम के साथ शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार, प्रदेश सचिव डॉ. अनूप गुप्ता, भाजपा के क्षेत्रीय संगठन मंत्री भवानी सिंह, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. श्यामबिहारी लाल, क्षेत्रीय अध्यक्ष बीएल वर्मा, जिलाध्यक्ष राजकुमार शर्मा, महानगर अध्यक्ष पुष्पेंदु शर्मा, गुलशन आनंद, महाराज सिंह, आदेश प्रताप सिंह, प्रशांत पटेल, छोटेलाल, बहोरनलाल मौर्य, हरिओम राठौर आदि प्रमुख रूप से रहे।
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नहीं आए सीओ
भाजपा की टीम के सदस्य जांच के दौरान थाने में सीओ मनोज पांडेय को बार-बार फोन करके बुलाते रहे लेकिन वह नहीं आए। उन्होंने बीमार होने और अस्पताल में दवा लेने आने की बात कही। लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने इस पर कहा कि इसका मतलब सीओ के पास कई राज हैं और उन्हें छुपाए रखने के लिए वह आने से बचे।
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जितेंद्र कौशल पर तीखी टिप्पणी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई ने दरोगा की हत्या के दौरान फरीदपुर थाने में कार्यरत रहे इंस्पेक्टर जितेंद्र कौशल पर तीखी टिप्पणी की। पत्रकारों से बोले- दरोगा मनोज गौकशी करने वालों से संघर्ष करते रहे लेकिन इंस्पेक्टर कन्वर्टेड मुस्लिम जितेंद्र कौशल की गौकशी करने वालों से सांठगांठ थी।

यूपी में आतंकवाद की जड़ें गहरी
रिटायर डीजीपी ब्रजलाल ने खुद को भाजपा कार्यकर्ता बताते हुए आरोप लगाया कि यूपी सरकार की नीतियां आतंकवादियों के प्रति कड़ी नहीं हैं। कई मामले ऐसे हुए हैं, जिनमें पुलिस अधिकारियों पर ही कार्रवाई हुई। सरकार के इसी रवैये की वजह से यूपी एटीएस लगभग विकलांग अवस्था में पहुंच गई है। ब्रजलाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आतंकवाद की जड़े बहुत गहरी हैं।



इंसेट...
टीम ने पुलिस की कहानी पर उठाए सवाल
-मौके पर मनोज सहित तीन एसआई, चार कांस्टेबल और एक होमगार्ड भेजे गए थे। इनके पास दो थ्री नाटथ्री, एक पिस्टल, एक रिवाल्वर और एक इंसास थी। पांच हथियार और आठ लोग थे लेकिन फिर भी पुलिस की कहानी के मुताबिक आठ लोगों ने मुठभेड़ में सिर्फ दो फायर ही क्यों किया। इतने हथियार होने के बावजूद भी सिर्फ दो फायर कैसे संभव है, जबकि बदमाशों की ओर से चार फायर हुए।
-गोली लगने के बाद दरोगा मनोज मिश्रा को फरीदपुर के ही किसी नर्सिंग होम में इलाज कराने के बजाय उन्हें सीधे भोजीपुरा क्यों ले जाया गया।
-तत्कालीन इंस्पेक्टर जितेंद्र कौशल इलाज के लिए दरोगा के साथ क्यों नहीं गए।
-पुलिस की रिपोर्ट कह रही है कि गोली लगने के बाद मनोज घटनास्थल पर गिर गए लेकिन उनके शरीर पर जरा भी मिट्टी, धूल क्यों नहीं थी।
-जिस पेड़ की मनोज ने पोजीशन ली थी, उसकी आड़ में उन्हें गोली लगनी बताई जा रही है तो पेड़ पर गोली का कोई निशान क्यों नहीं है।
-थाना अनियमितता के घेरे में नहीं है तो फिर क्यों फालोवर की एवजी में तीसरे व्यक्ति सुरक्षा का काम कर रहे हैं।
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