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एक और संवासिनी ने दम तोड़ा, एक गंभीर
बरेली
Updated Tue, 23 Feb 2016 02:19 AM IST
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बरेली। नारी निकेतन की एक और संवासिनी ने सोमवार को सुबह 10 बजे जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। जबकि एक अन्य की हालत गंभीर है। मरने वाली संवासिनी गंभीर एनीमिया से पीड़ित थी। इससे पहले भी कुछ दिन पहले एक संवासिनी की मौत हुई थी।
40 वर्षीय संवासिनी कई वर्षों से नारी निकेतन में रह रही थी। बोल और सुन न पाने के चलते उसकी कोई पहचान नहीं थी। खून की कमी और कमजोरी के चलते उसे 15 फरवरी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। संवासिनी को दो यूनिट खून भी चढ़ाया गया था। इलाज कर रहे डॉ. वागीश वैश्य के मुताबिक, महिला को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसे गंभीर एनीमिया थी। इसका कारण पोषण की कमी है।
- पहले भी मर चुकी हैं कई संवासिनियां
नारी निकेतन में रह रहीं कई संवासिनियां गंभीर एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित हैं। पिछले महीने भी आठ संवासिनियों को इस बीमारी से पीड़ित होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों द्वारा लगातार वहां की बदतर स्थिति में अवगत कराया गया है। जिला अस्पताल के एक डॉक्टर बताते हैं कि जब तक जिला अस्पताल में रहती हैं तो उन्हें खाने पर ध्यान दिया जाता है लेकिन शरणालय जाते ही स्थिति फिर बेकार हो जाती है।
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‘जिला अस्पताल के डॉक्टर संवासिनियों का चेकअप करते हैं, खाना भी चेक होता है। अगर कोई कमी है तो उसकी जानकारी नहीं मिली। मेरा काम मीनू चार्ट और बजट उपलब्ध कराना है बाकी व्यवस्था अधीक्षक की है। ’- ऊषा तिवारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी
हमारे डॉक्टर रिपोर्ट में खाने जिक्र नहीं करते। अब मैं भोजन की गुणवत्ता जांचने को कहूंगी। हालांकि रिपोर्ट में उनके परिसर और कमरों की बदतर स्थिति का जिक्र रहता है।
- परवीन जहां, सीएमएम
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40 वर्षीय संवासिनी कई वर्षों से नारी निकेतन में रह रही थी। बोल और सुन न पाने के चलते उसकी कोई पहचान नहीं थी। खून की कमी और कमजोरी के चलते उसे 15 फरवरी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। संवासिनी को दो यूनिट खून भी चढ़ाया गया था। इलाज कर रहे डॉ. वागीश वैश्य के मुताबिक, महिला को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसे गंभीर एनीमिया थी। इसका कारण पोषण की कमी है।
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- पहले भी मर चुकी हैं कई संवासिनियां
नारी निकेतन में रह रहीं कई संवासिनियां गंभीर एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित हैं। पिछले महीने भी आठ संवासिनियों को इस बीमारी से पीड़ित होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों द्वारा लगातार वहां की बदतर स्थिति में अवगत कराया गया है। जिला अस्पताल के एक डॉक्टर बताते हैं कि जब तक जिला अस्पताल में रहती हैं तो उन्हें खाने पर ध्यान दिया जाता है लेकिन शरणालय जाते ही स्थिति फिर बेकार हो जाती है।
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‘जिला अस्पताल के डॉक्टर संवासिनियों का चेकअप करते हैं, खाना भी चेक होता है। अगर कोई कमी है तो उसकी जानकारी नहीं मिली। मेरा काम मीनू चार्ट और बजट उपलब्ध कराना है बाकी व्यवस्था अधीक्षक की है। ’- ऊषा तिवारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी
हमारे डॉक्टर रिपोर्ट में खाने जिक्र नहीं करते। अब मैं भोजन की गुणवत्ता जांचने को कहूंगी। हालांकि रिपोर्ट में उनके परिसर और कमरों की बदतर स्थिति का जिक्र रहता है।
- परवीन जहां, सीएमएम