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Bareilly News: जमीन से जुड़े मामलों में दो दिन में छह सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों पर गिरी गाज
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जमीन से जुड़े प्रकरणों में गड़बड़ी करने पर शासन-प्रशासन के स्तर से 48 घंटे में छह अधिकारियों-कर्मचारियों पर गाज गिर चुकी है। पूरी कार्रवाई को मुख्यमंत्री के उस आदेश से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने जमीन पर कब्जे और इसमें संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के आदेश दिए गए थे।
शासन ने शुक्रवार को उपनिबंधक सदर प्रथम रवि प्रकाश वर्मा, कनिष्ठ सहायक तोषक राजन राजपूत व तत्कालीन कनिष्ठ सहायक शिवम मिश्रा को निलंबित किया था। आरोप है कि इन लोगों ने कोल्ड स्टोरेज की 20 बीघा जमीन की रजिस्ट्री फर्जी दस्तावेज के जरिये कर दी। प्रकरण में मॉडल टाउन निवासी विम्मी मदान ने शिकायत की थी और निबंधन विभाग के उक्त तीनों कर्मियों समेत 14 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। पूरे प्रकरण की जांच के बाद स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल की ओर से यह कार्रवाई की गई। सूत्र बताते हैं कि मामले में कुछ और लोग कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।
यह मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि रविवार को जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने नवाबगंज के तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह को पद से हटा दिया, जबकि कानूनगो श्याम सुंदर गुप्ता और लेखपाल रामचंद्र को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई भी जमीन से जुड़े प्रकरण में की गई। विभागीय जांच की भी संस्तुति की जा रही है। ताबड़तोड़ कार्रवाई से जमीन के सौदे से जुड़े दलालों और भूमाफिया में खलबली मची है।
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कोट
कानूनगो, लेखपाल व तहसीलदार की गलत रिपोर्ट के आधार पर दूसरे पक्ष को लाभ हुआ। अपर आयुक्त की ओर से जब कोई आदेश होता है तो उसकी प्रति अवर न्यायालय से होते हुए तहसीलदार तक पहुंचती है। इस मामले में आदेश की फोटो कॉपी के आधार पर ही खतौनी में वारिसान का नाम दर्ज कर दिया गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर तीनों पर कार्रवाई की गई है। - उदित पवार, उपजिलाधिकारी, नवाबगंज
बहेड़ी में तैनाती के दौरान भी तहसीलदार पर लगे थे आरोप
बहेड़ी तहसील में तैनाती के दौरान भी तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह पर आरोप लगे थे। बताते हैं कि इन्होंने माथुर रोड निवासी सीपी खंडूजा की जमीन के गाटा संख्या 182 को बगैर रजिस्टर्ड किए और तारीख डाले चुपचाप रिकॉर्ड में दाखिल खारिज करा दिया था। उन्हीं की दूसरी जमीन गाटा संख्या 157 में बगैर केस को रजिस्टर्ड किए तीन लोगों के नाम दाखिल खारिज के आदेश कर दिए थे। इस मामले में पीड़ित ने जिला प्रशासन से लेकर शासन और बोर्ड ऑफ रेवेन्यू तक शिकायत की थी। उन्होंने बताया था कि जिस जमीन का वाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है, उस पर किसी तरह का निर्णय लेने का अधिकार तहसीलदार को नहीं है। नियमों को ताक पर रखकर तहसीलदार ने अवैध रूप से दाखिल खारिज के आदेश किए हैं। मामले में जांच के आदेश हो चुके हैं। इसके अलावा सरकारी जमीन गाटा संख्या 17 में अवैध रूप से निर्माण कराने के आरोप भी तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह पर लगे थे। इसके बाद जिलाधिकारी ने उन्हें बहेड़ी से हटकर नवाबगंज का तहसीलदार बनाया था। इस पर भी कई सवाल खड़े हुए कि आरोपों से घिरे होने के बावजूद उन्हें एक तहसील से हटाकर दूसरी तहसील में समान पद पर कैसे भेज दिया गया।
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शासन ने शुक्रवार को उपनिबंधक सदर प्रथम रवि प्रकाश वर्मा, कनिष्ठ सहायक तोषक राजन राजपूत व तत्कालीन कनिष्ठ सहायक शिवम मिश्रा को निलंबित किया था। आरोप है कि इन लोगों ने कोल्ड स्टोरेज की 20 बीघा जमीन की रजिस्ट्री फर्जी दस्तावेज के जरिये कर दी। प्रकरण में मॉडल टाउन निवासी विम्मी मदान ने शिकायत की थी और निबंधन विभाग के उक्त तीनों कर्मियों समेत 14 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। पूरे प्रकरण की जांच के बाद स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल की ओर से यह कार्रवाई की गई। सूत्र बताते हैं कि मामले में कुछ और लोग कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।
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यह मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि रविवार को जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने नवाबगंज के तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह को पद से हटा दिया, जबकि कानूनगो श्याम सुंदर गुप्ता और लेखपाल रामचंद्र को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई भी जमीन से जुड़े प्रकरण में की गई। विभागीय जांच की भी संस्तुति की जा रही है। ताबड़तोड़ कार्रवाई से जमीन के सौदे से जुड़े दलालों और भूमाफिया में खलबली मची है।
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कानूनगो, लेखपाल व तहसीलदार की गलत रिपोर्ट के आधार पर दूसरे पक्ष को लाभ हुआ। अपर आयुक्त की ओर से जब कोई आदेश होता है तो उसकी प्रति अवर न्यायालय से होते हुए तहसीलदार तक पहुंचती है। इस मामले में आदेश की फोटो कॉपी के आधार पर ही खतौनी में वारिसान का नाम दर्ज कर दिया गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर तीनों पर कार्रवाई की गई है। - उदित पवार, उपजिलाधिकारी, नवाबगंज
बहेड़ी में तैनाती के दौरान भी तहसीलदार पर लगे थे आरोप
बहेड़ी तहसील में तैनाती के दौरान भी तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह पर आरोप लगे थे। बताते हैं कि इन्होंने माथुर रोड निवासी सीपी खंडूजा की जमीन के गाटा संख्या 182 को बगैर रजिस्टर्ड किए और तारीख डाले चुपचाप रिकॉर्ड में दाखिल खारिज करा दिया था। उन्हीं की दूसरी जमीन गाटा संख्या 157 में बगैर केस को रजिस्टर्ड किए तीन लोगों के नाम दाखिल खारिज के आदेश कर दिए थे। इस मामले में पीड़ित ने जिला प्रशासन से लेकर शासन और बोर्ड ऑफ रेवेन्यू तक शिकायत की थी। उन्होंने बताया था कि जिस जमीन का वाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है, उस पर किसी तरह का निर्णय लेने का अधिकार तहसीलदार को नहीं है। नियमों को ताक पर रखकर तहसीलदार ने अवैध रूप से दाखिल खारिज के आदेश किए हैं। मामले में जांच के आदेश हो चुके हैं। इसके अलावा सरकारी जमीन गाटा संख्या 17 में अवैध रूप से निर्माण कराने के आरोप भी तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह पर लगे थे। इसके बाद जिलाधिकारी ने उन्हें बहेड़ी से हटकर नवाबगंज का तहसीलदार बनाया था। इस पर भी कई सवाल खड़े हुए कि आरोपों से घिरे होने के बावजूद उन्हें एक तहसील से हटाकर दूसरी तहसील में समान पद पर कैसे भेज दिया गया।