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समान नागरिक संहिता के खिलाफ दिखाई एकजुटता
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Sat, 22 Oct 2016 12:51 AM IST
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समान नागरिक संहिता और तीन तलाक में बदलावों की तैयारी के खिलाफ सुन्नी सूफी संगठनों ने संयुक्त रूप से बाकरगंज स्थित ईदगाह पर शुक्रवार को प्रदर्शन किया। उलमा ने इसे केंद्र सरकार का शरीयत में हस्तक्षेप मानते हुए इसे मानने से इंकार कर दिया। इसके साथ ही ऑल इंडिया जमात रजा मुस्तफा, तंजीम उलमा-ए- इस्लाम दिल्ली व रजा एकेडमी मुंबई की ओर से देशभर में आंदोलन का एलान किया गया। धर्मगुरुओं ने बताया कि इसके बाद बहराइच लखनऊ सहित देश के तमाम शहरों में प्रदर्शन किया जाएगा। अगले माह 18 नवंबर को दिल्ली में संसद मार्च की भी घोषणा की गई।
इस मौके पर सभा की सरपरस्ती करते हुए शहजादे ताजुश्शरिया शहर काजी मौलाना असजद रजा खां कादरी ने कहा कि देश आरएसएस के एजेंडे पर नहीं चलेगा। मुसलमान अपने निजी कानून को मानने के लिए राजी हैं। जिन महिलाओं या पुरुषों को भी तलाक से जुड़े मसलों पर आवश्यक हो तो आदालत की शरण लेनी पड़ती है और न्यायालय के फैसले का सभी सम्मान करते हैं। जबसे केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आई है वह लगातार मुसलमानों के जज्बात से खेल रही है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी और भाजपा देश को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे पर धकेलना की कोशिश कर रही जिसे नाकाम किया जाएगा।
मौलाना असजद ने कहा कि तीन तलाक का मामला उठाना पर्सनल लॉ मेें हस्तक्षेप है। कुरान या अहकाम में बदलाव नहीं हो सकता। जहां तक समान नागरिक संहिता की बात है तो संविधान के आर्टिकल 44 को भी भाजपा और आरएसएस के लोग गलत रूप से प्रस्तुत कर रहे हैं।
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जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबउद्दीन रजवी ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार शरीयत में यदि किसी प्रकार का दखल देगी तो उसकी कड़ी मुखालफत होगी। इसका जवाब भी उत्तर प्रदेश के चुनाव में मुसलमान, दलित और सेकुलर हिंदू देगा। उन्होंने कहा कि जब हर संप्रदाय और मजहब के लोगों को अपनी निजी संहिता, पुस्तकों, आस्था, विश्वास और परंपरा के अनुसार नागरिक कानून मानने की छूट है तो सिर्फ मुसलमानों के तलाक के मसले पर ही क्यों लगी हुई है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक या समान नगरिकता संहिता के बहाने देश के मुसलमान सांप्रदायिक ध्रुवीकरण नहीं होने देंगे।
ऑल इंडिया तंजीम उलमा-ए-इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुफ्ती अशफाक हुसैन कादरी ने कहा कि भारत के लॉ कमीशन, कानून मंत्रालय या मोदी सरकार को मुसलमानों के निजी कानून में दखल का कोई अधिकार नहीं है। तलाक का मुद्दा एक घिनौना खेल है। समान नागरिक संहिता लाकर केंद्र सरकार हिंदुस्तान की जड़ें खोदना चाहती है।
उन्होंने कहा कि तलाक को लेकर मुस्लिम औरतों से इतनी मोहब्बत क्यों हो गई। अगर है तो बच्चियों के तालीम की बात करें, दंगों में जो मर्द मारे गए हैं उनकी औरतों के बारे में सोचें। अगर औरत का हक देना है तो पहले मोदी यशोदा बेन को जायज हक दें। इसी तरह मौलाना तौकीर अहमद, मौलाना जाहिद उल्ला, हाफिज मसरूर अहमद, हाफिज अब्दुल वाहिद, वसी अहमद ने संबोधित किया। संचालन मौलाना फारूख हुसैन शम्सी ने किया।
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इस मौके पर सभा की सरपरस्ती करते हुए शहजादे ताजुश्शरिया शहर काजी मौलाना असजद रजा खां कादरी ने कहा कि देश आरएसएस के एजेंडे पर नहीं चलेगा। मुसलमान अपने निजी कानून को मानने के लिए राजी हैं। जिन महिलाओं या पुरुषों को भी तलाक से जुड़े मसलों पर आवश्यक हो तो आदालत की शरण लेनी पड़ती है और न्यायालय के फैसले का सभी सम्मान करते हैं। जबसे केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आई है वह लगातार मुसलमानों के जज्बात से खेल रही है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी और भाजपा देश को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे पर धकेलना की कोशिश कर रही जिसे नाकाम किया जाएगा।
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मौलाना असजद ने कहा कि तीन तलाक का मामला उठाना पर्सनल लॉ मेें हस्तक्षेप है। कुरान या अहकाम में बदलाव नहीं हो सकता। जहां तक समान नागरिक संहिता की बात है तो संविधान के आर्टिकल 44 को भी भाजपा और आरएसएस के लोग गलत रूप से प्रस्तुत कर रहे हैं।
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जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबउद्दीन रजवी ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार शरीयत में यदि किसी प्रकार का दखल देगी तो उसकी कड़ी मुखालफत होगी। इसका जवाब भी उत्तर प्रदेश के चुनाव में मुसलमान, दलित और सेकुलर हिंदू देगा। उन्होंने कहा कि जब हर संप्रदाय और मजहब के लोगों को अपनी निजी संहिता, पुस्तकों, आस्था, विश्वास और परंपरा के अनुसार नागरिक कानून मानने की छूट है तो सिर्फ मुसलमानों के तलाक के मसले पर ही क्यों लगी हुई है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक या समान नगरिकता संहिता के बहाने देश के मुसलमान सांप्रदायिक ध्रुवीकरण नहीं होने देंगे।
ऑल इंडिया तंजीम उलमा-ए-इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुफ्ती अशफाक हुसैन कादरी ने कहा कि भारत के लॉ कमीशन, कानून मंत्रालय या मोदी सरकार को मुसलमानों के निजी कानून में दखल का कोई अधिकार नहीं है। तलाक का मुद्दा एक घिनौना खेल है। समान नागरिक संहिता लाकर केंद्र सरकार हिंदुस्तान की जड़ें खोदना चाहती है।
उन्होंने कहा कि तलाक को लेकर मुस्लिम औरतों से इतनी मोहब्बत क्यों हो गई। अगर है तो बच्चियों के तालीम की बात करें, दंगों में जो मर्द मारे गए हैं उनकी औरतों के बारे में सोचें। अगर औरत का हक देना है तो पहले मोदी यशोदा बेन को जायज हक दें। इसी तरह मौलाना तौकीर अहमद, मौलाना जाहिद उल्ला, हाफिज मसरूर अहमद, हाफिज अब्दुल वाहिद, वसी अहमद ने संबोधित किया। संचालन मौलाना फारूख हुसैन शम्सी ने किया।