शौचालय में दुकान: किसी ने रखीं लकड़ियां तो किसी ने उपले, ओडीएफ जिले में इज्जतघर बेपर्दा, ऐसा है हाल
अफसरों ने भले ही हजारों, लाखों शौचालय बनाने का आंकड़ा पेश कर कई गांवों को ओडीएफ बनाने का दावा करते हुए वाहवाही लूटी हो, लेकिन हकीकत में तस्वीर इसके बिलकुल उलट ही है। गांवों में इज्जतघर के नाम से बने शौचालय जर्जर हो चुके हैं। किसी ने शौचालय में ही दुकान खोल ली है।
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स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत लखीमपुर खीरी जिले को कई साल पहले ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित किया जा चुका है, लेकिन अभी भी लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। सरकारी योजना के तहत इज्जतघर के नाम से जो शौचालय बनाए गए, उनमें अधिकांश जर्जर हो चुके हैं।
किसी ने शौचालय में दुकान खोल रखी है तो किसी ने गोबर के उपले, लकड़ियां और भूसा भर रखा है। कई शौचालयों में तो दरवाजा तक नहीं है तो किसी में छत नहीं। ऐसे में सबसे बड़ी दिक्कत महिलाओं के सामने होती है। महिलाएं खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
स्वच्छ भारत मिशन बना मजाक
मोहम्मदी क्षेत्र में भी प्रत्येक ग्रामीण परिवार को शौचालय देने की महत्वाकांक्षी योजना मजाक बनकर रह गई है। गांव में इज्जतघर के नाम से बने शौचालय जर्जर हो चुके हैं। दरवाजे गायब हैं। दरवाजों की जगह लोग टाट और पल्ली टांग कर काम चला रहे हैं।
गांव दिलावरपुर में बने एक शौचालय में लाभार्थी ने परचून की दुकान खोल रखी है तो भौनापुर गांव में शौचालय के पास लकड़ी जमा है। खजुहा गांव में बने शौचालय में दरवाजा ही गायब है। चारों तरफ घास फूस और झाड़ झंखाड़ उगी है। वहीं भौनापुर में बने शौचालय एक शौचालय में दरवाजे के पल्लों की जगह पल्ली टांग कर आड़ बनाई गई है।