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पुलिस न पहुंचती तो बस कुछ और मिनट बची थी शिवांगी की जिंदगी

Sun, 18 Oct 2020 01:20 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2020 01:20 AM IST
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Shivangi's life was left for few more minutes if the police did not reach
इसी कार में की गई शिवांगी को जलाने की कोशिश। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

हत्या जैसा जघन्य अपराध करने में कांप गए शुभम के भाई और दोस्त के गैरपेशेवर हाथ
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शिवांगी के कपड़ों पर पेट्रोल डाला पर कार के बाहर लगाई आग अंदर तक नहीं पहुंच पाई

बहेड़ी। शिवांगी किस्मत की धनी निकली। लापरवाह और भ्रष्ट पुलिस वालों पर नए आए कप्तान की हाल ही में ताबड़तोड़ कार्रवाई का ही शायद असर था कि अपहरण की सूचना मिलने के कुछ ही मिनट के अंदर पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी और उसे जलती हुई कार से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। शुभम के भाई और दोस्त ने कार में आग लगाने से पहले उसके कपड़ों पर भी पेट्रोल डाला था लेकिन अनाड़ीपन और किसी के देख लिए जाने के डर से आनन-फानन में कार में बाहर से आग लगाकर भाग निकले। पुलिस का मानना है कि अगर उन्होंने कार के अंदर भी आग लगाई होती तो शिवांगी का बचना मुश्किल था।
शुभम के मुताबिक शिवांगी की हत्या की साजिश उसने अपने भाई शशांक और दोस्त प्रशांत के साथ तैयार की थी। दोनों गाजियाबाद से ही उसकी कार से पीछे-पीछे बाइक पर आ रहे थे। हत्या के लिए ज्यादा रात होने का इंतजार था। करीब पौने 11 बजे दो राज्यों की सीमा से सटे ढाबे पर उसने कार रोकी। नशे की गोलियां मिलाकर पिलाए गए जूस से शिवांगी को अच्छा-खासा नशा हो चुका था। ढाबे पर कार से उतरने से पहले उसने शिवांगी से कहा कि वह बेटे को दूध दिलाने जा रहा है तो वह बमुश्किल गर्दन हिला पाई। उसके कार से उतरते ही पीछे बाइक पर आए भाई और दोस्त में से एक कार को ले भागा।
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नशे में डूबी शिवांगी को एहसास तक नहीं हुआ कि कार कौन चला रहा है। आमडंडा के पास सुनसान इलाके में दोनों ने कार रोकी और फिर आनन-फानन में पहले शिवांगी और फिर कार के बाहर पेट्रोल डाला। इसके बाद कार पर बाहर से आग लगाकर दोनों बाइक पर फरार हो गए। योजना के मुताबिक उसने कुछ देर बाद ढाबे पर पत्नी के अपहरण का शोर मचाया मगर उसका अंदाजा गलत साबित हुआ। शिवांगी की मौत से पहले ही पुलिस ने उसे तलाशकर सुरक्षित बचा लिया।
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सदमे में शिवांगी.. अब समझ पाई तीन-चार दिन से इतना प्याह क्यों जता रहा था शुभम

शिवांगी ने पुलिस को बताया कि तीन दिन पहले शुभम गाजियाबाद से वजीरगंज (बदायूं) के मोहल्ला बनिया में उसे उसके मायके ले आया था। उसके परिवार से काफी घुलमिलकर बातें कर रहा था। शुक्रवार शाम उसे और बेटे को लेकर कार से भवाली निकला तो बदायूं में जलेबी और फिर बरेली में गोलगप्पे खिलाए। रास्ते भर मीठी-मीठी बातें करता रहा। उसे इस पर सुखद आश्चर्य भी हुआ। बहेड़ी में उसे जूस पिलाया जिसमें शायद नींद की गोलियां मिला दी थीं जिसके बाद उसे आग की तपिश से कुछ होश आया। देखा तो वह कार में अकेली थी और बाहर लपटें उठ रही थीं। पुलिस ने गेट खोलकर उसे बाहर निकाला। बोली, उम्र के अंतर की वजह से उसने शादी से इनकार किया था पर शुभम अड़ गया। बाद में उसे उसके बेटे से अलग करने की कई बार कोशिश की। अब उसे रास्ते से हटाकर दूसरी शादी करने के चक्कर में था।

उम्र में 11 साल का फर्क.. चार साल में ही नफरत की इंतिहा तक पहुंचा प्यार का सफर

शुभम से बातचीत में पुलिस को महसूस हुआ कि शिवांगी के लिए कितनी नफरत उसके दिल में भरी हुई थी। शुभम ने बताया कि शिवांगी से उसने 2016 में प्रेम विवाह किया था। वह जाट तो शिवांगी ठाकुर थी। दो साल उसने शिवांगी को अलग घर लेकर रखा। 2018 में उसके बड़े भाई शशांक की शादी हुई तो उसने परिवार को प्रेम विवाह की बात बताई और शिवांगी को लेकर घर आ गया। हालांकि परिवार ने शिवांगी को स्वीकार नहीं किया। वजह बिरादरी अलग होने के साथ यही थी कि तब वह 24 और शिवांगी 35 साल की थी। कुछ समय बाद शिवांगी ने घर में हक जमाना चालू कर दिया तो क्लेश शुरू हो गया। वह उसके माता-पिता की इज्जत नहीं करती थी। एक बार झूठा आरोप लगाकर पूरे परिवार को पुलिस से पकड़वा दिया, पूरे परिवार की काफी बेइज्जती हुई। तीन साल के बेटे युवराज को पीटती थी। उसे सिखाती थी उसके बाप, दादा-दादी सब चोर हैं। दो साल में कोई दिन ऐसा नहीं गुजरा जब घर में झगड़ा न हुआ हो।

जर्मनी-सिंगापुर में नौकरी के बाद भीमताल में खोला था होटल

शुभम ने बार-बार अपना बयान बदला। उसने बताया कि होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने के बाद वह दो बार जर्मनी और एक बार सिंगापुर के होटल में नौकरी कर चुका है। कुछ समय पहले उसने भीमताल का एक होटल दस साल की लीज पर लिया था। भवाली में एक मकान ले रखा था जहां अक्सर आना-जाना होता था।
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