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Shardiya Navratri 2023: नवरात्र में इन चीजों की खरीदारी होती है शुभ, ऐसे करें शक्ति की उपासना

Sun, 15 Oct 2023 10:54 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 15 Oct 2023 10:54 AM IST
सार

शारदीय नवरात्र शुरू हो गए हैं। पहले दिन माता शैलीपुत्री के पूजन का विधान है। नवरात्र में माता का विग्रह, चरण पादुका, तांबे या चांदी का कलश खरीदना शुभ होता है। 

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shardiya navratri 2023 Purchasing of these things is auspicious during Navratri
Shardiya Navratri 2023 - फोटो : amarujala

विस्तार

शारदीय नवरात्र शुरू हो गए हैं। घरों और मंदिरों में घट स्थापना के साथ ही नौ दिनों तक देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। प्रथम आराध्या देवी मां शैलपुत्री हैं। बरेली के प्रमुख देवी मंदिरों में रविवार सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी। बदायूं रोड स्थित चौरासी घंटा मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने विधि विधान से माता शैलपुत्री की आराधना कर सुख समृद्धि की कामना की। देवी उपासना के महापर्व में देवी मंदिरों में भव्य सजावट की गई है। 

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ज्योतिर्विद डॉ. सौरभ शंखधर ने बताया कि इस बार मां दुर्गा का आगमन गज (हाथी) पर हुआ है। इसे बेहद शुभ माना जा रहा है। 30 साल बाद शारदीय नवरात्र का प्रारंभ शश राजयोग, भद्र राजयोग और बुधादित्य योग के साथ होगा। पहले दिन इन तीन सुयोगों से मेष, वृष, कर्क, तुला, मकर राशि के जातकों को काफी लाभ होगा। नवरात्र में माता का विग्रह, चरण पादुका, तांबे या चांदी का कलश खरीदना शुभ होता है। देसी घी का दीप जलाकर नवार्ण मंत्र का जाप, दुर्गा जी के 32 नाम के नित्य 11 पाठ, देवी सूक्त, सिद्ध कुंजिका व कवच का पाठ करने से समृद्धि के योग बनेंगे।

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शारदीय नवरात्र की प्रमुख तिथियां 
15 अक्तूबर - प्रतिपदा तिथि मां शैलपुत्री की पूजा।
16 अक्तूबर - द्वितीया तिथि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा।
17 अक्तूबर - तृतीया तिथि मां चंद्रघंटा की पूजा।
18 अक्तूबर - चतुर्थी तिथि मां कुष्मांडा की पूजा।
19 अक्तूबर - पंचमी तिथि मां स्कंदमाता की पूजा।
20 अक्तूबर - षष्ठी तिथि मां कात्यायनी की पूजा।
21 अक्तूबर - सप्तमी तिथि मां कालरात्रि की पूजा।
22 अक्तूबर - दुर्गा अष्टमी मां महागौरी की पूजा।    
23 अक्तूबर - महानवमी मां सिद्धिदात्री की पूजा व शारदीय नवरात्र व्रत का पारण।
24 अक्तूबर - दशमी तिथि (दशहरा) मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन।

पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना 
विक्रम संवत् 2080, आश्विन, शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा, दिन रविवार। शारदीय नवरात्र व्रत का प्रथम दिन। प्रथम आराध्या देवी मां शैलपुत्री हैं। पूर्व जन्म में इनके पिता राजा दक्ष थे। राजा दक्ष ने प्रजेश होने पर यज्ञ किया। परन्तु अपने दामाद शिव को निमंत्रित नहीं किया। सती भगवान शंकर की स्वीकृति के बिना पिता के यहां चली गईं। यज्ञ स्थल पर अपने तिरस्कार एवं शिव का आसन ना देखकर कुपित सती यज्ञाग्नि में कूद पड़ीं। 

उधर, शिव की समाधि भंग हुई, तो उन्होंने वीरभद्र नामक गण को यज्ञ स्थल पर भेजा। वीरभद्र ने यज्ञशाला का विध्वंस किया और सती के जलते शरीर को लेकर चल पड़ा। धरती पर सती के अंग जिस-जिस स्थान पर गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ स्थापित हो गए। सती का अगला जन्म शैलराज की पुत्री पार्वती के रूप में हुआ। घोर तपस्या के बाद शिव ने उनका वरण किया। पर्वतराज की पुत्री होने से माता के इस प्रथम रूप का नाम शैलपुत्री पड़ा। नवरात्र के प्रथम दिन देवी के उपासक घटस्थापना, अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर माता के प्रथम चरित्र का पाठ कर मंगल फल प्राप्त करेंगे। 

उपासना का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु प्रकृति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
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