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प्रदूषण कम कर खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाएगा पराली का वैज्ञानिक निस्तारण
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आईवीआरआई
- फोटो : सोशल नेटवर्क
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आईवीआरआई के कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की कार्य योजना पर चर्चा
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बरेली। आईवीआरआई के कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों को खेतों में ही पराली के वैज्ञानिक विधि से निस्तारण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि खेतों में फसल अवशेषों के निस्तारण से मिट्टी की उर्वरकता को भी बढ़ाया जा सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की आईवीआरआई के निदेशक डॉ. बीपी मिश्रा की अध्यक्षता में हुई ऑनलाइन समीक्षा बैठक में वर्ष 2021 की कार्ययोजना पर चर्चा के दौरान यह जानकारी दी गई। डॉ. मिश्रा ने सुझाव दिया कि पशु विज्ञान से संबंधित शोध को बढ़ावा दिया जाए। पोषण वाटिका और एक गांव को पोषण गांव के तौर पर विकसित करने पर भी विचार किया गया। निदेशक ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें कृषि के साथ उससे जुड़े पशुपालन, कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन जैसे दूसरे व्यवसायों का प्रशिक्षण देने के साथ उनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने में सहयोग करने को कहा ताकि वे बैंकों की ऋण योजनाओं का लाभ उठाकर रोजगार का अवसर हासिल कर सकें। समिति की बैठक में केंद्रीय कुक्कुट अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. संजीव कुमार, डॉ नीरज श्रीवास्तव संयुक्त निदेशक कृषि, डॉ. नीरज श्रीवास्तव, अपर निदेशक पशुपालन आदि मौजूद रहे।
कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की आईवीआरआई के निदेशक डॉ. बीपी मिश्रा की अध्यक्षता में हुई ऑनलाइन समीक्षा बैठक में वर्ष 2021 की कार्ययोजना पर चर्चा के दौरान यह जानकारी दी गई। डॉ. मिश्रा ने सुझाव दिया कि पशु विज्ञान से संबंधित शोध को बढ़ावा दिया जाए। पोषण वाटिका और एक गांव को पोषण गांव के तौर पर विकसित करने पर भी विचार किया गया। निदेशक ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें कृषि के साथ उससे जुड़े पशुपालन, कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन जैसे दूसरे व्यवसायों का प्रशिक्षण देने के साथ उनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने में सहयोग करने को कहा ताकि वे बैंकों की ऋण योजनाओं का लाभ उठाकर रोजगार का अवसर हासिल कर सकें। समिति की बैठक में केंद्रीय कुक्कुट अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. संजीव कुमार, डॉ नीरज श्रीवास्तव संयुक्त निदेशक कृषि, डॉ. नीरज श्रीवास्तव, अपर निदेशक पशुपालन आदि मौजूद रहे।
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