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Bareilly News: सद्भावना पुलाव के स्टाल बने एकता की मिसाल
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बरेली। सद्भावना पुलाव के स्टाल शनिवार को एकता की मिसाल बन गए। सभी जाति-धर्म के लोग पहुंचे। आम आदमी से लेकर खास तक, सभी ने स्टाल तक पहुंचकर पुलाव का स्वाद चखा। साझा संस्कृति की मजबूत झलक दिखाई। इस तरह के आयोजन बार-बार करने की वकालत की। यह भी कहा कि एक लाख से अधिक लोगों ने एक-एक मुट्ठी चावल देकर बता दिया कि शहर के बाशिंदे हर अच्छे काम में आगे बढ़कर जुड़ते हैं और जुड़ते रहेंगे।
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आपसी मेलजोल और भाईचारा बना रहे, यही इस आयोजन का संदेश है। - पंकज कुमार गुप्ता, डेलापीर
लोगों ने चावल देकर सद्भावना का जो संदेश दिया है, उससे शहर का सम्मान बढ़ा है। - राहुल वर्मा, जोगी नवादा
इस तरह के आयोजन में शहर का प्रत्येक परिवार भागीदार बने। इससे दूरियां मिटेंगी। - चांदनी गुप्ता, डेलापीर
हर जाति-धर्म के लोग सद्भावना पुलाव खाने आए। इससे सौहार्द की भावना को बल मिला। - आदित्य वार्ष्णेय, बदायूं
मैं विद्यार्थी हूं। मैंने आज यह समझा कि मिलजुलकर रहने से ही देश की तरक्की होगी। - जगतराम, फरीदपुर
मैं बदायूं से डेलापीर आया था। यहां मैंने अपने दोस्तों के साथ सद्भावना पुलाव स्वाद लिया। - साहिल दुबे, बदायूं
ऐसे आयोजन से सामाजिक जुड़ाव बढ़ता है। सबके सुख-दुख में भागीदारी की प्रेरणा मिलती है। - मोहित सक्सेना, बिहारीपुर
डेलापीर में सद्भावना पुलाव का वितरण करके मैंने एकजुटता की भावना को महसूस किया। - सोनू श्रीवास्तव, चंद्रपुर
आयोजन के नाम से ही यह संदेश मिलता है कि मिलजुल कर रहेंगे तो आपकी पहचान बढ़ेगी। - श्लोक तिवारी, बरेली
शानदार आयोजन के लिए अमर उजाला का शुक्रिया। यह गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है। - डॉ. अनीस बेग, शाहजहांपुर रोड
मिलकर रहने की प्रेरणा मिली। जरूरतमंदों के लिए मिलकर काम किए जाने की जरूरत है। - इंतखाब हुसैन, पुराना शहर
पहल अच्छी है। आयोजन से सभी को सांप्रदायिक सौहार्द के साथ रहने की प्रेरणा मिलती है। - फसाहत, गढ़ी चौकी
सबकी भागीदारी ने अमर उजाला की मुहिम को यादगार बनाया। गर्व है कि मैं भी इसमें शामिल रहा। - डॉ. आकाश गंगवार, सौ फुटा रोड
मैंने डीडीपुरम में सद्भावना पुलाव का स्वाद चखा। मैं चाहता हूं कि ऐसे आयोजन हर साल हों। - डॉ. देशदीपक, पशु चिकित्साधिकारी फरीदपुर
सद्भावना पुलाव आयोजन ने जहां लोगों का आपसी जुड़ाव बढ़ाया, वहीं जरूरतमंदों को भोजन भी मिला। - ऋषभ मित्तल, गांधीनगर
शहर की साझा संस्कृति की महक दूर तक पहुंची। मैं भी इसमें भागीदार रहा। मुझे इसकी खुशी हुई। - डॉ. निशांत, लाल फाटक रोड
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आपसी मेलजोल और भाईचारा बना रहे, यही इस आयोजन का संदेश है। - पंकज कुमार गुप्ता, डेलापीर
लोगों ने चावल देकर सद्भावना का जो संदेश दिया है, उससे शहर का सम्मान बढ़ा है। - राहुल वर्मा, जोगी नवादा
इस तरह के आयोजन में शहर का प्रत्येक परिवार भागीदार बने। इससे दूरियां मिटेंगी। - चांदनी गुप्ता, डेलापीर
हर जाति-धर्म के लोग सद्भावना पुलाव खाने आए। इससे सौहार्द की भावना को बल मिला। - आदित्य वार्ष्णेय, बदायूं
मैं विद्यार्थी हूं। मैंने आज यह समझा कि मिलजुलकर रहने से ही देश की तरक्की होगी। - जगतराम, फरीदपुर
मैं बदायूं से डेलापीर आया था। यहां मैंने अपने दोस्तों के साथ सद्भावना पुलाव स्वाद लिया। - साहिल दुबे, बदायूं
ऐसे आयोजन से सामाजिक जुड़ाव बढ़ता है। सबके सुख-दुख में भागीदारी की प्रेरणा मिलती है। - मोहित सक्सेना, बिहारीपुर
डेलापीर में सद्भावना पुलाव का वितरण करके मैंने एकजुटता की भावना को महसूस किया। - सोनू श्रीवास्तव, चंद्रपुर
आयोजन के नाम से ही यह संदेश मिलता है कि मिलजुल कर रहेंगे तो आपकी पहचान बढ़ेगी। - श्लोक तिवारी, बरेली
शानदार आयोजन के लिए अमर उजाला का शुक्रिया। यह गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है। - डॉ. अनीस बेग, शाहजहांपुर रोड
मिलकर रहने की प्रेरणा मिली। जरूरतमंदों के लिए मिलकर काम किए जाने की जरूरत है। - इंतखाब हुसैन, पुराना शहर
पहल अच्छी है। आयोजन से सभी को सांप्रदायिक सौहार्द के साथ रहने की प्रेरणा मिलती है। - फसाहत, गढ़ी चौकी
सबकी भागीदारी ने अमर उजाला की मुहिम को यादगार बनाया। गर्व है कि मैं भी इसमें शामिल रहा। - डॉ. आकाश गंगवार, सौ फुटा रोड
मैंने डीडीपुरम में सद्भावना पुलाव का स्वाद चखा। मैं चाहता हूं कि ऐसे आयोजन हर साल हों। - डॉ. देशदीपक, पशु चिकित्साधिकारी फरीदपुर
सद्भावना पुलाव आयोजन ने जहां लोगों का आपसी जुड़ाव बढ़ाया, वहीं जरूरतमंदों को भोजन भी मिला। - ऋषभ मित्तल, गांधीनगर
शहर की साझा संस्कृति की महक दूर तक पहुंची। मैं भी इसमें भागीदार रहा। मुझे इसकी खुशी हुई। - डॉ. निशांत, लाल फाटक रोड