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कहीं शिक्षक कॉपी लेकर दौड़  रहे, कहीं बच्चे ही नहीं पहुंचे  

Sun, 19 Mar 2017 01:14 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Sun, 19 Mar 2017 01:14 AM IST
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Runs by taking a copy of teacher Stay there, baby does not reach
Runs by taking a copy of teacher Stay there, baby does not reach - फोटो : बरेली, अमर उजाला
यूपी बोर्ड परीक्षाओं की तरह ही बेसिक परीक्षाओं में अव्यवस्था हावी है। शनिवार को परीक्षा के पहले दिन कहीं कापियां नहीं थीं, तो कहीं बच्चे ही स्कूल नहीं आए। बीएसए चंदना राम खुद जिले से गैरहाजिर थीं। सचल दल व्यवस्था करने में जुटा रहा। स्कूलाें में बच्चाें को पेपर हल करना नहीं आया तो शिक्षकों ने ब्लैक बोर्ड पर उत्तर लिखकर उनको पास कराया। पहले दिन दोनों पालियों में 40 फीसदी बच्चे अनुपस्थित रहे। स्कूलों में चार लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। 
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पहली पाली में कक्षा एक से आठ तक के छात्रों की हिंदी और दूसरी पाली में कक्षा तीन से आठ तक के छात्राें ने कला की परीक्षा दी। कक्षा एक के छात्राें से मौखिक प्रश्न पूछे गए। हिंदी के प्रश्न पत्राें को विभाग की ओर से पहुंचा दिया गया, लेकिन कॉपी लेने के लिए शिक्षकों को खुद सेंटर तक जाना पड़ा। इसके बाद परीक्षा शुरू हो सकी। कक्षा 5 की कॉपी जमा करने के लिए बालजती और कक्षा 8 की कापियाें को जमा करने के लिए जसौली केंद्र में आना पड़ रहा है।
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रेलवे जंक्शन के स्कूल में बच्चे ही नहीं आए 
रेलवे जंक्शन प्राथमिक विद्यालय में पिछले कई महीनों से शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है। यहां खंड शिक्षा अधिकारी महानगर एनएस पवार ने शिक्षक स्वर्ण इला बरतरिया को तैनात किया। वह समय से स्कूल पहुंचीं, लेकिन यहां कोई बच्चा परीक्षा देने आया ही नहीं। जसौली केंद्र को सूचना दी गई कि विद्यालय में कोई बच्चा नहीं आया है। बताया जाता है कि शिक्षकों ने बच्चों को बताया ही नहीं था कि उनकी परीक्षा होनी है।
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इन गुदड़ी के लालाें का हौसला देखिए
बेसिक स्कूलों की परीक्षाआें को न तो अधिकारी गंभीरता से लेते हैं और न ही शिक्षक। इसलिए बच्चे भी इसे आम दिनाें की तरह ही देखते हैं, लेकिन प्राथमिक विद्यालय जसौली में अलग ही नजारा दिखा। यहां दो छात्रों का हौसला देखते बन रहा था। उनके हाथ और पैर में हड्डी फ्रैक्चर थी, प्लास्टर चढ़ा हुआ था, लेकिन फिर भी वे परीक्षा देने आए थे। कक्षा दो की छात्रा सो कुमारी का हाथ टूटा था। उसके बाएं हाथ में प्लास्टर था, लेकिन उसने अपनी परीक्षा दी। कक्षा तीन के छात्र अभय शर्मा के दोनों पैरोें में प्लास्टर चढ़ा हुआ है। उसके लिए कुर्सी का इंतजाम किया गया, उस पर बैठकर उसने हिंदी का प्रश्न पत्र हल किया। यहां के प्रधानाध्यापक और शिक्षक नेता हरीश बाबू शर्मा ने बताया कि इनके अभिभावक इन्हें परीक्षा दिलाने लाए थे, जिससे पता चलता है कि ये कितने गंभीर हैं। 


ब्लैकबोर्ड, किताबों से कराई गई नकल
परीक्षाओं में बच्चों को फेल होने का कोई डर नहीं है क्योंकि शासनादेश के अनुसार इनको फेल नहीं किया जा सकता। फिर भी बिथरी चैनपुर ब्लाक  के प्राथमिक विद्यालय चेनामुरारपुर में प्रथम पाली में हिंदी की परीक्षा में बच्चे ब्लैकबोर्ड से प्रश्नों के उत्तर कापी में उतार रहे थे। साथ ही हिंदी की किताब कलरव भी उनके पास खुली रखी थी। प्रधानाध्यापक लेखराज ने बताया कि जब शासन से आदेश है कि कोई बच्चा फेल नहीं होगा तो बोर्ड पर उत्तर लिखकर नकल कराना कौन सा अपराध है। प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी नरेंद्र सिंह पवार से बात की गई तो उन्होंने बताया नकल मुक्त परीक्षाएं कराना ही हमारी प्राथमिकता है यदि बोर्ड से लिखकर नकल कराई गई है तो कार्रवाई होगी।
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