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रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के 13 वें दीक्षांत समारोह में बोले कुलाधिपति रामनाईक

Sat, 21 Nov 2015 01:27 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sat, 21 Nov 2015 01:27 AM IST
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Ruhelkhand University's 13th convocation said Chancellor Ramnaik
बरेली। राज्यपाल रामनाईक ने युवा पीढ़ी को भारत की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कहा कि यह पूंजी ही वह शक्ति है जिसका इस्तेमाल करके हम देश और समाज को आगे बढ़ा सकते हैं, बशर्ते इसका इस्तेमाल सही ढंग से कर पाएं। इसके लिए आज युवाओं को सही दिशा  देने की जरूरत है।
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राज्यपाल शुक्रवार को यहां महात्मा ज्योतिबाफूले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के 13 वें दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे। उन्होंन डिग्री हासिल करने वाले छात्रों से कहा कि पढ़ाई की परीक्षा हो चुकी है, अब जीवन की परीक्षा में भी आपको खरा उतरकर दिखाना है। ईमानदारी का कोई पर्याय नहीं है। किसी की सिफारिश के बजाय अपनी ताकत के बूते आगे बढ़ोगे तो कभी असफल नहीं होओगे। सिफारिश की बैसाखी कमजोर लोग इस्तेमाल करते हैं। कुलाधिपति ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के लिए रुहेलखंड के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई जीत कर आजादी पा ली अब इस आजादी को और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी रुहेलखंड के लोगों की है।
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समारोह में मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रो. वेदप्रकाश ने कहा कि आगे बढ़ने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता। सतत अध्ययन जारी रखिए। ऊंचा सोचिए और जीतोड़ मेहनत से कभी पीछे मत हटिए। कार नहीं किताबें खरीदिए, तभी आप आगे बढ़ सकते हैं। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुशाहिद हुसैन ने आभार जताया। संचालन कुलसचिव डॉ. साहिब लाल मौर्य ने किया।
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इंसेट...
अंग्रेजों के जमाने के  परिधान बदलने पर खुश हुए
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में परिधान में किए गए बदलाव पर कुलाधिपति रामनाईक ने खुशी जताई। संबोधन में बोले- जब अंग्रेजों का जमाना नहीं रहा तो उनकी परंपराओं के परिधानों की जरूरत ही क्या है। उन्होंने कहा कि पिछले दीक्षांत में जब वह आए थे तो गले में रिबन काफी छोटी थी। इसमें कंजूसी अच्छी नहीं लगी। अब रिबन बड़ा है। अच्छा लग रहा है। इसी तरह लेमिनेट डिग्री का उनका सुझाव भी मान लिया गया है। चुटकी लेते हुए बोले- मुझे लग रहा है कि कुलाधिपति का अनुग्रह विश्वविद्यालय मान रहे हैं।


तब तो लड़कों को आरक्षण की जरूरत पड़ेगी
संबोधन के दौरान कुलाधिपति पूरी रौ में दिखे। बोले- जैसे-जैसे महिलाएं  लगातार आगे बढ़ती जा रही हैं। यहां दीक्षांत में पुरस्कृत होने वाले 83 विद्यार्थियों में 53 लड़कियां हैं और लड़के 30 ही हैं। इससे समझा जा सकता है कि अब समय आ गया है, लड़कों के लिए भी आरक्षण की जरूरत आ सकती है।  लड़कों के लिए यह चेतावनी है।
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